नेपाल में खसरे का प्रकोप बढ़ा, टीकाकरण की अपील
काठमांडू, 14 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल के बागलुंग जिले में खसरे का प्रकोप बढ़ा है। कई बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह प्रकोप जनवरी में मलंगावा नगर पालिका, सरलाही जिले से शुरू हुआ था और करीब 10 दिन पहले धोरपाटन नगर पालिका तक पहुंच गया था। अब यह संक्रमण पड़ोसी ग्रामीण पालिकाओं निशिखोला और बडीगढ़ में भी फैल चुका है। स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी है।
द काठमांडू पोस्ट ने स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से बताया कि गुरुवार तक धोरपाटन से 83 लोग—ज्यादातर 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे—संक्रमित पाए गए हैं और इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
परिवार कल्याण प्रभाग के टीकाकरण अनुभाग के प्रमुख डॉ. अभियान गौतम ने बताया कि अब यह बीमारी निसिखोला और बडिगाड ग्रामीण पालिकाओं तक फैल चुकी है। उन्होंने कहा कि तेज बुखार से पीड़ित कई संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ में खसरे की जटिलता के रूप में निमोनिया भी विकसित हो गया है।
उन्होंने बताया कि गंभीर हालत में एक बच्चे को गंडकी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
धोरपाटन में तैनात स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बीमारी नगर पालिका के वार्ड 7, 8 और 9 में तेजी से फैली है। धोरपाटन नगर पालिका में कार्यरत जनस्वास्थ्य अधिकारी भूमिश्वर शर्मा ने बताया कि तेज बुखार और अन्य जटिलताओं से पीड़ित 11 बच्चों को बुरतीबांग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि छह अन्य बच्चों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है।
खसरा एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति की नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैलती है। यह बीमारी बिना टीकाकरण वाले लोगों के लिए जानलेवा भी हो सकती है। खसरे से बचाव के लिए दो खुराक वाला टीका लगाया जाता है, जो बच्चों को 9 महीने और 15 महीने की उम्र में दिया जाता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि निसिखोला में पिछले दो महीनों में यह चौथा प्रकोप है, जिससे स्पष्ट होता है कि वायरस का प्रसार अभी नियंत्रित नहीं हो पाया है। नौ महीने से कम उम्र के शिशु भी संक्रमित पाए गए हैं, जबकि अधिकांश संक्रमित बच्चों की टीकाकरण स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले एक दशक में टीकाकरण में आई कमी भी इस तेजी से फैलते संक्रमण की बड़ी वजह हो सकती है।
इसी बीच सरकार ने शुक्रवार से धोरपाटन नगर पालिका में टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत 10 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 7,000 बच्चों को टीका लगाने की योजना है। साथ ही निसिखोला और बडिगाड में भी टीकाकरण अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार ने आपातकालीन वैक्सीन आपूर्ति के लिए खसरा और रूबेला पार्टनरशिप से भी अनुरोध किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम टीकाकरण कवरेज, जागरूकता की कमी, प्रवासी आबादी और सरकारी तंत्र की ढिलाई के कारण देश में समय-समय पर खसरे के प्रकोप सामने आते रहते हैं।
नेपाल ने 2026 तक खसरे को खत्म करने का लक्ष्य रखा था, क्योंकि जून 2023 के बाद कोई बड़ा प्रकोप दर्ज नहीं हुआ था। हालांकि बागलुंग और सरलाही में हालिया संक्रमण ने इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश की प्रगति पर नकारात्मक असर डाला है।
डॉक्टरों के अनुसार खसरे के शुरुआती लक्षण संक्रमण के 10-12 दिन बाद दिखाई देते हैं, जिनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखों का लाल होना और खांसी शामिल हैं। यह बीमारी छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है।
--आईएएनएस
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साउथ कोरिया के सिंगर ने गाया 'शिव तांडव स्तोत्र', सोशल मीडिया पर वीडियो देख चौंके लोग
South Korean Singer Sings Shiva Tandav Stotram: संगीत को अक्सर एक ऐसी भाषा कहा जाता है जिसकी कोई सीमाएं नहीं होतीं. अलग-अलग संस्कृतियों और देशों के कलाकार जब एक मंच पर मिलते हैं, तो कई बार ऐसे अमेजिंग प्रयोग देखने को मिलते हैं जो दुनिया भर के लोगों को जोड़ देते हैं. इसी बीच हाल ही में एक ऐसा ही अनोखा संगम देखने को मिला है, जब साउथ कोरिया के मशहूर रैपर Park Min‑jun उर्फ आुरा (Aura) ने भारत के शक्तिशाली आध्यात्मिक मंत्र शिव तांडव पर अपनी दमदार परफॉर्मेंस दी. इस परफॉर्मेंस ने न केवल उनके फैंस को हैरान कर दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया. लोग इस अनोखे म्यूजिक फ्यूजन की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
‘शिव तांडव स्तोत्रम’ पर रैप का अनोखा संगम
आुरा की इस परफॉर्मेंस की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने ‘शिव तांडव स्तोत्रम’ की पारंपरिक लय और ऊर्जा को बरकरार रखते हुए उसमें अपने हिप-हॉप रैप का शानदार मेल किया. जहां एक ओर भगवान शिव की स्तुति में गाए जाने वाले संस्कृत श्लोक गूंज रहे थे, वहीं दूसरी ओर आुरा की तेज रफ्तार रैपिंग और के-हिप-हॉप बीट्स इस प्रेजेंटेशन में आधुनिकता का रंग भर रही थीं.
भारतीय आध्यात्मिक संगीत और के-पॉप संस्कृति का यह अनोखा ‘क्रॉसओवर’ लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे संस्कृति और संगीत का खूबसूरत संगम बताया है. कई लोग इस बात से भी प्रभावित हुए कि एक विदेशी कलाकार ने भारतीय संस्कृति और भक्ति संगीत को इतनी श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया.
इंस्टाग्राम पर शेयर किया भावुक संदेश
इस परफॉर्मेंस का वीडियो आुरा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा किया. वीडियो के साथ उन्होंने एक भावुक मैसेज लिखा, जिसमें उन्होंने भारत के प्रति अपना प्यार और आभार व्यक्त किया. उन्होंने लिखा, “मुझे आज भी याद है जब मैं पहली बार दिल्ली आया था, तब मुझे कैसा महसूस हुआ था. उसके बाद मैंने मुंबई और भारत के कई अन्य स्थानों की यात्रा की, जहां मुझे कई नए अनुभव मिले और लोगों से बहुत सारा प्यार मिला. मैं इन सभी चीजों के लिए ईश्वर का आभारी हूं और अभी भी बहुत कुछ सीखना चाहता हूं.” आुरा ने आगे लिखा कि यह गीत उन सभी लोगों को समर्पित है जो उनकी इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं. उनके मुताबिक यह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक प्रार्थना है और उन्हें उम्मीद है कि यह हर किसी के दिल तक पहुंचेगी.
भारत से खास जुड़ाव
आुरा का भारत से जुड़ाव पहले भी कई बार देखने को मिला है. वो अक्सर भारतीय संस्कृति, संगीत और फैंस के प्रति अपना प्यार जाहिर करते रहते हैं. यही वजह है कि भारत में भी उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है.
कौन हैं पार्क मिन-जून उर्फ आुरा?
साउथ कोरिया के मशहूर रैपर और सिंगर Park Min‑jun, जिन्हें उनके स्टेज नेम आुरा (Aura) के नाम से जाना जाता है, पिछले लगभग 13 वर्षों से म्यूजिक इंडस्ट्री में एक्टिव हैं. उन्होंने अपने करियर में कई हिट गाने दिए हैं और के-पॉप तथा के-हिप-हॉप की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. भारतीय दर्शक उन्हें खास तौर पर तब से ज्यादा पहचानने लगे जब वे रियलिटी शो बिग बॉस 17 में नजर आए थे. इसके अलावा वो भारत के एक डांसिंग रियलिटी शो में भी हिस्सा ले चुके हैं, जहां उनके अंदाज और व्यक्तित्व को दर्शकों ने खूब पसंद किया.
सोशल मीडिया पर मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया
‘शिव तांडव स्तोत्रम’ और के-हिप-हॉप के इस अनोखे फ्यूजन को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है. कई यूजर्स का कहना है कि यह प्रेजेंटेशन दिखाती है कि संगीत वास्तव में दुनिया को जोड़ने की ताकत रखता है. आुरा की इस कोशिश को भारत और विदेश दोनों जगह सराहा जा रहा है. कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और वैश्विक संगीत के बीच एक खूबसूरत पुल बताया है.
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