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दिवाली पर लक्ष्मी मां की असीम कृपा और धनवर्षा के लिए पढ़ें श्री सूक्तम्, जानें पाठ के लाभ

Diwali 2026: आज यानी 8 नवंबर 2026 को दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है. दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा करनी होती है. मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी माता धरती पर भ्रमण करती है और भक्तों के घर जाती है. इसलिए, इस दिन शाम के समय दीये जलाए जाते हैं. दिवाली पर दीपों से प्रकाश किया जाता है और अंधेरा मिटाया जाता है. दिनाली पर प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन किया जाता है. उन्हें आज के दिन कमल के फूल, कमलगट्टे के बीच, मखाने, खीर आदि जैसी चीजों का भोग लगाया जाता है. इसके अलावा, उनके मंत्रों का जाप भी किया जाता है. दिवाली की रात लक्ष्मी मां की असीम कृपा पाने के लिए आपको श्री सूक्तम् का पाठ भी करना चाहिए. चलिए पढ़ते हैं श्री सूक्तम् के लिरिक्स.

श्री सूक्तम् (Shree Suktam Lyrics in Hindi)

भव प्रदाता श्री सूक्त

हरिःॐहिरण्यवर्णांहरिणींसुवर्णरजतस्र​जाम्।
चन्द्रांहिरण्मयींलक्ष्मींजातवेदोमआवह॥1॥

तांमआवहजातवेदोलक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यांहिरण्यंविन्देयंगामश्वंपुरुषानहम्॥2॥

अश्वपूर्वांरथमध्यांहस्तिनादप्रबोधिनीम्।
श्रियंदेवीमुपह्वयेश्रीर्मादेवीजुषताम्॥3॥

कांसोस्मितांहिरण्यप्राकारामार्द्रांज्वलन्तींतृप्तांतर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितांपद्मवर्णांतामिहोपह्वयेश्रियम्॥4॥

चन्द्रांप्रभासांयशसाज्वलन्तींश्रियंलोकेदेवजुष्टामुदाराम्।
तांपद्मिनीमींशरणमहंप्रपद्येऽलक्ष्मीर्मेनश्यतांत्वांवृणे॥5॥

आदित्यवर्णेतपसोऽधिजातोवनस्पतिस्तववृक्षोऽथबिल्वः।
तस्यफलानितपसानुदन्तुमायान्तरायाश्चबाह्याअलक्ष्मीः॥6॥

उपैतुमांदेवसखःकीर्तिश्चमणिनासह।
प्रादुर्भूतोऽस्मिराष्ट्रेऽस्मिन्कीर्तिमृद्धिंददातुमे॥7॥

क्षुत्पिपासामलांज्येष्ठामलक्ष्मींनाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिंचसर्वांनिर्णुदमेगृहात्॥8॥

गन्धद्वारांदुराधर्षांनित्यपुष्टांकरीषिणीम्।
ईश्वरींसर्वभूतानांतामिहोपह्वयेश्रियम्॥9॥

मनसःकाममाकूतिंवाचःसत्यमशीमहि।
पशूनांरूपमन्नस्यमयिश्रीःश्रयतांयशः॥10॥

कर्दमेनप्रजाभूतामयिसम्भवकर्दम।
श्रियंवासयमेकुलेमातरंपद्ममालिनीम्॥11॥

आपःसृजन्तुस्निग्धानिचिक्लीतवसमेगृहे।
निचदेवींमातरंश्रियंवासयमेकुले॥12॥

आर्द्रांपुष्करिणींपुष्टिंपिङ्गलांपद्ममालिनीम्।
चन्द्रांहिरण्मयींलक्ष्मींजातवेदोमआवह॥13॥

आर्द्रांयःकरिणींयष्टिंसुवर्णांहेममालिनीम्।
सूर्यांहिरण्मयींलक्ष्मींजातवेदोमआवह॥14॥

तांमआवहजातवेदोलक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यांहिरण्यंप्रभूतंगावोदास्योऽश्वान्विन्देयंपुरुषानहम्॥15॥

यःशुचिःप्रयतोभूत्वाजुहुयादाज्यमन्वहम्।
सूक्तंपञ्चदशर्चंचश्रीकामःसततंजपेत्॥16॥

पद्माननेपद्मऊरूपद्माक्षीपद्मसम्भवे।
त्वंमांभजस्वपद्माक्षीयेनसौख्यंलभाम्यहम्॥17॥

अश्वदायिगोदायिधनदायिमहाधने।
धनंमेजुषतांदेविसर्वकामांश्चदेहिमे॥18॥

पुत्रपौत्रधनंधान्यंहस्त्यश्वादिगवेरथम्।
प्रजानांभवसिमाताआयुष्मन्तंकरोतुमाम्॥19॥

धनमग्निर्धनंवायुर्धनंसूर्योधनंवसुः।
धनमिन्द्रोबृहस्पतिर्वरुणंधनमश्नुते॥20॥

वैनतेयसोमंपिबसोमंपिबतुवृत्रहा।
सोमंधनस्यसोमिनोमह्यंददातुसोमिनः॥21॥

नक्रोधोनचमात्सर्यनलोभोनाशुभामतिः।
भवन्तिकृतपुण्यानांभक्तानांश्रीसूक्तंजपेत्सदा॥22॥

वर्षन्तुतेविभावरिदिवोअभ्रस्यविद्युतः।
रोहन्तुसर्वबीजान्यवब्रह्मद्विषोजहि॥23॥

पद्मप्रियेपद्मिनिपद्महस्तेपद्मालयेपद्मदलायताक्षि।
विश्वप्रियेविष्णुमनोऽनुकूलेत्वत्पादपद्मंमयिसन्निधत्स्व॥24॥

यासापद्मासनस्थाविपुलकटितटीपद्मपत्रायताक्षी।
गम्भीरावर्तनाभिःस्तनभरनमिताशुभ्रवस्त्रोत्तरीया॥25॥

लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रैर्मणिगणखचितैस्स्नापिताहेमकुम्भैः।
नित्यंसापद्महस्ताममवसतुगृहेसर्वमाङ्गल्ययुक्ता॥26॥

लक्ष्मींक्षीरसमुद्रराजतनयांश्रीरङ्गधामेश्वरीम्।
दासीभूतसमस्तदेववनितांलोकैकदीपांकुराम्॥27॥

श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधराम्।
त्वांत्रैलोक्यकुटुम्बिनींसरसिजांवन्देमुकुन्दप्रियाम्॥28॥

सिद्धलक्ष्मीर्मोक्षलक्ष्मीर्जयलक्ष्मीस्सरस्वती।
श्रीलक्ष्मीर्वरलक्ष्मीश्चप्रसन्नाममसर्वदा॥29॥

वरांकुशौपाशमभीतिमुद्रांकरैर्वहन्तींकमलासनस्थाम्।
बालार्ककोटिप्रतिभांत्रिणेत्रांभजेहमाद्यांजगदीश्वरींत्वाम्॥30॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्येशिवेसर्वार्थसाधिके।
शरण्येत्र्यम्बकेदेविनारायणिनमोऽस्तुते॥31॥

सरसिजनिलयेसरोजहस्तेधवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवतिहरिवल्लभेमनोज्ञेत्रिभुवनभूतिकरिप्रसीदमह्यम्॥32॥

विष्णुपत्नींक्षमांदेवींमाधवींमाधवप्रियाम्।
विष्णोःप्रियसखींदेवींनमाम्यच्युतवल्लभाम्॥33॥

महालक्ष्मीचविद्महेविष्णुपत्नींचधीमहि।
तन्नोलक्ष्मीःप्रचोदयात्॥34॥

श्रीवर्चस्यमायुष्यमारोग्यमाविधात्पवमानंमहियते।
धनंधान्यंपशुंबहुपुत्रलाभंशतसंवत्सरंदीर्घमायुः॥35॥

ऋणरोगादिदारिद्र्यपापक्षुदपमृत्यवः।
भयशोकमनस्तापानश्यन्तुममसर्वदा॥36॥

यएवंवेदॐमहादेव्यैचविद्महेविष्णुपत्नींचधीमहि।
तन्नोलक्ष्मीःप्रचोदयात्ॐशान्तिःशान्तिःशान्तिः॥37॥

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श्री सूक्तम् पाठ करने के 5 लाभ

1.मां लक्ष्मी की कृपा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री सूक्तम् का पाठ करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं.

2.धन-समृद्धि में वृद्धि: मान्यता है कि नियमित रूप से श्री सूक्तम् का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

3.दरिद्रता से मुक्ति: श्री सूक्तम् के पाठ से घर की दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होने की धार्मिक मान्यता है.

4.सुख-शांति का वास: इसका पाठ करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

5.मनोकामनाओं की पूर्ति: श्रद्धापूर्वक श्री सूक्तम् का पाठ करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Diwali 2026: दिवाली की रात घर के किस-किस कोने में जलाएं दीपक? जानें दीपदान का महत्व

Diwali 2026: आज दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है. यह पर्व हिंदू धर्म का सबसे बड़ा पर्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर दीपों का त्योहार दिवाली मनाई जाती है. इस दिन घर में लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है. वहीं, पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस तिथि पर राम जी 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. उस खुशी में पूरी अयोध्या ने दीये जलाकर जश्न मनाया था. इसलिए, तब से हर वर्ष दिवाली मनाई जाने लगी. इस दिन हर घर में दीये जलाएं जाते हैं. दीपों को रोशनी और उज्जवलता का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में चलिए जानते हैं दिवाली की शाम घर के किस-किस कोने में कितने दीये जलाने चाहिए.

दिवाली की रात कहां-कहां दीये जलाएं?

1.मुख्य द्वार

दिवाली की रात घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीये जलाना शुभ माना जाता है. इससे मां लक्ष्मी का स्वागत होता है और घर की दरिद्रता दूर होती है.

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2.पूजा स्थल

घर के पूजा स्थल या मंदिर में दीये अवश्य जलाने चाहिए. यहां दो दीये खास तौर पर लक्ष्मी मां के होते हैं, जिनमे से एक देसी घी का होता है और एक सरसों के तेल का दीया होता है. पूजा घर में दीपक ईशान कोण में रखना उत्तम माना जाता है.

3.तुलसी का पौधा

शाम के समय तुलसी के पौधे पर दिवाली का दीया जलाना चाहिए. तुलसी माता को भी लक्ष्मी माता का स्वरूप कहा जाता है.

4.रसोई घर

रसोई घर में अन्नपूर्णा माता का वास होता है. वे अपने भक्तों पर हमेशा आशीर्वाद बनाएं रखती हैं और रसोई में अन्न की कमी नहीं होने देती है. इसलिए, दिवाली पर रसोई घर में भी दीये जलाने चाहिए.

5.उत्तर दिशा

वास्तु के अनुसार, उत्तर दिशा को धन के देवता भगवान कुबेर की दिशा कहा जाता है. इसलिए, दिवाली पर घर के इस कोने में दीपक जरूर रखने चाहिए.

6.खिड़की से लेकर बालकनी तक

दिवाली पर घर का कोई भी कोना अंधेरे में नहीं रहना चाहिए. इसलिए, घर की सभी खिड़कियों, बालकनियों और छत की मुंडेर पर दीये लगाने चाहिए.

7.सीढ़ियों पर और उसके नीचे भी

आज के दिन घर सभी सीढ़ियों पर दीये रख सकते हैं. यदि सीढ़ि के नीचे खाली जगह है, तो वहां भी दीपक जलाएं.

8.जल रखने वाले स्थान

दीपावली के मौके पर आपको अपने घर के प्याऊ में दीये जलाने चाहिए. जल रखने वाला स्थान भी लक्ष्मी माता से गहराई से संबंधित माना जाता है. इसलिए, इधर भी दीपक जलाते हैं.

9.घर के बाहर और चौराहे पर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर घर के बाहर और चौराहे पर भी दीये जलाने चाहिए.

10.पितरों को दीपक

दिवाली पर आपको अपने पितरों और यम देवता यमराज के लिए भी एक दीपक जलाना चाहिए.

11.अंधेरे व कचरे के स्थान पर

दिवाली पर घर के अंधेरे कोनों और कचरे वाले स्थान पर दीये जलाने चाहिए. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करना होता है.

कितने दीपक जलाने चाहिए और उनका महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात में आपको कम से कम 21 दीयों को जलाना चाहिए. इसके अलावा, सभी अपनी श्रद्धा के अनुसार, दिवाली पर 51, 108 या पूरे घर में जितने संभव हो उतने दीये भी जला सकते हैं. 21 दीयों को निर्माण और स्थापना का प्रतीक माना जाता है. 51 दीपक जलाने का महत्व विस्तार का प्रतीक कहा जाता है. 100 दीयों को बड़े कार्य की पूर्णता और युग का प्रतीक माना जाता है. 101 दीयों को जलाने के लिए नवयुग के आरंभ और नई शुरुआत का प्रतीक मानते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

 

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