नर्सरी खोलने के लिए गुजरात सरकार देगी 40 लाख रुपये, किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए आई बंपर स्कीम
गुजरात सरकार ने राज्य के किसानों को उद्यमी बनाने और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक बड़ी योजना पेश की है. 'नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम' योजना के तहत अब किसान अपनी नर्सरी खोलकर लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं. इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशों से होने वाले खाद्य तेल के आयात को कम करना और घरेलू स्तर पर ऑयल पाम के उत्पादन को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि इससे न केवल किसानों की इनकम बढ़ेगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी.
40 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसके तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता है. सरकार ऑयल पाम नर्सरी स्थापित करने के लिए प्रति नर्सरी 40,00,000 रुपये (चालीस लाख रुपये) की सब्सिडी दे रही है. इस योजना के जरिए 10 हेक्टेयर की क्षमता वाली नर्सरी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें बड़ी मात्रा में पौधे तैयार किए जा सकेंगे. यह राशि उन किसानों के लिए एक बड़ा सहारा है जो खेती के साथ-साथ नर्सरी के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं और अपनी उत्पादन कैपेसिटी को बढ़ाना चाहते हैं.
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ बुनियादी योग्यताएं तय की गई हैं. आवेदन करने वाला व्यक्ति अनिवार्य रूप से एक किसान होना चाहिए और वह गुजरात राज्य का मूल निवासी होना चाहिए. यह स्कीम खास तौर पर उन प्रगतिशील किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो खेती में नई तकनीक और नए उत्पादों को अपनाने के लिए तैयार हैं. सरकार चाहती है कि किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें, बल्कि वे नर्सरी जैसे मुनाफे वाले काम से भी जुड़ें.
आवेदन की पूरी प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाया गया है. इच्छुक किसानों को गुजरात सरकार के 'आई-खेड़ूत पोर्टल' (I-Khedut Portal) पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा. पोर्टल पर जाकर 'बेनिफिशियरी रजिस्ट्रेशन' के विकल्प को चुनना होगा और अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे जिला, तालुका, गांव और बैंक अकाउंट नंबर दर्ज करना होगा. मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के जरिए अकाउंट वेरीफाई होने के बाद किसान 'एग्रीकल्चरल स्कीम्स' सेक्शन में जाकर इस नर्सरी योजना के लिए आवेदन फॉर्म भर सकते हैं. फॉर्म भरने के बाद उसकी पुष्टि करना और प्रिंटआउट लेना जरूरी है.
जरूरी दस्तावेजों की जानकारी
ऑनलाइन आवेदन करते वक्त किसानों के पास कुछ जरूरी कागजात होने चाहिए. इनमें पहचान के लिए आधार कार्ड और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड जैसे 7-12 और 8-ए की कॉपी अनिवार्य है. इसके अलावा, बैंक पासबुक या कैंसिल्ड चेक की जरूरत होगी ताकि सब्सिडी की राशि सीधे अकाउंट में ट्रांसफर की जा सके. अगर आवेदक किसी विशेष जाति से संबंधित है या दिव्यांग है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा.
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भविष्य की ओर बढ़ता कदम
ऑयल पाम की खेती और इसकी नर्सरी तैयार करना भविष्य के लिहाज से एक बेहतरीन निवेश है. सरकार की इस भारी-भरकम सब्सिडी के बाद किसानों के लिए नर्सरी का सेटअप तैयार करना काफी आसान हो जाएगा. यह कदम न केवल गुजरात के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि भारत को खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के नेशनल मिशन में भी बड़ा योगदान देगा.
PM Kisan 22nd Installment: लाखों किसानों के खाते में नहीं आए 2000 रुपये! जानें क्यों रुका पैसा?
PM Kisan 22nd Installment: देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 22वीं किस्त जारी कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मार्च को गुवाहाटी से सिंगल क्लिक के माध्यम से देश के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में यह राशि ट्रांसफर की. इस बार करीब 9 करोड़ 32 लाख किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये भेजे गए हैं. हालांकि, कई किसान ऐसे भी हैं जिनके बैंक खाते में अभी तक 2000 रुपये की किस्त नहीं पहुंची है. ऐसे में किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने इसकी वजह भी बताई है और समस्या के समाधान का तरीका भी बताया है.
क्या है पीएम किसान सम्मान निधि योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी. इस योजना का उद्देश्य देश के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देना है ताकि वे खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकें.
इस योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह राशि 2000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस बार 22वीं किस्त के तहत 9.32 करोड़ किसानों को लाभ मिला है, जिनमें 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान भी शामिल हैं. योजना की शुरुआत से अब तक किसानों के खातों में रुपये4.27 लाख करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है.
क्यों नहीं आया कई किसानों के खाते में पैसा
सरकार के अनुसार कुछ तकनीकी या दस्तावेजी कारणों की वजह से कई किसानों की किस्त रुक सकती है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ा कारण ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा नहीं होना हो सकता है. इसके अलावा बैंक खाते की जानकारी में गड़बड़ी, आधार कार्ड का बैंक खाते से लिंक न होना या पात्रता की शर्तें पूरी न होना भी किस्त रुकने का कारण बन सकता है. कुछ मामलों में किसानों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए अपने क्षेत्र के कृषि कार्यालय में जाकर दस्तावेज सत्यापन भी कराना पड़ सकता है.
घर बैठे ऐसे चेक करें अपना स्टेटस
अगर आपके खाते में अभी तक 22वीं किस्त के रुपये2000 नहीं आए हैं तो आप आसानी से घर बैठे इसका स्टेटस चेक कर सकते हैं. इसके लिए किसानों को सबसे पहले पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. वहां “Know Your Status” विकल्प पर क्लिक करें. इसके बाद अपना आधार नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करें. ओटीपी के जरिए लॉगिन करने के बाद आपको तुरंत पता चल जाएगा कि आपकी किस्त जारी हुई है या किसी वजह से रोक दी गई है.
समस्या होने पर यहां करें संपर्क
अगर आप पात्र किसान हैं और फिर भी आपके खाते में पैसा नहीं पहुंचा है तो सरकार ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं. किसान इन नंबरों पर संपर्क करके अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं.
पीएम किसान योजना के हेल्पलाइन नंबर हैं:
155261
011-24300606
इन नंबरों पर किसान सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक कॉल कर सकते हैं. यहां से उन्हें योजना से जुड़ी सभी जानकारी और समाधान मिल सकता है. कुल मिलाकर, अगर आपके खाते में पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त अभी तक नहीं आई है तो घबराने की जरूरत नहीं है. कई बार छोटी तकनीकी गड़बड़ी या दस्तावेज की कमी के कारण भुगतान रुक जाता है. ऐसे में तुरंत स्टेटस चेक करें और जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें.
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