Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू नव वर्ष पर नीम खाने की परंपरा क्यों है? जानिए धार्मिक मान्यता और फायदे
Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. दरअसल, अंग्रेजी कैलेंडर में तारीख के अनुसार नया साल आता है. मगर हिंदू नववर्ष पंचांग के आधार पर चलता है. इस बार हिंदू नववर्ष की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो रही है. इसी दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत भी हो रही है. माना जाता है कि साल के पहले दिन की शुरुआत जिस ग्रह के प्रभाव से होती है. वहीं, ग्रह उस साल का राजा होता है. इस बार नववर्ष की शुरुआत गुरुवार से हो रही है. इसलिए, राजा की भूमिका में वह रहने वाले हैं और मंगल की भूमिका मंत्रीपद की रहेगी.
हिंदू नववर्ष में नीम खाने का परंपरा
हिंदू नववर्ष के पहले दिन पर लोग नीम के पत्ते खाते हैं. दरअसल, यह एक पुरानी परंपरा है जो भारत के कई हिस्सों में निभाई जाती है. साल के पहले दिन लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठते हैं, स्नान करते हैं, दान और भगवान की पूजा करते हैं. मगर इस दिन सुबह नीम के कड़वे पत्ते खाने का नियम क्या है. आइए जानते हैं.
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क्यों खाते हैं नीम के पत्ते?
भारत के कई राज्यों में हिंदू नववर्ष पर नीम की पत्तियों का सेवन करना होता है. दरअसल, इस दिन गुड़ी पाड़वा और उगड़ी का पर्व भी मनाया जाता है. इसलिए, इस मौके पर लोग नीम का सेवन करते हैं. कई प्रांतों में नीम के पत्तों को इमली, गुड़ और कच्ची कैरी के साथ भी खाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस परंपरा में जीवन में मिठास और कड़वाहट भरे अनुभवों को स्वीकार करना होता है. माना जाता है कि नीम के पत्ते खाने से आपका पूरा साल सुख-दुख, सफलता और चुनौतियों से भरा होता है. नीम खाने का उद्देश्य होता है कि हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार होना चाहिए.
सेहत से जुड़ा राज
साल के पहले दिन नीम के पत्ते खाने के पीछे का रहस्य हमारे स्वास्थ्य से भी जुड़ा होता है. इन कड़वे पत्तों को खाने से संक्रमण और एलर्जी की समस्या होने की संभावना कम हो जाती है. बता दें कि हिंदू नववर्ष के साथ वसंत ऋतु की शुरुआत होती है. इसलिए मौसम बदलते ही लोग बीमार पड़ जाते हैं. नीम का पत्ता खाने से शरीर के अंदर मौजूद अशुद्धियां निकलती हैं.
नववर्ष के पहले दिन क्या काम न करें?
नववर्ष के पहले दिन हमें कुछ बातों का ख्याल रखने की जरूरत होती है. इस दिन हमें तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन किसी पर भी गुस्सा, नाराजगी और किसी प्रकार का झगड़ा नहीं करना चाहिए. किसी विवाद में न पड़े. इस दिन हमें किसी से उधार नहीं लेना चाहिए और न ही देना चाहिए. किसी का अपमान बिल्कुल न करें.
नववर्ष के पहले दिन क्या करें?
नववर्ष के प्रथम दिन पर हमें ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. बता दें कि इस दिन से नवरात्रि का पावन पर्व भी शुरू होता है. इसलिए, हमें स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए. अगर आप नवरात्रि के व्रत कर रहे हैं और माता की चौकी बिठा रहे हैं तो उसके लिए विधिवत पूजा करें. यदि आप व्रत नहीं कर रहे हैं तो इस दिन स्नान आदि करके सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दें. भगवान गणेश की पूजा करें और दुर्गा माता की पूजा करें. साल के पहले दिन अपने घर की साफ-सफाई जरूर करें. इस दिन घर में पवित्रता बनाए रखनी चाहिए.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर भारी अमवास्या का साया! जानें क्या होगा स्नान-दान और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
Chaitra Navratri 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने जा रही है. शक्ति की उपासना का यह दिन बहुत शुभ माना जाता है. नवरात्र की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ होती है और यह त्योहार लगातार 9 दिनों तक मां दुर्गा को समर्पित होता है. इस साल का चैत्र नवरात्र कई मायनों में खास माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय बाद एक अनोखा संयोग देखने को मिलेगा. दरअसल, इस दिन चैत्र नवरात्र के कलश स्थापना वाले दिन पर अमावस्या का संयोग भी बन रहा है. चलिए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और स्नान-दान के समय के बारे में.
चैत्र नवरात्र पर भारी अमावस्या का साया
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 72 साल बाद चैत्र नवरात्र पर चैत्र अमावस्या का साया बन रहा है. इसलिए इस बार का त्योहार धार्मिक नजरिए से बेहद जरूरी माना जा रहा है. हालांकि प्रतिपदा तिथि थोड़ी देर से शुरू होगी फिर भी नवरात्र पूरे 9 दिनों तक ही मनाए जाएंगे.
कब है चैत्र अमावस्या का संयोग?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र अमावस्या की तिथि 18 मार्च की सुबह 08 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 19 मार्च की सुबह 06 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके बाद प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा जिससे नवरात्र की शुरुआत मानी जाएगी. खास बात यह है कि अमावस्या और प्रतिपदा दोनों तिथियां सूर्योदय से मान्य होती हैं. इसी कारण अमावस्या के स्नान-दान और नवरात्र की कलश स्थापना एक ही दिन यानी 19 मार्च को की जाएगी.
चैत्र अमावस्या पर स्नान-दान का मुहूर्त (Chaitra Amavasya Snan Daan Muhurat)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या के दिन स्नान-दान शुभ माना जाता है. 19 मार्च को स्नान-दान के लिए सुबह 04 बजकर 51 मिनट से 05 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. परंपरा के अनुसार, इस दिन ब्रह्मा मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर स्नान कप दान-पुण्य करने की परंपरा है.
चैत्र नवरात्र कलश स्थापना मुहूर्त (Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana)
चैत्र नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से 07 बजकर 43 मिनट तक कलश स्थापना का मुहूर्त रहेगा. यदि इस समय में स्थापना न हो पाए तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक भी कलश स्थापना की जा सकती है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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