क्या आप जानती हैं कि पर्स या पॉकेट में रखी छोटी सी अंगूठी शरीर के कई अंगों को हेल्दी और दर्द को कम करने में सहायक हो सकती है। यह सुनने में किसी चमत्कार से कम नहीं लगता है। लेकिन इसको एक्यूप्रेशर में मैजिक रिंग के नाम से जानते हैं। यह छोटी सी रिंग असल में सेहत का जादुई रिमोट है। यह रिंग 10 रुपए में आसानी से मिल जाएगी। लेकिन इसके फायदे हजारों रुपए की दवा और थेरेपी पर भी भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सुजोक रिंग इस्तेमाल करने के 10 जबरदस्त फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं।
एक्सपर्ट की राय
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो भले ही यह देखने में नॉर्मल स्प्रिंग जैसी लगे, लेकिन यह सुजोक थेरेपी के सिद्धांतों पर काम करती हैं। 'सु' का अर्थ हाथ और 'जोक' का अर्थ पैर होता है। वहीं शरीर हाथों और पैरों में समाया हुआ है।
उंगलियों में ऐसे छोटे-छोटे प्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जो सीधे दिल, लिवर, फेफड़े और नर्वस सिस्टम से जुड़े होते हैं। जब इस रिंग को उंगलियों में ऊपर-नीचे घुमाया जाता है, तो इन पॉइंट्स पर एक साथ काम करती है। इस रिंग से शरीर का नेचुरल हीलिंग प्रोसेस तुरंत एक्टिव होता है और यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है। यह नसों को एक्टिव करती है और शरीर में रुकी हुई प्राण ऊर्जा को मुक्त करती है।
अच्छी तरह होते हैं अंगों के कार्य
यह रिंग एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को एक्टिव करती हैं। जिससे लिवर, किडनी और पेट जैसे अंगों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
ब्लड सर्कुलेशन
इस रिंग को पहनने से उंगलियों से लेकर पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे चेहरे पर भी निखार आता है।
दूर होगा तनाव
इस रिंग को घुमाने से दिमाग में एंडोर्फिन नामक हैप्पी हार्मोंस रिलीज होते हैं। इससे आपको सुकून और मानसिक शांति मिलती है।
दर्द और अकड़न से राहत
अगर आप दिनभर लिखने या फिर टाइपिंग का काम करती हैं, तो यह हाथों और उंगलियों के दर्द को भी मिनटों में कम कर सकती है।
हीलिंग गुण
बता दें कि इसमें नेचुरल हीलिंग गुण पाया जाता है। यह शरीर के डिफेंस मैकेनिज्म को इतना मजबूत करती है कि शरीर खुद को ठीक करने लगता है।
सुस्ती और थकान दूर होगी
अक्सर दोपहर के समय सुस्ती आती है। इस दौरान 2 मिनट इस रिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। यह शरीर में फौरन एनर्जी का फ्लो बढ़ा देती है।
झुनझुनी और सुन्नपन में आराम
यह रिंग उंगलियों की झुनझुनी और अकड़न दूर करने के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपाय है।
फोकस बढ़ता है
यह रिंग दिमाग को शांत करके फोकस बढ़ाती है। छात्रों और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन स्ट्रेस बस्टर है।
नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा
यह नसों के नेटवर्क को सही करने के साथ पैरालिसिस जैसी कंडीशन में भी मददगार हो सकती है।
सुरक्षा
यह पूरी तरह से आसान और नेचुरल तरीका है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है और हर उम्र का व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन फिर भी इसके इस्तेमाल से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।
रिंग इस्तेमाल करने का तरीका
इसको हर उंगली में एक-एक करके डालें और ऊपर से नीचे तक 2-3 मिनट तक रोल करें।
जब उंगली हल्की गर्म और लाल महसूस होने लगे, तो समझ लेना कि ब्लड सर्कुलेशन शुरू हो गया है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि आप इसको घर पर, सफर के दौरान, ऑफिस में काम करते हुए या टीवी देखते हुए कहीं भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
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सोशल मीडिया पर एक हृदयविदारक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें 32 वर्षीय हरीश राणा का परिवार उन्हें अंतिम विदाई दे रहा है। यह विदाई साधारण नहीं है; यह एक ऐसी विदाई है जो 13 साल के लंबे इंतजार, कोमा की यंत्रणा और कानूनी लड़ाई के बाद मिली है। हरीश को अब दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पैलिएटिव केयर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहाँ वे आने वाले हफ्तों में 'चिकित्सकीय निगरानी' के तहत अंतिम सांस लेंगे।
वीडियो में हरीश को अपनी पलकें झपकाते और घूंट भरते देखा जा सकता है। पिछले 13 सालों में वह बस यही दो हरकतें कर पाए हैं। एक हादसे में गिरने से उनके दिमाग़ को गंभीर और ठीक न होने वाला नुकसान पहुँचा था।
वीडियो में एक ब्रह्मा कुमारी बहन को उदास मुस्कान के साथ उनके माथे पर प्यार से हाथ फेरते हुए भी दिखाया गया है, जबकि उनकी मज़बूत माँ पीछे से चुपचाप देख रही हैं। वीडियो में ब्रह्मा कुमारी लवली कहती हैं, "सबको माफ़ करते हुए, सबसे माफ़ी माँगते हुए, तुम जाओ।"
कुमारी लवली का जुड़ाव 'प्रभु मिलन भवन' से है, जो गाज़ियाबाद में ब्रह्मा कुमारी का एक केंद्र है। राणा परिवार लंबे समय से ब्रह्मा कुमारी आंदोलन से जुड़ा रहा है। यह महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला एक आध्यात्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1937 में हुई थी और इसका मुख्यालय माउंट आबू में है।
यह पल सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरीश राणा को गरिमा के साथ मरने की अनुमति दिए जाने के कुछ दिनों बाद आया है। यह भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (इच्छा-मृत्यु) का पहला ऐतिहासिक मामला है, जिसमें कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट ने डॉक्टरों की इस राय को माना कि राणा कभी ठीक नहीं हो पाएँगे। साथ ही, कोर्ट ने यह भी माना कि जिन नली (ट्यूब) के ज़रिए उन्हें खाना दिया जा रहा है और उन्हें ज़िंदा रखा जा रहा है, वे सिर्फ़ उनके दर्द को बढ़ा रही हैं। यह ऐसा दर्द है जिसे 32 साल के हरीश किसी को बता भी नहीं पा रहे हैं।
11 मार्च को कोर्ट के आदेश के बाद, हरीश राणा को दिल्ली के AIIMS की पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ़्ट कर दिया गया। वहाँ एक मेडिकल बोर्ड उनके जीवन के अंतिम समय की देखभाल (end-of-life care) की योजना बनाएगा।
हालाँकि डॉक्टरों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि उनकी हालत ठीक नहीं हो सकती, फिर भी सुप्रीम कोर्ट को यह साफ़ करना पड़ा कि वेंटिलेटर के अलावा, खाने और मेडिकल ट्यूब को हटाना कानूनी तौर पर 'पैसिव यूथेनेशिया' माना जा सकता है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने यह ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया। इस फ़ैसले से परिवार को अस्पताल में ही जीवन-रक्षक उपकरणों (life support) को हटाने की अनुमति मिल गई, जिससे हरीश राणा गरिमा के साथ अपनी जान दे पाएँगे। इस मामले ने भारत में जीवन के अंतिम समय के अधिकारों (end-of-life rights) को लेकर डॉक्टरों और वकीलों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। पंजाब यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के छात्र राणा को 2013 में अपने पेइंग गेस्ट आवास की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद सिर में चोटें आई थीं, और तब से वह कोमा में हैं।
फैसले के तुरंत बाद, राणा के पिता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके बेटे से कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति देने से परिवार को कोई निजी लाभ नहीं होगा। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला ऐसी ही स्थितियों का सामना कर रहे अन्य लोगों की मदद कर सकता है।
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