केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अब PNG कनेक्शन वाले घरों में नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर, सरेंडर करने होंगे पुराने कनेक्शन
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और भारत में एलपीजी की रिकॉर्ड बुकिंग के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू गैस वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि जिन घरों में पहले से ही पीएनजी (Piped Natural Gas) यानी पाइप वाली गैस का कनेक्शन लगा हुआ है, उन्हें अब एलपीजी सिलेंडर की सुविधा नहीं मिलेगी। सरकार का उद्देश्य गैस की जमाखोरी रोकना और सप्लाई चेन को उन जरूरतमंदों तक पहुँचाना है जिनके पास पीएनजी का विकल्प नहीं है।
"No person having a Piped Natural Gas connection and also having domestic LPG connection shall retain a domestic LPG connection, or take refills of domestic LPG cylinders from any Government oil company, or through their distributors. Such persons will be required to immediately… pic.twitter.com/TgSMHzfD7F
— Press Trust of India (@PTI_News) March 14, 2026
क्यों लिया गया यह फैसला? पैनिक बाइंग और किल्लत की अफवाहें
दरअसल, ईरान-इजरायल युद्ध के चलते भारत में गैस किल्लत की अफवाहें फैली थीं, जिसके बाद देशभर में एलपीजी की बुकिंग में अप्रत्याशित उछाल आया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, आम दिनों में जहाँ 50-55 लाख सिलेंडर बुक होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 75-76 लाख प्रतिदिन पहुँच गया है।
सरकार ने पाया कि कई उपभोक्ता सुरक्षा के लिहाज से पीएनजी कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी सिलेंडर भी स्टॉक कर रहे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम अभाव की स्थिति पैदा हो रही है।
पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए क्या है नया नियम?
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पीएनजी का उपयोग करने वाले सभी उपभोक्ताओं को अपने पुराने एलपीजी कनेक्शन तुरंत सरेंडर करने होंगे।
यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है। सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों के डेटा का मिलान एलपीजी डेटाबेस से करें और दोहरे कनेक्शन रखने वाले ग्राहकों की पहचान कर उनकी आपूर्ति बंद करें।
सप्लाई चेन पर दबाव कम करने की कोशिश
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि देश में गैस का पर्याप्त भंडार है, लेकिन 'पैनिक बाइंग' वितरण नेटवर्क पर अनावश्यक बोझ डाल रही है। पीएनजी कनेक्शन वाले घरों को एलपीजी लिस्ट से बाहर करने से करीब लाखों सिलेंडरों की बचत होगी, जिन्हें उन ग्रामीण और शहरी इलाकों में भेजा जा सकेगा जहाँ केवल एलपीजी ही एकमात्र विकल्प है।
कालाबाजारी के खिलाफ राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी
सरकार केवल उपभोक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि कालाबाजारी करने वाले डीलरों पर भी सख्ती कर रही है। केंद्र के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्यों में नागरिक आपूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें छापेमारी कर रही हैं। झांसी और हापुड़ जैसे जिलों में अवैध रूप से स्टोर किए गए सिलेंडरों के गोदाम सील किए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
Papmochani Ekadashi 2026: आज है पापमोचनी एकादशी, जानें पूजा और पारण का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
Papmochani Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व गया है. हर महीने दो एकादशी व्रत किए जाते है. एक व्रत महीने के कृष्ण पक्ष में होता है और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. इन एकादशी के नाम, इनकी कथा और इनसे मिलने वाले फल भी अलग-अलग होते हैं. चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है. इस एकादशी पर भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं आज पापमोचनी एकादशी पर किस मुहूर्त में पूजा करना शुभ होगा. व्रत के पारण का मुहूर्त क्या होगा. इस एकादशी पर क्या है पूजा की विशेष विधि.
कब है पापमोचिनी एकादशी?
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि कल यानी 14 मार्च को सुबह 08 बजकर 15 मिनट से शुरु हो चुकी है. 15 मार्च को एकादशी तिथि का समापन सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, आज यानी 15 मार्च, रविवार को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखना शुभ होगा. स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय दोनों के लिए आज व्रत रखना शुभ है.
पापमोचिनी एकादशी पारण मुहूर्त
एकादशी व्रत का पूरा फल पाने के लिए द्वादशी तिथि में व्रत का पारण शुभ मुहू्र्त में करना बेहद जरुरी होता है. इस साल पापमोचिनी एकादशी व्रत का पारण 16 मार्च को सुबह 06 बजकर 30 मिनट से सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर करना शुभ होगा. इस शुभ मुहूर्त में व्रत खोलने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है.
पापमोचिनी एकादशी पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 55 मिनट से सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक.
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 06 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से दोपहर 03 बजकर 18 मिनट तक.
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 27 मिनट से शाम 06 बजकर 51 मिनट तक.
शास्त्रों के अनुसार, इन शुभ मुहूर्त में पापमोचिनी एकादशी व्रत की पूजा करने से पूजा का अधिक फल प्राप्त होता है. भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है.
पापमोचिनी एकादशी पूजा विधि
आज सूर्योदय से पहले स्नान कर, व्रत संकल्प लें. उत्तर-पूर्व दिशा में एक चोकी बिछाकर उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं. चौकी पर श्रीलक्ष्मीनारायण जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. शालिग्राम शिला हो तो उसकी स्थापना चौकी पर करें. गंगाजल से श्रीलक्ष्मीनारायण और पंचामृत से शालिग्राम शिला का अभिषेक करें.
चंदन और सुंगधित फूलों से श्रंगार करें. तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. मौसम फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें.
आरती के बाद आसन पर बैठकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की माला जाप करें. विष्णु चालीसा का पाठ करें. संभव हो तो रात को जागरण करें. इस विधि से पापमोचिनी एकादशी व्रत पर पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद प्रणाम करते हुए पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना जरुर करनी चाहिए.
पापमोचिनी एकादशी का महत्व
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है पापमोचिनी एकादशी. शास्त्रों के मुताबिक, इस एकादशी का व्रत रखने से जाने-अनजाने में किए गये सभी पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है. प्रेत योनि में भटकना नहीं पड़ता. यदि इस एकादशी के व्रत का फल अपने पितरों को दिया जाए तो वे भी प्रेत योनि से मुक्ति पा जाती हैं. इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साधक को सभी सुखों की प्राप्ति होती है. जीवन के सभी संकट और बाधाएं समाप्त हो जाती है. अंत में भगवान विष्णु के बैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है. मोक्ष की प्राप्ति होती है.
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