वास्तु शास्त्र में पॉजिटिव एनर्जी में वृद्धि और घर में फैली निगेटिविटी को दूर करने के लिए कई तरह के उपायों के बारे में बताया गया है। इसके अलावा कुछ आदतों की वजह से भी घर में निगेटिव और पॉजिटिव एनर्जी का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको वास्तु शास्त्र में सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए। वहीं कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनको शाम के समय खरीदने से बचना चाहिए।
वास्तु के नियमों के मुताबिक घर की पॉजिटिव एनर्जी पर अच्छा प्रभाव नहीं माना जाता है। इससे पारिवारिक जीवन में तनाव और आर्थिक परेशानियों में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं शाम को किन-किन चीजों को नहीं खरीदना चाहिए।
नमक खरीदने से बचना चाहिए
वास्तु के मुताबिक घर की सुख-समृद्धि और शांति के लिए नमक का इस्तेमाल कारगर होता है। नमक भोजन का स्वाद बढ़ने के साथ जीवन में तरक्की के रास्ते खोलता है। भूलकर भी सूर्यास्त के बाद नमक नहीं खरीदना चाहिए। वास्तु शास्त्र के मुताबिक आर्थिक जीवन में कई तरह की बाधाएं आ सकती हैं। बेफिजूल के खर्चों में इजाफा हो सकता है।
झाड़ू न खरीदें
धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में शाम के समय नई झाड़ू खरीदना अच्छा नहीं माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि पर निगेटिव असर होता है। जीवन में धन से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
ना खरीदें सरसों का तेल
सूर्यास्त के बाद सरसों का तेल खरीदना वर्जित माना जाता है। जिन घरों में सूर्यास्त के बाद सरसों का तेल खरीदा जाता है। वहां पर निगेटिव एनर्जी का प्रभाव बढ़ने लगता है। ऐसा करने से परिवार के सदस्य अक्सर बीमार रहने लगते हैं। इसके अलावा कार्यों में रुकावटें आने लगती हैं।
शाम को न खरीदें दूध
शाम के समय दूध खरीदने से बचना चाहिए। दूध का संबंध चंद्रमा से होता है और सूर्यास्त के बाद दूध खरीदने से बचना होगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा करने से घर में आने वाली निगेटिव एनर्जी में वृद्धि होती है।
न खरीदें काला तिल
वैसे तो काले तिल का दान करने से जीवन में आने वाली कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। लेकिन सूर्यास्त के बाद काला तिल खरीदने से बचना चाहिए। इससे कष्टों और मानसिक तनाव में वृद्धि होती है।
Continue reading on the app
अगस्त का पूरा महीना व्रत-त्योहारों से भरा हुआ है। सावन की शुरुआत भी हो चुकी है, ऐसे में शिवभक्त भी भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए व्रत रखेंगे और पूजा-अर्चना करेगे। वैसे अगस्त 2026 की शुरुआत शुभ योग के साथ हो रही है। असल में यह पूरा महीना भक्ति में डूबने वाला है। व्रत-त्योहारों की झड़ी लगने वाली है।
इस दौरान कई मुख्य व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जिनका हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। अगस्त में भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन, महिलाओं के लिए प्रमुख व्रत हरियाली चीज, एकादशी-प्रदोष व्रत सहित अन्य व्रत-त्योहारों की लिस्ट इस लेख में हम आपको बताएंगे। इस बार सावन के महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लगेंगे। जिसका असर देश-दुनिया व विभिन्न राशियों पर देखने को मिलेगा। चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं अगस्त महीने में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट।
अगस्त में कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण?
अगस्त के महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लगेंगे। 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा। भारत के समय के अनुसार, इसकी शुरुआत रात 9:04 बजे होगी और समाप्त 13 अगस्त की सुबह 4.25 बजे होगा। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। जिसके चलते भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
वहीं दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। भारत के समय के अनुसार, यह सुबह 6.53 बजे शुरु होकर दोपहर 12.31 बजे तक रहेगा। वैसे चंद्र ग्रहण भी भारत में नजर नहीं आएगा। इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
अगस्त के प्रमुख व्रत और त्योहार
अगस्त के महीने में आने वाले त्योहारों के लिए पहले से ही मन में उत्साह उत्पन्न हो जाती है, आइए आपको अगस्त के प्रमुख व्रत-त्योहारों के बारे में बताते है-
-2 अगस्त (रविवार)- गजानन संकष्टी चतुर्थी (सावन संकष्टी चतुर्थी)
-3 अगस्त (सोमवार)- पहला सावन सोमवार व्रत
-4 अगस्त (मंगलवार)- पहला मंगला गौरी व्रत
-5 अगस्त (बुधवार)- सावन कालाष्टमी व्रत
-7 अगस्त (शुक्रवार)- मासिक कार्तिगाई
-8 अगस्त (शनिवार)- रोहिणी व्रत
-9 अगस्त (रविवार)- कामिका एकादशी
-10 अगस्त (सोमवार)- दूसरा सावन सोमवार व्रत, सोम प्रदोष व्रत
-11 अगस्त (मंगलवार)- दूसरा मंगला गौरी व्रत, सावन शिवरात्रि
-12 अगस्त (बुधवार)- सावन अमावस्या, हरियाली अमावस्या, सूर्य ग्रहण
-13 अगस्त (गुरुवार)- सावन शुक्ल प्रतिपदा, श्रावण शुक्ल पक्ष प्रारंभ
-15 अगस्त (शनिवार)- हरियाली तीज
-16 अगस्त (रविवार)- सावन विनायक चतुर्थी
-17 अगस्त (सोमवार)- तीसरा सावन सोमवार, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति
-18 अगस्त (मंगलवार)- तीसरा मंगला गौरी व्रत, कल्कि जयंती
-19 अगस्त (बुधवार)- तुलसीदास जयंती
-20 अगस्त (गुरुवार)- सावन मासिक दुर्गाष्टमी
-23 अगस्त (रविवार)- श्रावण पुत्रदा एकादशी
-24 अगस्त (सोमवार)- चौथा सावन सोमवार
-25 अगस्त (मंगलवार)- चौथा मंगला गौरी व्रत
-26 अगस्त (बुधवार)- ओणम
-27 अगस्त (गुरुवार)- श्रावण पूर्णिमा व्रत
-28 अगस्त (शुक्रवार)- श्रावण पूर्णिमा, रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण
-31 अगस्त (सोमवार) - कजरी तीज, श्रीगणेश चतुर्थी (बहुला चतुर्थी)
Continue reading on the app