ईद से पहले पाकिस्तान में तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, लाखों लोगों के लिए बढ़ी परेशानी
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर दुनिया के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी रमजान के दौरान और भी ज्यादा परेशानी वाली हो गई है। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आम जनता महंगाई की मार झेल रही है। इस बीच रमजान के महीने में घरों का बजट पहले से ही दबाव में है और जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ रहा है।
डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्यूल की कीमतों में 55 रुपए प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी का असर पूरे देश में पड़ रहा है। इसकी वजह से परिवहन का खर्च बढ़ रहा है, खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं और रमजान के महीने में घरों पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है।
वहीं, कीमत बढ़ोतरी के समय ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। पारंपरिक रूप से रमजान वह समय होता है जब सरकारों से जरूरी चीजों के लिए टारगेटेड सपोर्ट के जरिए राहत देने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, वर्तमान हालात की तस्वीर इससे उलटी है। कीमतों में बढ़ोतरी का असर लाखों दिहाड़ी मजदूरों और गिग वर्कर्स पर खास तौर पर गंभीर है, जिनकी आय कम और अनिश्चित है।
पाकिस्तान की इम्पोर्टेड फ्यूल पर भारी निर्भरता घरेलू कीमतों को अंतरराष्ट्रीय झटकों के लिए बहुत कमजोर बनाती है। रिपोर्ट में कहा गया है, फ्यूल की कीमतें कभी भी कोई अलग आर्थिक घटना नहीं होती हैं। पाकिस्तान जैसी इम्पोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्था में, वे एक मजबूत ट्रांसमिशन चैनल के तौर पर काम करती हैं, जिसके जरिए कॉस्ट का दबाव लगभग हर सेक्टर में फैल जाता है।
घोषणा के कुछ ही घंटों में शहरों में ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ना शुरू हो गया है। लाखों लोग जो काम पर आने-जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या मोटरसाइकिल पर निर्भर हैं, उनके लिए इसका मतलब है रोजाना के खर्चों में बढ़ोतरी, जिसे टाला नहीं जा सकता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईद के लिए आम परिवार खरीदारी की योजना बनाते हैं। मौजूदा हालात में पाकिस्तान में घरों को खर्च का झटका लग रहा है, जिससे खरीदने की ताकत तेजी से कम हो रही है।
पेशावर में, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने चीजों की कीमतों और एक शहर से दूसरे शहर आने-जाने के खर्च को बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोलियम डीलरों ने फ्यूल की बिक्री में काफी गिरावट की रिपोर्ट दी है।
इस बीच, कराची में, पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी ने यात्रा के कई तरीकों में ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ा दिया है। इससे पहले से ही दबाव में चल रहे घरेलू बजट पर और दबाव पड़ रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इसका असर स्थानीय बाजार में पहले से ही दिख रहा है, जहां व्यापारियों का कहना है कि फ्यूल में कोई भी बढ़ोतरी होने के कुछ ही घंटों में कीमतें बदल जाती हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-लिथुआनिया विदेश कार्यालय परामर्श के 10वें राउंड की बैठक में शामिल हुए सिबी जॉर्ज
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। भारत-लिथुआनिया विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) का 10वां राउंड 13 मार्च को विलनियस में हुआ। एफओसी में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मामलों के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने किया। वहीं, लिथुआनिया का नेतृत्व देश के विदेश मामलों के उपमंत्री विडमांतास वर्बिकास ने किया।
दोनों पक्षों ने राजनीति, व्यापार और आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच कनेक्शन सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की। व्यापार और निवेश और लेजर सहित उच्च-तकनीक जैसे क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने भारत-ईयू संबंध पर भी चर्चा की और आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
इस दौरे के दौरान, सेक्रेटरी सिबी जॉर्ज ने लिथुआनिया के विदेश मंत्री, केस्टुटिस बुड्रिस से भी मुलाकात की। उन्होंने लिथुआनिया के विदेश मंत्रालय के राजनीतिक डायरेक्टर (विदेश सचिव) लाइमोनास तलत-केल्प्सा, लिथुआनिया के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के मुख्य सलाहकार केस्टुटिस कुड्जमानस, क्लेपेडा पोर्ट के सीईओ अल्गिस लताकस और सेंटर फॉर जियोपॉलिटिकल एंड सिक्योरिटी स्टडीज (जीएसएससी) के सीईओ लिनास कोजाला से भी बातचीत की।
सचिव ने लिथुआनिया में प्रवासी भारतीयों से भी बातचीत की और उनसे विकसित भारत 2047 की दिशा में अमृत काल यात्रा में योगदान जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने दूतावास के नए परिसर में आयुष सूचना प्रकोष्ठ और एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) लाउंज का उद्घाटन किया। इस दौरान यह तय हुआ कि एफओसी का अगला राउंड नई दिल्ली में आपसी सहमति से तय तारीखों पर होगा।
भारत और लिथुआनिया के बीच 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए, जो आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित हैं। भारत ने 1991 में सोवियत संघ से लिथुआनिया की स्वतंत्रता को मान्यता दी थी। भारत का पोलैंड स्थित दूतावास लिथुआनिया से संबंधित कार्य देखता है, जबकि लिथुआनिया का दूतावास नई दिल्ली में स्थित है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रहा।
भारत और लिथुआनिया के बीच संस्कृत को लेकर भाषाई समानता देखने को मिलती है। इसके अलावा भारत से लिथुआनिया को तैयार दवाएं और जैविक उत्पाद, परमाणु बॉयलर, रिएक्टर, मशीनरी और विद्युत उपकरण, मछली और अन्य जलीय भोजन, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, ऑटोमोबाइल टायर और ट्यूब, प्लास्टिक की वस्तुएं, कपड़े और तंबाकू निर्यात होते हैं।
वहीं, लिथुआनिया से भारत में मशीनरी और यांत्रिक उपकरण, लोहा और इस्पात, रासायनिक उत्पाद और रबर से बनी वस्तुएं, लकड़ी और लकड़ी से बने उत्पाद, ऑप्टिकल और मापने के उपकरण और खाद्य पदार्थ आयात किए जाते हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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