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सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द, सरकार ने NSA की धाराएं हटाईं

केंद्र सरकार ने लद्दाख में जारी गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है.

 

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क्या होती है NMMS परीक्षा? जो स्कूली छात्रों को देती है 48 हजार तक की Scholarship

National Means‑cum‑Merit Scholarship Scheme: बिहार में हाल ही में बुधवार 11 मार्च को राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा संपन्न हुई है. शिक्षा विभाग के अनुसार, इस साल 85 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल हुए. ये एग्जाम आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में होनहार छात्रों के लिए आयोजित किया गया था. इस परीक्षा के जरिए हजारों छात्र सरकारी छात्रवृत्ति पाने की उम्मीद रखते हैं.  यह परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं.

क्या है परीक्षा का उद्देश्य

इस परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की मानसिक क्षमता और शैक्षणिक ज्ञान दोनों का मूल्यांकन करना है. ये एग्जाम दो पाली में आयोजित किया जाता है. इसमें सबसे पहले मानसिक योग्यता परीक्षा होती है, जिसमें एनालॉजी, संख्या पहचान, पैटर्न पहचान और रीजनिंग से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं. दूसरी शैक्षिक योग्यता का एग्जाम होता है, जिसमें छात्रों के विषय ज्ञान को परखा जाता है. इसमें मुख्य रूप से गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से सवाल पूछे जाते हैं. 

क्या है NMMS योजना?

National Means‑cum‑Merit Scholarship Scheme भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है. कई बार गरीब परिवारों के बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए यह छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई है. इस योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को मिलता है जिनके माता-पिता की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय 1.5 लाख रुपये से कम होती है.

यह भी पढ़ें: बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला, SC-ST छात्रों की छात्रवृत्ति दोगुनी; 27 लाख बच्चों को सीधा फायदा

छात्रों को कितना मिलता है लाभ?

इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को हर साल 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है. यानी छात्रों को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता मिलती है.  यह छात्रवृत्ति कक्षा 9 से कक्षा 12 तक यानी कुल चार वर्षों के लिए दी जाती है. इस तरह एक छात्र को अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के लिए कुल 48,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलती है. सरकार यह राशि सीधे छात्रों के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है.

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क्या कहते हैं शिक्षा विशेषज्ञ

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NMMS जैसी योजनाएं गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. इससे उन्हें पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा मिलती है और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका मिलता है. सरकार का भी यही लक्ष्य है कि पैसों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके और हर प्रतिभाशाली छात्र को आगे बढ़ने का अवसर मिले.

श्रमिकों के बच्चों को अब मिलेगी डबल स्कॉलरशिप

इधर, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अब श्रम कल्याण योजना के तहत छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थी, सरकारी की मेरिट आधारित स्कॉलरशिप्स का फायदा भी उठा पाएंगे. इस बदलाव से उन होनहार छात्रों को लाभ मिलेगा, जो अपनी मेहनत से अच्छी रैंक हासिल करते हैं लेकिन नियमों की वजह से दूसरी छात्रवृत्ति नहीं ले पाते हैं.

ये है नया बदलाव

पीटीआई भाषा के अनुसार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसके अनुसार श्रम कल्याण छात्रवृत्ति लेने वाले छात्र केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी मेरिट आधारित योजना के लिए भी पात्र होंगे. पहले ये पाबंदी थी कि अगर कोई छात्र श्रम मंत्रालय से आर्थिक सहायता ले रहा है तो वह किसी दूसरी सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले पाएगा. इस बदलाव के बाद छात्र अपनी जरूरत और अपनी काबिलियत के आधार पर सहायता प्राप्त कर पाएंगे.

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  Sports

Suryakumar Yadav: '5 साल पहले एक सपना सच हुआ...' सूर्यकुमार यादव ने टी20 विश्व कप बाद किसे शुक्रिया अदा किया

Suryakumar Yadav: भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने पांच साल पूरे कर लिए। इस खास मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश शेयर किया और कहा कि भारत की जर्सी पहनना एक ऐसा एहसास है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।

सूर्यकुमार ने अपने क्रिकेट सफर का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, '5 साल पहले एक सपना सच हुआ था। भारत की जर्सी पहनना आज भी ऐसा एहसास है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयान नहीं कर सकता। उम्मीद है टीम इंडिया के लिए ऐसे ही कई और यादगार पल बनाने का मौका मिलता रहेगा।'

सूर्यकुमार यादव ने 14 मार्च 2021 को इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था। उस समय उनकी उम्र 30 साल 181 दिन थी। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अहमदाबाद में खेले गए टी20 मैच से डेब्यू किया था। दिलचस्प बात यह है कि यही अहमदाबाद का मैदान बाद में उनके लिए और भी खास बन गया, जब उन्होंने इसी मैदान पर भारत को टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम की कप्तानी की।

भारत इस जीत के साथ टी20 वर्ल्ड कप का तीसरा खिताब जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी। साथ ही टीम इंडिया ने अपना खिताब भी बचाया और घरेलू मैदान पर भी ट्रॉफी उठाई।

डेब्यू मैच में सूर्यकुमार को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था। लेकिन उसी सीरीज के चौथे टी20 मैच में जब वे बल्लेबाजी के लिए उतरे तो पहली ही गेंद पर इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर को छक्का जड़ दिया। यह शॉट उनके आत्मविश्वास और अंदाज की झलक थी।

इसके बाद उनका सफर लगातार ऊपर ही गया। पिछले पांच सालों में सूर्यकुमार यादव ने 113 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 3272 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 4 शतक और 25 अर्धशतक निकले हैं। वह भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। उनसे आगे केवल रोहित शर्मा (4231 रन) और विराट कोहली (4188 रन) हैं।

टी20 के बाद उन्होंने वनडे और टेस्ट क्रिकेट में भी कदम रखा। सूर्यकुमार ने 18 जुलाई 2021 को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था। वहीं 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया। इसके साथ ही वे 30 साल की उम्र के बाद तीनों फॉर्मेट में डेब्यू करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।

उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 2022 में आईसीसी ने मेंस टी20 इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना था। यह अवॉर्ड उन्हें इंटरनेशनल डेब्यू के सिर्फ एक साल बाद मिला था।

हाल ही में खत्म हुए टी20 विश्व कप 2026 में भी सूर्यकुमार यादव का योगदान अहम रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में 242 रन बनाए। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनका एक शानदार कैच मैच का टर्निंग पॉइंट बना। बाउंड्री लाइन पर उन्होंने डेविड मिलर का कैच लपककर भारत की जीत लगभग पक्की कर दी थी।

बाद में उन्हें भारतीय टी20 टीम की कप्तानी भी सौंपी गई, जबकि इससे पहले उन्होंने किसी बड़ी फ्रेंचाइजी टीम की कप्तानी नहीं की थी। इसके बावजूद बतौर कप्तान उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। सूर्यकुमार ने अब तक भारत की 52 टी20 मैचों में कप्तानी की है, जिसमें टीम ने 42 मैच जीते और सिर्फ 8 हारे। दो मैचों का नतीजा नहीं निकला। इस तरह उनका जीत प्रतिशत 80.76 का है, जो उनके सफल नेतृत्व की कहानी बताता है।

पांच साल पहले शुरू हुआ यह सफर अब भारतीय क्रिकेट की एक बड़ी कहानी बन चुका है और फिलहाल ऐसा लग रहा है कि सूर्यकुमार यादव के बल्ले से अभी कई और यादगार पल बाकी हैं।

Sat, 14 Mar 2026 13:44:27 +0530

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