विटल इलेक्टॉनिक्स को खरीदेगी RRP Electronics, ऑर्डर में जुड़ेंगे ₹90 करोड़
RRP Electronics ने Vital Electronics के अधिग्रहण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस सौदे से कंपनी का कारोबार मजबूत होगा। साथ ही उसे ऑर्डर बुक में ₹90 करोड़ जुड़ने और लंबी अवधि की ग्रोथ की उम्मीद है। जानिए डिटेल।
अब डिजिटल भुगतान पर भी देना होगा चार्ज? सरकार ने UPI पर चार्ज के तय किए नियम
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र जारी है. गुरुवार को लोकसभा में 'कर और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2026' पास हो गया. यह बिल 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में बदलाव करता है, जिससे सरकार यह तय कर सकेगी कि कौन से डिजिटल पेमेंट तरीके मुफ्त रहेंगे और किन पर चार्ज लग सकता है.
- यह 'इनकम टैक्स एक्ट, 2025' से जुड़े मौजूदा सिस्टम की जगह लेगा, जिससे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से होने वाले ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है.
- हालांकि, निकट भविष्य में UPI पर MDR लगने की संभावना कम है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि UPI के लिए संभावित MDR के स्ट्रक्चर पर बातचीत अभी शुरुआती दौर में है. उन्होंने यह भी कहा कि रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है.
कानून में क्या हुआ बदलाव?
बता दें कि अब तक लागू 'भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007' की धारा 10A के तहत बैंकों या किसी भी डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के लिए ग्राहकों या व्यापारियों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना पूरी तरह गैर-कानूनी था.
- इसके साथ ही, आयकर अधिनियम के पुराने नियमों के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई (BHIM-UPI) जैसी मुफ्त डिजिटल भुगतान सुविधाएं देना अनिवार्य था. लेकिन अब नए संशोधन के बाद, कानून से इस पाबंदी को हटा दिया गया है.
- ऐसे में अब सरकार गजट अधिसूचना के जरिए यह तय कर सकती है कि किन डिजिटल माध्यमों पर शुल्क लगाया जाएगा और किन्हें इससे बाहर रखा जाएगा.
क्या बोले आरबीआई गवर्नर?
लोकसभा में इस बिल के पास होने से एक दिन पहले यानी बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस विषय पर एक अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अभी यूपीआई पर तत्काल शुल्क लगाने की बात करना जल्दबाजी होगी, लेकिन इस बड़े डिजिटल ढांचे को चलाने के लिए फंड की जरूरत है.
- आरबीआई गवर्नर ने कहा कि 'यूजर-पे' मॉडल का समर्थन करते हुए कहा, "हमारे सामने दो ही रास्ते हैं या तो देश की जनता टैक्स के जरिए इस डिजिटल बुनियादी ढांचे का खर्च उठाए, या फिर इसका उपयोग करने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के रूप में इसका भुगतान करें. क्योंकि सरकार अब यह संशोधन लेकर आई है, तो हमें आगे के घटनाक्रम का इंतजार करना चाहिए."
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