शुक्रवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कन्नूर और तिरुवनंतपुरम के बीच हाई-स्पीड कॉरिडोर पर चर्चा करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हाई-स्पीड कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर सवाल उठाते हुए ब्रिटास ने कहा कि रेल मंत्री "प्रस्तुति और मार्केटिंग" में माहिर हैं। जवाब में वैष्णव ने सीपीआई (एम) और कांग्रेस के बीच गठबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों पार्टियां केरल में विकास नहीं चाहतीं।
सीपीआई (एम) सांसद ने पूछा कि रेलवे मंत्री की एक अच्छी बात यह है कि वे प्रदर्शन और मार्केटिंग में माहिर हैं, और इसीलिए उन्हें सूचना एवं प्रसारण का अतिरिक्त पोर्टफोलियो दिया गया है। उन्होंने पांच पन्नों के जवाब में सात सर्वेक्षणों का जिक्र किया, जिनमें से एक सर्वेक्षण 2018-19 के बजट में घोषित किया गया था। डीपीआर जमा हो चुका है, और वे अब भी इस सर्वेक्षण की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ई. श्रीधरन का पत्र रेलवे बोर्ड को जांच के लिए भेजा गया है। किस बात की जांच? क्या रेलवे को डीपीआर तैयार करना है, या श्रीधरन को डीपीआर तैयार करने का अधिकार देना है? और क्या वे इस प्रस्तावित परियोजना को हाई-स्पीड कॉरिडोर मानेंगे, जबकि केरल को बजट में घोषित हाई-स्पीड कॉरिडोर से बाहर रखा गया है?
वैष्णव ने ब्रिटास की मार्केटिंग टिप्पणी को अपमानजनक बताया और एलडीएफ और यूडीएफ को कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी के नाम पर एक गठबंधन करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में वामपंथी सरकार ने रेलवे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण रोक रखा है। रेल मंत्री ने कहा कि सदस्य ने अपमानजनक टिप्पणी की है। डॉ. श्रीधरन ने प्रस्ताव दिया है। उनके प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार को रेलवे में कोई विशेषज्ञता नहीं है। उनका प्रस्ताव 180 किमी प्रति घंटे की रेलवे लाइन के लिए है। उन्होंने पूरे उत्तर-दक्षिण केरल में एक एलिवेटेड लाइन का प्रस्ताव रखा है। हमने इसकी पूरी तरह से जांच की है और हम जल्द ही उनसे इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलाने का इरादा रखते हैं। सामान्य तौर पर, एलिवेटेड लाइनों की लागत 300 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर होती है। हमारे पास तीन विकल्प हैं। पहला विकल्प राज्य सरकार द्वारा दिया गया के-रेल प्रोजेक्ट है, जो तटबंध पर था। दूसरा विकल्प रेलवे द्वारा कराए गए सर्वेक्षण हैं... जो सतह पर है। तीसरा विकल्प एलिवेटेड लाइन है। हमें सबसे अच्छा और लागत प्रभावी विकल्प देखना होगा।
केरल सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि असली मुद्दा यह है कि कांग्रेस और वामपंथी दलों का गठबंधन है, जिसे कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी कहा जाता है। उनका एकमात्र उद्देश्य केरल में हर परियोजना को रोकना है। उनका किसी भी परियोजना को पूरा करने का कोई इरादा नहीं है। हमने भूमि अधिग्रहण के लिए पैसा दिया; वे भूमि अधिग्रहण नहीं करना चाहते। भूमि अधिग्रहण के लिए 1,900 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं। सबरी लाइन, जो लंबे समय से लंबित है, राज्य सरकार ने बहुत दबाव के बाद भूमि अधिग्रहण शुरू किया। क्या केरल की जनता की सेवा करने का यही तरीका है?
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पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां सत्ता, बदला और रणनीति तीनों एक साथ टकरा रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चले गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमले में उन्हें भयंकर चोटें आईं, जिनमें उनका एक पैर काटना पड़ा है और पेट या यकृत को भी भारी नुकसान पहुंचा है। तेहरान के सिना विश्वविद्यालय अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच उनका इलाज चल रहा है और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
अपने पिता और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद जैसे ही सत्ता की विरासत मोजतबा खामेनेई के कंधों पर आई, उसके कुछ ही घंटों में उन पर घातक हमला हो गया। सत्ता संभालते ही उनके इस तरह गंभीर रूप से घायल हो जाने की घटना ने पूरे ईरान की सत्ता व्यवस्था और नेतृत्व की स्थिरता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस घटना ने ईरान के भीतर विश्वास और नियंत्रण की छवि को झकझोर दिया है और देश के राजनीतिक तथा सैन्य ढांचे में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि मोजतबा खामेनेई शायद अभी किसी रूप में जिंदा हैं, लेकिन उन्हें भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप के इस बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी रहस्यमय बना दिया है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए हैं।
हालांकि घायल होने और कोमा की खबरों के बीच मोजतबा खामेनेई की ओर से जारी एक संदेश ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और भड़का दिया है। अपने पहले बयान में उन्होंने साफ कहा है कि ईरान हर उस व्यक्ति की मौत का बदला लेगा जो इस युद्ध में मारा गया है। उन्होंने कहा कि हर शहीद ईरानी एक अलग प्रतिशोध का मामला है और बदला पूरा होने तक ईरान की कार्रवाई जारी रहेगी। खामेनेई ने खास तौर पर नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने मिनाब स्थित शजरा तय्यिबा स्कूल पर हमले का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों की मौत ने ईरान की प्रतिशोध नीति को और कठोर बना दिया है। ईरानी नेतृत्व इस घटना को युद्ध का सबसे प्रतीकात्मक अपराध बताकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
साथ ही खामेनेई ने ईरान की प्रतिरोध धुरी की भी खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोहियों और इराक के प्रतिरोध समूहों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ये सभी संगठन मिलकर इजराइली साजिश के खिलाफ क्षेत्रीय मोर्चा मजबूत कर रहे हैं। यह बयान इस बात का संकेत है कि युद्ध अब केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में फैल सकता है।
खामेनेई ने उन देशों को भी कड़ी चेतावनी दी है जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों में किया गया है। उन्होंने क्षेत्रीय सरकारों से विदेशी सैन्य अड्डे बंद करने की अपील करते हुए साफ कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो इन ठिकानों को निशाना बनाया जाता रहेगा।
इसके साथ ही, ईरान की रणनीति का एक और बेहद खतरनाक पहलू भी सामने आया है। खामेनेई ने कहा है कि होरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने का विकल्प लगातार इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हम आपको बता दें कि यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर ईरान इस मार्ग को बाधित करता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल आ सकता है।
दूसरी ओर इजराइल ने भी बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि आतंकी संगठनों के नेताओं के लिए कोई जीवन बीमा नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो मोजतबा खामेनेई और हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम भी निशाने पर हो सकते हैं। नेतन्याहू का दावा है कि इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई बेहद सफल चल रही है। उन्होंने कहा कि इजराइली सेना ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और बसिज बलों को सड़क से लेकर चौकियों तक हर जगह करारी चोट पहुंचा रही है। उन्होंने ईरान की जनता से भी सीधे संवाद करते हुए कहा कि बदलाव का क्षण करीब है और ईरानी लोग यदि चाहें तो अपने देश के भविष्य की दिशा बदल सकते हैं।
नेतन्याहू ने यह भी बताया कि उनकी और डोनाल्ड ट्रंप की लगातार बातचीत हो रही है और दोनों नेता लगभग हर दिन रणनीतिक फैसले ले रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि अमेरिका और इजराइल के गठबंधन की सुनियोजित सैन्य मुहिम बन चुका है।
साथ ही इस पूरे घटनाक्रम का सामरिक महत्व अत्यंत गंभीर है। यदि मोजतबा खामेनेई वास्तव में कोमा में हैं तो ईरान के नेतृत्व में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है। युद्ध के बीच नेतृत्व संकट किसी भी देश की सैन्य क्षमता को कमजोर कर देता है। लेकिन ईरान की व्यवस्था में प्रतिरोध नेटवर्क और सैन्य ढांचे की गहराई इतनी है कि नेतृत्व बदलने पर भी संघर्ष जारी रह सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू होरमुज जलडमरूमध्य है। यदि ईरान इसे अवरुद्ध करने की कोशिश करता है तो दुनिया के तेल बाजार में जबरदस्त उथल पुथल मच सकती है। यह कदम पश्चिमी देशों पर आर्थिक दबाव बनाने का सबसे शक्तिशाली हथियार हो सकता है। तीसरा सामरिक आयाम प्रतिरोध धुरी का विस्तार है। हिजबुल्लाह, हूती और इराकी समूहों की सक्रियता का मतलब है कि यह युद्ध कई मोर्चों पर फैल सकता है। इससे इजराइल को उत्तरी सीमा से लेकर लाल सागर तक एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा पड़ेगा। यही कारण है कि पश्चिम एशिया की यह जंग अब केवल दो या तीन देशों का संघर्ष नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक विस्फोटक रणनीतिक संकट बन चुकी है।
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