पश्चिम एशिया में जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रमुख अमेरिकी समाचार संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में ट्रंप ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' और 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों पर "भ्रामक" कवरेज और राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है।
"कमजोरी और डर" फैला रहा है मीडिया: ट्रंप
ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर किए गए अमेरिकी हमलों के बाद मीडिया की हेडलाइंस पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इन विरासत मीडिया संस्थानों का संपादकीय लहजा ऐसा है जैसे वे "चाहते हैं कि अमेरिका यह युद्ध हार जाए।"
ट्रंप ने नाराजगी जताई कि मीडिया ने खार्ग द्वीप पर हमले को, जिसे वे एक बड़ी सामरिक सफलता मानते हैं, "उकसावे की कार्रवाई" (Provocation) के रूप में पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी जवाबी कार्रवाई और वैश्विक ऊर्जा संकट पर ध्यान केंद्रित करके मीडिया "कमजोरी और डर" प्रोजेक्ट कर रहा है।
ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिकी सेना मैदान में तैनात है, तब घरेलू प्रेस को "क्लिकबेट" और "अमेरिका विरोधी बयानबाजी" के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पश्चिम एशिया में युद्ध अब अपने 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों से हुई थी, जिसमें अभियान के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत का दावा किया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां तब आईं जब पश्चिम एशिया में युद्ध अपने 15वें दिन में प्रवेश कर गया था; 28 फरवरी को US-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था, जिसमें सैन्य अभियान के पहले ही दिन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी।
जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने पूरे क्षेत्र में US ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, और होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से बंद करने की घोषणा की, जिससे वैश्विक तेल शिपिंग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित होता है। इस कदम से ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया, और कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार चली गई।
बढ़ती तेल कीमतों से बढ़ते दबाव के बीच, ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र, खर्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर हमले का आदेश दिया, ताकि तेहरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का दबाव बनाया जा सके।
US युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने भी शुक्रवार को मीडिया पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ पत्रकार और मीडिया संस्थान ऐसी नकारात्मक कवरेज देना "बंद नहीं कर पा रहे हैं," क्योंकि वे "केवल राष्ट्रपति को बुरा दिखाना चाहते हैं।" इससे पहले दिन में, 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कई देशों से आग्रह करते हुए कहा: "उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, UK और अन्य देश, जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, उस क्षेत्र में अपने जहाज़ भेजेंगे; ताकि होर्मुज़ अब उस देश की ओर से कोई खतरा न रहे, जिसे पूरी तरह से पंगु बना दिया गया है।"
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बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव आज यानी की 16 मार्च को अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजपाल यादव परदे पर अपनी कॉमेडी से लोगों को खूब हंसाते हैं। राजपाल यादव की जिंदगी में कई ऐसे मौके आए, जब उनका जीवन उदासी से भर गया। लेकिन अपने मुश्किल समय में राजपाल यादव ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने फिल्मी दुनिया में बड़ा नाम कमाया है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अभिनेता राजपाल यादव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के कुण्डरा गांव में 16 मार्च 1971 को राजपाल यादव का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम नौरंग यादव था, जोकि एक किसान थे। परिवार की माली हालत ठीक न होने के बाद भी उनके पिता ने राजपाल की शिक्षा पर जोर दिया और शहर के स्कूल में एडमिशन किया। बचपन से ही राजपाल अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते थे। वैसे तो राजपाल यादव आर्मी ज्वॉइन करना चाहते थे, लेकिन छोटा कद होने की वजह से ऐसा नहीं हो सका। राजपाल ने अभिनय की दुनिया में नाम कमाने का सपना देखा और इस सपने को सच भी कर दिखाया।
छोटे पर्दे पर किया डेब्यू
साल 1992 में राजपाल यादव ने थिएटर ज्वॉइन किया। दो साल थिएटर करने के बाद वह दिल्ली में NSD गए। यहां पर एक्टिंग का कोर्स करने के बाद साल 1997 में वह मुंबई पहुंचे। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत छोटे परदे से किया। अभिनेता ने पुणे के यरवदा जेल पर 'स्वराज' नामक डीडी वन पर आने वाले सीरियल से शुरूआत की थी। साल 1999 में उनको पहली फिल्म मिली और यह सिलसिला आज भी जारी है।
इन फिल्मों में किया काम
कद छोटा होने की वजह से इंडस्ट्री में उनको काफी संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन राजपाल ने अपनी प्रतिभा के दम पर खुद को साबित कर दिखाया। साल 1999 में उनको पहली फिल्म 'दिल क्या करे' मिली थी। लेकिन उनको पहचान साल 2000 में आई फिल्म 'जंगल' से मिली। इस फिल्म में अभिनेता के काम को नोटिस किया गया। इसके बाद अभिनेता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजपाल यादव ने फिल्म 'चुप-चुप के', 'वक्त', 'हंगामा', 'गरम मसाला', 'भूल भुलैया', 'फिर हेरा फेरी', 'भागम भाग' और 'ढोल' जैसी फिल्मों में बतौर कॉमेडी एक्टर काम किया है।
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