क्या होती है NMMS परीक्षा? जो स्कूली छात्रों को देती है 48 हजार तक की Scholarship
National Means‑cum‑Merit Scholarship Scheme: बिहार में हाल ही में बुधवार 11 मार्च को राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा संपन्न हुई है. शिक्षा विभाग के अनुसार, इस साल 85 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल हुए. ये एग्जाम आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में होनहार छात्रों के लिए आयोजित किया गया था. इस परीक्षा के जरिए हजारों छात्र सरकारी छात्रवृत्ति पाने की उम्मीद रखते हैं. यह परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं.
क्या है परीक्षा का उद्देश्य
इस परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की मानसिक क्षमता और शैक्षणिक ज्ञान दोनों का मूल्यांकन करना है. ये एग्जाम दो पाली में आयोजित किया जाता है. इसमें सबसे पहले मानसिक योग्यता परीक्षा होती है, जिसमें एनालॉजी, संख्या पहचान, पैटर्न पहचान और रीजनिंग से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं. दूसरी शैक्षिक योग्यता का एग्जाम होता है, जिसमें छात्रों के विषय ज्ञान को परखा जाता है. इसमें मुख्य रूप से गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से सवाल पूछे जाते हैं.
क्या है NMMS योजना?
National Means‑cum‑Merit Scholarship Scheme भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है. कई बार गरीब परिवारों के बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए यह छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई है. इस योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को मिलता है जिनके माता-पिता की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय 1.5 लाख रुपये से कम होती है.
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छात्रों को कितना मिलता है लाभ?
इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को हर साल 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है. यानी छात्रों को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता मिलती है. यह छात्रवृत्ति कक्षा 9 से कक्षा 12 तक यानी कुल चार वर्षों के लिए दी जाती है. इस तरह एक छात्र को अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के लिए कुल 48,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलती है. सरकार यह राशि सीधे छात्रों के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है.
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क्या कहते हैं शिक्षा विशेषज्ञ
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NMMS जैसी योजनाएं गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. इससे उन्हें पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा मिलती है और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका मिलता है. सरकार का भी यही लक्ष्य है कि पैसों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके और हर प्रतिभाशाली छात्र को आगे बढ़ने का अवसर मिले.
श्रमिकों के बच्चों को अब मिलेगी डबल स्कॉलरशिप
इधर, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अब श्रम कल्याण योजना के तहत छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थी, सरकारी की मेरिट आधारित स्कॉलरशिप्स का फायदा भी उठा पाएंगे. इस बदलाव से उन होनहार छात्रों को लाभ मिलेगा, जो अपनी मेहनत से अच्छी रैंक हासिल करते हैं लेकिन नियमों की वजह से दूसरी छात्रवृत्ति नहीं ले पाते हैं.
ये है नया बदलाव
पीटीआई भाषा के अनुसार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसके अनुसार श्रम कल्याण छात्रवृत्ति लेने वाले छात्र केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी मेरिट आधारित योजना के लिए भी पात्र होंगे. पहले ये पाबंदी थी कि अगर कोई छात्र श्रम मंत्रालय से आर्थिक सहायता ले रहा है तो वह किसी दूसरी सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले पाएगा. इस बदलाव के बाद छात्र अपनी जरूरत और अपनी काबिलियत के आधार पर सहायता प्राप्त कर पाएंगे.
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