Video: कबाड़ का कमाल! झारखंड के इस गांव में टीन के डिब्बों से खनकते हैं लाखों, 5 पीढ़ियों से बादशाहत कायम
Jharkhand Craftsmanship: जिसे दुनिया कबाड़ समझकर फेंक देती है. पलामू के बरांव गांव ने उसे अपनी पहचान बना लिया है. पुराने टीन, जंग लगे चदरे और पीतल के टुकड़ों से यहां ऐसी जादुई घंटियां तैयार होती हैं. जिनकी गूंज झारखंड ही नहीं, बल्कि यूपी, एमपी और बिहार तक सुनाई देती है. करीब 40 परिवारों के लिए यह कबाड़ सिर्फ सामान नहीं, बल्कि लाखों का टर्नओवर देने वाला काला सोना है. कारीगर छविनाथ विश्वकर्मा बताते हैं कि उनके पूर्वज जब यह काम करते थे. तब एक घंटी 60 पैसे की थी, जो आज 30 से 800 रुपये तक में बिकती है. खास बात यह है कि इस हुनर में मुनाफा चौंकाने वाला है. मात्र 5 हजार के निवेश पर कारीगर 20 हजार तक की कमाई कर लेते हैं. मवेशियों के गले में बंधने वाली ये घंटियां पूरी तरह हाथ से तैयार होती हैं. एक घंटी बनाने में 2 घंटे का समय लगता है, लेकिन इसकी मांग इतनी है कि बनने से पहले ही ऑर्डर बुक हो जाते हैं. यह गांव सालाना 20 से 25 लाख का कारोबार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहा है.
पहली गलती पर अंगूठा काटना, दूसरी पर गर्दन; जापान के याकूजा गैंग के सामने 'पिद्दी' हैं दाऊद इब्राहिम और रहमान डकैत
World most Dangerous underworld gangs: क्या आप भी गैंगस्टर, माफिया या अंडरवर्ल्ड आधारित फिल्में पसंद करते हैं. अगर आपने अब तक बॉलीवुड की फिल्में देखकर सोचते हैं कि भारत में दाऊद इब्राहिम का डी गैंग और पाकिस्तान में रहमान डकैत सबसे खतरनाक अंडरवर्ल्ड गैंग चलाते रहे हैं, तो यह आपकी गलतफहमी है. जापना, अमेरिका और चीन जैसे देशों में ऐसे गैंगस्टर, माफिया या अंडरवर्ल्ड वाले गैंग सक्रिय हैं जिनके सामने भारतीय या पाकिस्तानी गैंग कहीं नहीं टिकते हैं. आइए उन्हीं गैंगस्टर गैंग में एक याकूजा गैंग के बारे में जानते हैं.
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