दिवाली और रविवार की छुट्टी के बावजूद खुलेगा शेयर बाजार, सिर्फ 70 मिनट होगी मुहूर्त ट्रेडिंग
दिवाली के अवसर पर आज भारतीय शेयर बाजार में पारंपरिक मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन किया जाएगा. ऐसे में रविवार को भी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर एक घंटे के एक विशेष सत्र में कारोबारी होगा. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक होगी. हालांकि 8 नवंबर नियमित रूप से साप्ताहिक अवकाश का दिन है, लेकिन दिवाली लक्ष्मी पूजन के अवसर पर विशेष ट्रेडिंग सत्र आयोजित करने की परंपरा को जारी रखा जाएगा.
बता दें कि शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग को बेहद शुभ माना जाता है. यह केवल एक विशेष कारोबारी सत्र नहीं, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी है. इसी कारण बड़ी संख्या में निवेशक इस दौरान सांकेतिक तौर पर शेयर खरीदते हैं और नए निवेश की शुरुआत करते हैं. मान्यता है कि लक्ष्मी पूजन के दिन किया गया निवेश आने वाले वर्ष में समृद्धि और शुभ फल प्रदान करता है. एक्सचेंजों द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, प्री-ओपनिंग सत्र दोपहर 2:05 बजे से 2:20 बजे तक चलेगा. ब्लॉक डील विंडो 1:50 बजे से 2:05 बजे तक खुली रहेगी. नियमित मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र 2:20 बजे से 3:30 बजे तक होगा. इसके बाद क्लोजिंग सेशन और पोस्ट-क्लोजिंग सेशन निर्धारित समयानुसार संचालित किए जाएंगे.
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बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मुहूर्त ट्रेडिंग का महत्व केवल धार्मिक और पारंपरिक नहीं है, बल्कि यह निवेशकों के मनोबल और बाजार की सकारात्मक भावना से भी जुड़ा हुआ है. कई दीर्घकालिक निवेशक इस दौरान अपने पोर्टफोलियो में नए शेयर जोड़ते हैं, जबकि कुछ निवेशक केवल शुभ शुरुआत के लिए सांकेतिक खरीदारी करते हैं. नवंबर 2026 में मुहूर्त ट्रेडिंग के अलावा शेयर बाजार कई अन्य अवसरों पर भी बंद रहेगा. दिवाली-बलिप्रतिपदा के अवसर पर 10 नवंबर को बाजार में अवकाश रहेगा. इसके अलावा 24 नवंबर को गुरु नानक देव प्रकाश पर्व के चलते भी बाजार बंद रहेगा। नियमित शनिवार और रविवार के अवकाश अलग रहेंगे.
विशेषज्ञों का कहना है कि मुहूर्त ट्रेडिंग में निवेश का निर्णय केवल शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन, दीर्घकालिक संभावनाओं और निवेश लक्ष्य के आधार पर किया जाना चहिए. हालांकि भारतीय शेयर बाजार में यह परंपरा दशकों पुरानी है और निवेशकों के बीच आज भी उतनी ही लोकप्रिय बनी हुई है.
Ganesh Ji Ki Aarti: दीपावली पूजन में विघ्नों को दूर करने के लिए जरूर करें भगवान गणेश जी की आरती, पढ़ें लिरिक्स
Ganesh Ji Ki Aarti: आज 8 नवंबर 2026, रविवार को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान राम 14 वर्षों के वनवास के बाद और माता सीता को लंका से छुड़ाने के बाद अयोध्या आए थे, तो पूरी अयोध्या ने जश्न मनाया था. उनकी वापसी के अवसर पर उत्सव हुआ था, जिसमें सभी ने दीप जलाएं. इस दिन दीये जलाकर प्रकाश किया जाता है. इसलिए, इस त्योहार का दिवाली या दीपावली कहते हैं. तब से ही हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर दिवाली मनाई जाने लगी.
हर साल दिवाली की शाम प्रदोष काल में भगवान गणेश और लक्ष्मी माता का पूजन किया जाता है. बता दें कि सीता माता भी मां लक्ष्मी का ही स्वरूप है. ऐसे में यदि आप गणेश पूजन कर रहे हैं तो बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपको गणेश जी की आरती भी जरूर करनी चाहिए. आप हमारी इस खबर में श्रीगणेश आरती के लिरिक्स पढ़ सकते हैं.
श्रीगणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi)
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
अँधे को आँख देत,कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
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श्री गणेश चालीसा (Shree Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi)
दोहा
जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू।मंगल भरण करण शुभः काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता।विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।मुषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी।बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै।पालना पर बालक स्वरूप हवै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो।उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई।का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा।शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै।अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
दोहा
श्री गणेश यह चालीसा,पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै,लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्र दश,ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो,मंगल मूर्ती गणेश॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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