Video: अजब किसान का गजब आइडिया! मेढ़ पर पालक बीच में भिंडी, 25 दिन में पूरी लागत वसूल
Success Story: छपरा जिले के गरखा प्रखंड अंतर्गत अडूपुर गांव के किसान सुरेंद्र सिंह आज क्षेत्र के किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं. सुरेंद्र सिंह ने पारंपरिक खेती को आधुनिक मल्टी-क्रॉपिंग तकनीक से बदलकर अपने खेतों को प्रतिदिन कमाई देने वाला जरिया बना दिया है. वह एक ही खेत में एक साथ कई फसलें उगाकर लागत को शून्य और मुनाफे को कई गुना बढ़ा रहे हैं. सुरेंद्र सिंह ने फिलहाल 12 बीघे में सब्जियों की खेती की है. उन्होंने भिंडी के साथ मेढ़ों पर पालक की बुवाई की. पालक महज 20-25 दिनों में तैयार होकर बिक जाता है. जिससे पूरी खेती की लागत वसूल हो जाती है. इसके बाद भिंडी की फसल शुरू होती है. जो अगले 3-4 महीनों तक शुद्ध मुनाफा देती है. कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के मेल से उन्होंने अमरूद और नींबू की बागवानी को भी कमाई का जरिया बनाया है. आज वह अन्य किसानों को भी इस 'एटीएम मॉडल' की निशुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं.
रागी के आटे से बनता है खास गुलगुला, तीखी सब्जी और चटनी के साथ मिलता है अनोखा स्वाद
झारखंड के गुमला जिले में आज भी एक पारंपरिक पकवान ऐसा है, जिसके आगे फास्ट फूड का स्वाद फीका पड़ जाता है. यहां का मशहूर मडुवा (रागी) का गुलगुला. यह खास पकवान मडुवा यानी रागी के आटे से बनाया जाता है. इसमें गुड़ और सौंफ मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. इसे घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है. इसके लिए मडुवा के आटे में हल्का गर्म पानी, गुड़ और सौंफ डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद इसका घोल तैयार कर रिफाइंड तेल में तल लिया जाता है. तैयार होने के बाद इसे गरमागरम परोसा जाता है. खास बात यह है कि इस गुलगुले को तीखी आलू-टमाटर की सब्जी और धनिया की चटनी के साथ परोसा जाता है.
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