ट्रंप अमेरिकी संस्थानों में भरोसा कमजोर कर रहे हैं: न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर
वॉशिंगटन, 14 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के कदम अमेरिकी संस्थानों में लोगों के भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। उनका कहना है कि न्याय विभाग के राजनीतिकरण से देश की कानूनी व्यवस्था पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
पॉडकास्ट द फिफ्थ कॉलम में बातचीत के दौरान क्रिस्टी ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इससे अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी संस्थाओं को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा, “इस प्रशासन की सबसे विनाशकारी बात यह है कि उसने न्याय विभाग के साथ जो किया है। मुझे नहीं लगता कि इसके आसपास भी कोई दूसरी चीज है।”
दो बार न्यू जर्सी के गवर्नर रह चुके क्रिस्टी ने कहा कि अगर लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि अभियोजन राजनीतिक आधार पर हो रहे हैं, तो इससे कानून के शासन पर जनता का विश्वास गंभीर रूप से कमजोर हो सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर लोगों के मन में यह बैठ जाए कि किसी अभियोजक के फैसले तथ्यों के बजाय उसकी पार्टी से तय होते हैं, तो उस भरोसे को दोबारा कैसे बहाल किया जाएगा?”
क्रिस्टी के अनुसार न्याय विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने में काफी समय और राजनीतिक प्रयास लगेगा। उन्होंने कहा कि अगर इसे पूरी तरह सुधारना है तो कम से कम दो कार्यकाल लग सकते हैं।
पूर्व गवर्नर ने कहा कि मौजूदा माहौल का असर अदालतों में भी दिखाई देने लगा है, जहां जज अब सरकार के दावों को पहले की तरह सहज रूप से स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
क्रिस्टी ने रिपब्लिकन पार्टी की आंतरिक राजनीति की भी आलोचना करते हुए कहा कि कई नेता सार्वजनिक रूप से ट्रंप का समर्थन इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध का डर रहता है।
उन्होंने कहा, “यह ट्रंप के बारे में कम और ट्रंप के डर के बारे में ज्यादा है। यह डर व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक है।”
क्रिस्टी के मुताबिक, कई रिपब्लिकन नेताओं को आशंका रहती है कि अगर वे ट्रंप का विरोध करेंगे तो वे उनके खिलाफ प्राइमरी चुनाव में किसी दूसरे उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं, जिससे उनका राजनीतिक करियर खतरे में पड़ सकता है।
हालांकि आलोचना के बावजूद क्रिस्टी ने कहा कि वह अभी रिपब्लिकन पार्टी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, भले ही पार्टी पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल गई हो।
उन्होंने कहा कि अब पार्टी में सिद्धांतों के बजाय ट्रंप के प्रति निष्ठा ही मुख्य आधार बनती जा रही है।
गौरतलब है कि क्रिस्टी 2016 में ट्रंप की राष्ट्रपति पद की ट्रांजिशन टीम के प्रमुख भी रहे थे, लेकिन बाद में वे ट्रंप के सबसे मुखर रिपब्लिकन आलोचकों में शामिल हो गए।
--आईएएनएस
डीएससी
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नर्सरी खोलने के लिए गुजरात सरकार देगी 40 लाख रुपये, किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए आई बंपर स्कीम
गुजरात सरकार ने राज्य के किसानों को उद्यमी बनाने और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक बड़ी योजना पेश की है. 'नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम' योजना के तहत अब किसान अपनी नर्सरी खोलकर लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं. इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशों से होने वाले खाद्य तेल के आयात को कम करना और घरेलू स्तर पर ऑयल पाम के उत्पादन को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि इससे न केवल किसानों की इनकम बढ़ेगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी.
40 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसके तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता है. सरकार ऑयल पाम नर्सरी स्थापित करने के लिए प्रति नर्सरी 40,00,000 रुपये (चालीस लाख रुपये) की सब्सिडी दे रही है. इस योजना के जरिए 10 हेक्टेयर की क्षमता वाली नर्सरी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें बड़ी मात्रा में पौधे तैयार किए जा सकेंगे. यह राशि उन किसानों के लिए एक बड़ा सहारा है जो खेती के साथ-साथ नर्सरी के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं और अपनी उत्पादन कैपेसिटी को बढ़ाना चाहते हैं.
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ बुनियादी योग्यताएं तय की गई हैं. आवेदन करने वाला व्यक्ति अनिवार्य रूप से एक किसान होना चाहिए और वह गुजरात राज्य का मूल निवासी होना चाहिए. यह स्कीम खास तौर पर उन प्रगतिशील किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो खेती में नई तकनीक और नए उत्पादों को अपनाने के लिए तैयार हैं. सरकार चाहती है कि किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें, बल्कि वे नर्सरी जैसे मुनाफे वाले काम से भी जुड़ें.
आवेदन की पूरी प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाया गया है. इच्छुक किसानों को गुजरात सरकार के 'आई-खेड़ूत पोर्टल' (I-Khedut Portal) पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा. पोर्टल पर जाकर 'बेनिफिशियरी रजिस्ट्रेशन' के विकल्प को चुनना होगा और अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे जिला, तालुका, गांव और बैंक अकाउंट नंबर दर्ज करना होगा. मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के जरिए अकाउंट वेरीफाई होने के बाद किसान 'एग्रीकल्चरल स्कीम्स' सेक्शन में जाकर इस नर्सरी योजना के लिए आवेदन फॉर्म भर सकते हैं. फॉर्म भरने के बाद उसकी पुष्टि करना और प्रिंटआउट लेना जरूरी है.
जरूरी दस्तावेजों की जानकारी
ऑनलाइन आवेदन करते वक्त किसानों के पास कुछ जरूरी कागजात होने चाहिए. इनमें पहचान के लिए आधार कार्ड और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड जैसे 7-12 और 8-ए की कॉपी अनिवार्य है. इसके अलावा, बैंक पासबुक या कैंसिल्ड चेक की जरूरत होगी ताकि सब्सिडी की राशि सीधे अकाउंट में ट्रांसफर की जा सके. अगर आवेदक किसी विशेष जाति से संबंधित है या दिव्यांग है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा.
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भविष्य की ओर बढ़ता कदम
ऑयल पाम की खेती और इसकी नर्सरी तैयार करना भविष्य के लिहाज से एक बेहतरीन निवेश है. सरकार की इस भारी-भरकम सब्सिडी के बाद किसानों के लिए नर्सरी का सेटअप तैयार करना काफी आसान हो जाएगा. यह कदम न केवल गुजरात के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि भारत को खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के नेशनल मिशन में भी बड़ा योगदान देगा.
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