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भारत की केमिकल और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: सरकार

नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, जिसका वर्तमान आकार लगभग 220 अरब डॉलर है, वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, भारत वैश्विक रसायन उद्योग में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और यह क्षेत्र देश की औद्योगिक एवं विनिर्माण वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।

फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत वर्तमान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र के उत्पादों का उपयोग औषधि, वस्त्र, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित अनेक उद्योगों में किया जाता है।

सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को स्वचालित मार्ग के तहत अनुमति दे रखी है, जिसके तहत विदेश से आने वाले निवेश को सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। इसी का परिणाम है कि 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में 1,04,895 करोड़ रुपए का एफडीआई आया, जो 2004 से 2014 के दौरान प्राप्त 45,240 करोड़ रुपए के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।

फैक्टशीट के अनुसार, प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन 2015-16 के 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 58,617 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि उत्पादन क्षमता विस्तार, विशेषीकृत विनिर्माण हब के विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार का परिणाम मानी जा रही है।

बयान में आगे कहा गया है कि विशेष रसायनों के क्षेत्र में भी भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है, जबकि कृषि रसायनों के निर्यात में तीसरे स्थान पर है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कार्यरत हैं।

सरकार इस क्षेत्र को और गति देने के लिए कई नई पहलें लागू कर रही है, जिनमें समर्पित केमिकल पार्क, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं तथा गुणवत्ता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदम शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारत की वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी को मजबूत करना है।

जुलाई 2026 में मंजूर की गई भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) होगा। केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपए तक की सहायता देगी, जबकि संबंधित राज्य सरकार को कम से कम 500 करोड़ रुपए का योगदान देना होगा।

इस योजना का कुल वित्तीय प्रावधान 3,030 करोड़ रुपए है, जिसमें 3,000 करोड़ रुपए बुनियादी ढांचे और सामान्य सुविधाओं के विकास के लिए तथा 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।

इसके अलावा, नवंबर 2025 में शुरू की गई अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का कोष बनाया गया है, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार निवेश को बढ़ावा देना है। यह योजना दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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मनोदिव्यांगों के हुनर को मिला बाजार, गुजरात के डिप्टी CM हर्ष सांघवी ने खुद बेचे 35 हजार दीये

गुजरात में सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने एक अनूठी पहल की. उन्होंने अहमदाबाद के सरकारी मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल में मानसिक बीमारी से उबर रहे लोगों द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के दीयों को गांधीनगर के सेक्टर-21 मुख्य बाजार में खुद दुकानदार बनकर बेचा. इस पहल के तहत करीब 35 हजार दीयों की बिक्री हुई, जिनकी कुल कीमत लगभग 1.90 लाख रुपये बताई गई है.

इस पहल का उद्देश्य इन लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. हर्ष सांघवी ने बाजार में ग्राहकों से बातचीत कर उन्हें इन दीयों को खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया. यह गतिविधि 'नशामुक्त गुजरात, स्वस्थ युवा, सशक्त परिवार' के संकल्प से भी जुड़ी है.

कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की राह

अहमदाबाद के सरकारी मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल में मरीजों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इनमें स्क्रीन प्रिंटिंग, बुनाई, सिलाई, फाइल निर्माण, राखी बनाना, अगरबत्ती उत्पादन और लकड़ी की वस्तुएं तैयार करना शामिल है. इन गतिविधियों के जरिए लोगों को हुनर विकसित करने और अपनी क्षमता के अनुसार काम करने का अवसर मिलता है.

101 नई बसों की भी शुरुआत

दीपावली के अवसर पर हर्ष सांघवी ने गांधीनगर में GSRTC की 101 नई बसों को भी हरी झंडी दिखाई. खास बात यह रही कि उन्होंने बसों को रवाना करने के लिए निगम के कर्मचारियों को भी अपने साथ शामिल किया. उन्होंने कर्मचारियों को दीपावली के लिए आधे महीने का वेतन अग्रिम देने की घोषणा भी की.

कार्यक्रम में परिवहन राज्य मंत्री प्रवीण माली सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे. इस तरह गुजरात में सामाजिक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी पहलें एक ही दिन चर्चा में रहीं.

 

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