Sehri Iftar Time Today in Delhi: रमजान 2026, आज दिल्ली का सेहरी-इफ्तार टाइम,जानें प्रयागराज-वाराणसी समेत देश के 15 शहरों की रोजा टाइमिंग
15 मार्च 2026 को रमजान का 25वां रोजा है। जानिए दिल्ली, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद समेत देश के कई शहरों में आज के रोजा इफ्तार और 16 मार्च की सुबह सेहरी का सही समय, ताकि रोजेदार सही समय पर रोजा खोल सकें और सेहरी कर सकें।
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के विकल्प तलाश रहा ब्रिटेन: ऊर्जा मंत्री मिलिबैंड
लंदन, 15 मार्च (आईएएनस)। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने कहा है कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित और खुला रखने के लिए संभावित कदमों पर गहनता से विचार कर रहा है। आईआरजीसी की धमकी के कारण यह अहम समुद्री रास्ता लगभग बंद हो गया है, जिससे तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं।
ब्रिटेन के ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड ने स्काई न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सहयोगी देशों के साथ मिलकर यह देख रही है कि समुद्री मार्ग को फिर से पूरी तरह चालू रखने में क्या भूमिका निभाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यदि इसमें व्यवधान आता है तो इसका असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ब्रिटेन अपने साझेदार देशों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है।
इसमें समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए खास जहाज या ड्रोन इस्तेमाल करने जैसे तरीके भी शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन की सेना इतनी काबिल है कि अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ इस संकट से निपटने में भी मदद कर सकती है।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का प्रमुख मार्ग है, जिससे होकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ब्रिटिश सरकार का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। इसी उद्देश्य से ब्रिटेन सहयोगी देशों के साथ मिलकर संभावित कूटनीतिक और सुरक्षा विकल्पों पर चर्चा कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा बाजार पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। इसलिए पश्चिमी देश इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त कदमों की संभावना तलाश रहे हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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