आपका पैसा- जरूरत पर लें इमरजेंसी लोन:जानें कहां और कैसे करें अप्लाई, लोन लेने की पूरी प्रोसेस, फ्रॉड लोन एप्स से बचाव के टिप्स
वो कहावत है न कि ‘मुसीबत किसी भी वक्त आ सकती है।’ कोई मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, अचानक घर की मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है, शादी के खर्चे हो सकते हैं या कुछ भी और जरूरत पड़ सकती है। जब अचानक कोई बड़ा खर्च आ पड़े तो क्या करें? ऐसी स्थिति में काम आता है इमरजेंसी लोन। ऐसे वक्त में बैंक या NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) से लोन लेना ही प्रैक्टिकल विकल्प है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती जरूरत के समय पैसा मिलना है। अक्सर डॉक्यूमेंट्स पूरे न हों या प्रक्रिया की जानकारी न हो तो लोन रिजेक्ट हो सकता है या इसमें बहुत देरी हो सकती है। इसलिए आज हम 'आपका पैसा' कॉलम में इमरजेंसी लोन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- इमरजेंसी लोन क्या है और यह सामान्य लोन से कैसे अलग है? जवाब- ये एक 'अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन' है, जिसे विशेष रूप से इमरजेंसी के लिए डिजाइन किया गया है। सामान्य होम लोन या कार लोन में लंबे कागजी काम और संपत्ति के मूल्यांकन की जरूरत होती है, जिसमें हफ्तों लग सकते हैं। इसके विपरीत इमरजेंसी लोन पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया है। आजकल फिनटेक कंपनियां और बैंक 'प्री-अप्रूव्ड' लोन का विकल्प देते हैं। इनके पास पहले से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री होती है, जिससे आवेदन के 5 से 15 मिनट के भीतर पैसा बैंक खाते में पहुंच जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको कोई गारंटी देने या कुछ भी गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती है। सवाल- इमरजेंसी लोन मिलने में कितना समय लग सकता है? जवाब- यह कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे लेंडर (उधार देने वाला बैंक या वित्तीय संस्था) कौन है, लोन किस प्रकार का है और उस लेंडर की डिस्बर्सल (अकाउंट में लोन अमाउंट क्रेडिट होने की प्रोसेस) प्रक्रिया कितनी तेज है। जल्दी लोन पाने के लिए पूरी प्रक्रिया ग्राफिक्स में देखिए- अगर आपके पास आधार से लिंक मोबाइल नंबर और पैन कार्ड है, तो ‘लोन वेरिफिकेशन’ में बहुत कम समय लगेगा। सवाल- इमरजेंसी लोन को कहां खर्च किया जा सकता है? जवाब- इसकी कोई 'एंड-यूज’' पाबंदी नहीं होती, यानी बैंक उधारकर्ता से यह नहीं पूछता कि वह पैसा कहां खर्च करेगा। हालांकि, इसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से केवल अनिवार्य स्थितियों में ही करना चाहिए। आमतौर पर इसका इस्तेमाल इन कामों के लिए होता है- सवाल- इमरजेंसी लोन कितने प्रकार के होते हैं? जवाब- इमरजेंसी के लिए कई तरह के लोन विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड कैश एडवांस, सैलरी एडवांस और डिजिटल इंस्टेंट लोन प्रमुख हैं। पर्सनल लोन- यह पॉपुलर और आसान तरीका है। इसमें ब्याज दर 10.50% से 24% तक हो सकती है। क्रेडिट कार्ड लोन- क्रेडिट कार्ड की लिमिट पर मिलने वाले लोन की प्रक्रिया तेज होती है, क्योंकि इसमें कोई नया डॉक्यूमेंट नहीं देना होता है। गोल्ड लोन- अगर आपका सिबिल स्कोर खराब है, तो घर में रखे सोने पर 30 मिनट में लोन मिल सकता है। सैलरी एडवांस लोन- कई कंपनियां और एप्स सैलरी के आधार पर छोटा लोन (शॉर्ट टर्म) देते हैं। डिजिटल इंस्टेंट लोन- मोबाइल एप में आधार-पैन से डिजिटल KYC होती है और मिनटों में अप्रूवल मिल जाता है। इसमें आमतौर पर 5,000 से 2 लाख रुपए तक का छोटा लोन मिल सकता है। सवाल- सही इमरजेंसी लोन का चुनाव कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है। डिटेल ग्राफिक्स में देखिए- सवाल- अगर CIBIL स्कोर कम है, क्या तब भी इमरजेंसी लोन मिल सकता है? जवाब- CIBIL स्कोर कम (600 से नीचे) होने पर बड़े बैंक लोन देने से कतराते हैं। ऐसे में 'पियर-टू-पियर' (P2P) लेंडिंग प्लेटफॉर्म या NBFC एप्स का रुख कर सकते हैं। ये केवल CIBIL स्कोर नहीं देखते, बल्कि उधारकर्ता के यूटिलिटी बिल भुगतान और बैंकिंग ट्रांजैक्शन के आधार पर लोन देते हैं। हालांकि, CIBIL स्कोर कम होने पर ब्याज दर थोड़ी ज्यादा चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा गोल्ड लोन एक बेहतरीन विकल्प है, जहां CIBIL स्कोर की अहमियत न के बराबर होती है। सवाल- लोन लेते समय 'प्रोसेसिंग फीस' और 'फोरक्लोजर चार्ज' पता करना क्यों जरूरी है? जवाब- आमतौर पर कर्ज लेते समय लोग सिर्फ ब्याज दर देखते हैं, लेकिन इमरजेंसी लोन में हिडेन चार्ज भी आपकी जेब ढीली कर सकते हैं। प्रोसेसिंग फीस आमतौर पर लोन राशि का 1-5% तक होती है, जो लोन डिस्बर्स (अकाउंट में रुपए ट्रांसफर होने की प्रक्रिया) होते समय ही काट ली जाती है। वहीं, 'फोरक्लोजर चार्ज' वह चार्ज है, जो बैंक तब वसूलते हैं, जब आप समय से पहले लोन बंद करना चाहते हैं। इमरजेंसी लोन लेते समय हमेशा ऐसे लेंडर चुनें, जिनकी प्रोसेसिंग फीस कम हो और जो 6 महीने बाद 'जीरो फोरक्लोजर' की सुविधा देते हों। इससे आप भविष्य में ब्याज का बोझ कम कर सकेंगे। सवाल- डिजिटल लोन एप्स से लोन लेते समय फ्रॉड से कैसे बचें? जवाब- प्ले स्टोर पर हजारों लोन एप्स मौजूद हैं, जिनमें से कई फ्रॉड और असुरक्षित हैं। सुरक्षा के लिए हमेशा इन बातों का ध्यान रखें- ……………… ये खबर भी पढ़िए आपका पैसा- क्या होम लोन का प्रीपेमेंट करना सही है: ब्याज के पैसे बचेंगे, लेकिन कैश क्रंच का डर भी, एक्सपर्ट से जानें फायदे-नुकसान हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका एक अपना घर हो। इस सपने को साकार करने के लिए ज्यादातर लोग ‘होम लोन’ लेते हैं और सालों तक EMI चुकाते रहते हैं। इस तरह लंबे समय में आप लिए गए कर्ज का तकरीबन चार गुना पैसा बैंक को देते हैं। आगे पढ़िए…
जरूरत की खबर- बीन्स खाने से लंबी होती उम्र:सॉल्यूबल फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम करे, हार्ट को रखे हेल्दी, जानें किसे नहीं खाना चाहिए
क्या आप बीन्स खाते हैं? खाते तो होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि बीन्स एक सुपरफूड है यानी हेल्दी मील का ‘रॉकस्टार।’ यह प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई जरूरी मिनरल्स का अच्छा सोर्स है। इसमें जिंक और आयरन भी भरपूर मात्रा में होता है। बीन्स गट हेल्थ को बेहतर बनाती है। शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद करती है। अमेरिकन सोसाइटी फॉर न्यूट्रिशन के समिट ‘न्यूट्रिशन 2025’ में पेश एक स्टडी में सामने आया कि रोज 1 कप बीन्स (काले बीन्स या छोले) खाने से कोलेस्ट्रॉल और इंफ्लेमेशन कम होता है, जो हार्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए फायदेमंद है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- बीन्स को लंबी उम्र का भोजन क्यों कहा जाता है? जवाब- ये पोषण से भरपूर, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का ऐसा सोर्स है, जो दुनिया के सभी पांच ‘ब्लू जोन’ (वो क्षेत्र जहां के लोगों की औसत उम्र 100 साल से ज्यादा होती है) की रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है। कई स्टडीज के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति रोज कम-से-कम आधा कप बीन्स खाता है, तो उसकी उम्र औसतन चार साल तक बढ़ सकती है। साल 2023 में ‘एडवांस इन न्यूट्रिशन’ जर्नल में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, रोज 50 ग्राम बीन्स खाने से समय से पहले मौत का जोखिम लगभग 6% तक कम हो जाता है। इसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा की एनालिसिस की गई है। सवाल- बीन्स कितनी तरह की होती हैं? जवाब- बीन्स कई तरह की होती हैं। इन्हें उनके इस्तेमाल और पकाने के तरीके के आधार पर समझा जा सकता है। सूखी बीन्स सबसे आम होती हैं। इन्हें खाने से पहले भिगोकर अच्छी तरह पकाना जरूरी होता है, ताकि ये नरम हो जाएं और पचने में आसान रहें। फ्रोजन बीन्स पहले से पकी हुई होती हैं, जिन्हें सिर्फ गैस या माइक्रोवेव में हल्का गरम करके खाया जा सकता है। दुनियाभर में इस्तेमाल की जाने वाली कुछ लोकप्रिय बीन्स को ग्राफिक में देखिए- सवाल- बीन्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या होती है? जवाब- बीन्स प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, आयरन, पोटेशियम और फोलेट का बेहतरीन सोर्स हैं। साथ ही इनमें सोडियम कम होता है और ये पूरी तरह कोलेस्ट्रॉल-फ्री होती हैं। हालांकि, बीन्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू उसके प्रकार के अनुसार थोड़ी बदल सकती है। 100 ग्राम पकी हुई बीन्स में औसतन इतने पोषक तत्व होते हैं। सवाल- बीन्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- बीन्स पोषण से भरपूर फूड है, जिसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा संतुलन होता है। इसलिए इसे सुपरफूड भी माना जाता है। ग्राफिक से इसके हेल्थ बेनिफिट्स समझते हैं- सवाल- बीन्स हार्ट को हेल्दी बनाए रखने में कैसे मददगार है? जवाब- इसमें सॉल्युबल फाइबर भरपूर होता है, जो शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाने में मदद करता है। इससे धमनियों में चर्बी (प्लाक) जमा होने का खतरा कम हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा घटता है। बीन्स में मैग्नीशियम, पोटैशियम और फोलेट जैसे जरूरी मिनरल्स भी होते हैं। ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक हैं और शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करते हैं। सवाल- क्या डायबिटिक लोग बीन्स खा सकते हैं? जवाब- हां, डायबिटिक लोग बीन्स खा सकते हैं और ये उनके लिए फायदेमंद भी होता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, डायबिटिक लोगों को अपने भोजन में सूखी बीन्स जैसे राजमा या पिंटो बीन्स शामिल करनी चाहिए। सवाल- गहरे रंग की बीन्स हल्के रंग की बीन्स की तुलना में ज्यादा फायदेमंद क्यों मानी जाती हैं? जवाब- इनमें एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा अधिक होती है। पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- रोज कितनी मात्रा में बीन्स खानी चाहिए? जवाब- 2020–2025 की अमेरिकन डाइटरी गाइडलाइंस के अनुसार, हफ्ते में 1 से 3 कप बीन्स, मटर और दालें खाना सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। इसे अगर रोज की मात्रा में समझें, तो यह करीब आधा कप (½ कप) बीन्स प्रतिदिन के बराबर होता है। सवाल- बीन्स किन्हें नहीं खानी चाहिए? जवाब- जिन लोगों को गैस, पेट फूलने या एसिडिटी की शिकायत रहती है, उन्हें बीन्स खाने से परेशानी हो सकती है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या कमजोर पाचन वाले लोगों में बीन्स से पेट दर्द, ऐंठन या दस्त की समस्या हो सकती है। जिन्हें किडनी स्टोन, खासकर यूरिक एसिड या ऑक्सलेट स्टोन की समस्या है, उन्हें भी बीन्स सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए। इसके अलावा, कच्ची या अधपकी बीन्स कभी नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इससे उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। सवाल- रोजमर्रा की डाइट में बीन्स को शामिल करने का सबसे आसान और उपयोगी तरीका क्या है? जवाब- पॉइंटर्स से समझते हैं- ………………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- काला लहसुन है सेहत का खजाना:ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट, पचने में आसान, जानें हेल्थ बेनिफिट्स, किन्हें नहीं खाना चाहिए लहसुन से तो आप परिचित ही होंगे। ये हमारी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा है। इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी किसी से छुपे नहीं हैं। लेकिन क्या आपने कभी ‘काले लहसुन’ के बारे में सुना है। यह नाम सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। पूरी खबर पढ़ें…
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