Responsive Scrollable Menu

Israel: राष्ट्रपति हर्जोग ने Gadi Eisenkot को दिया सरकार बनाने का न्योता

तेल अवीव, आठ नवंबर (एपी) इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए चुना है। हर्जोग ने 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव में निर्वाचित दलों के साथ कई दिनों तक विचार-विमर्श करने के बाद शनिवार देर रात अपने फैसले की घोषणा की। हर्जोग का यह फैसला नेतन्याहू के लिए एक और झटका है, जिनकी पार्टी चुनाव में अपना संसदीय बहुमत गंवा चुकी है।

हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि आइजेनकोट ही अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। रविवार को एक आधिकारिक समारोह के बाद आइजेनकोट संभावित गठबंधन सहयोगियों के साथ जटिल बातचीत शुरू करेंगे। उनके पास सरकार बनाने के लिए छह सप्ताह तक का समय होगा।

वहीं, नेतन्याहू उन्हें सफल होने से रोकने की कोशिश करेंगे। इजराइल में लोग राजनीतिक दलों को वोट देते हैं, जो गठबंधन बनाते हैं। सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में कम से कम 61 सीट का बहुमत जरूरी है।

चुनाव में न तो नेतन्याहू और न ही आइजेनकोट बहुमत हासिल कर सके। नेतन्याहू के गठबंधन की सीट घटकर 53 रह गईं, जबकि पहले उसके पास 68 सीट थीं। आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीट मिलीं और अरब दलों ने शेष 19 सीट जीतीं।

हालांकि,पिछले सप्ताह विभिन्न दलों से विचार-विमर्श के बाद हर्जोग ने फैसला किया कि आइजेनकोट के पास गठबंधन बनाने की सबसे अच्छी संभावना है। इसकी वजह यह है कि अरब दलों ने उन्हें समर्थन देने की इच्छा जताई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आइजेनकोट भविष्य के गठबंधन में अरब दलों को शामिल करने के इच्छुक हैं या ऐसा कर पाने में सक्षम हैं।

गाजा और पूरे पश्चिम एशिया में तीन साल से जारी युद्धों के बाद अरब दलों के साथ सहयोग करना राजनीतिक रूप से मुश्किल है। आइजेनकोट के पास तीन विकल्प हैं : नेतन्याहू के साथ सत्ता साझा करने का समझौता, अरब दलों का समर्थन हासिल करना या अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों के साथ समझौता करना। हालांकि, उनके गठबंधन के कई सदस्य अरब दलों के समर्थन के पक्ष में नहीं हैं, जबकि अति-रूढ़िवादी दल अपने समुदाय को सैन्य सेवा से छूट देने की मांग कर रहे हैं।

सेना के पूर्व प्रमुख आइजेनकोट और उनके सहयोगियों ने अपने चुनाव प्रचार में सैन्य सेवा में समानता को प्रमुख मुद्दा बनाया था। वे विशेष रूप से अति-रूढ़िवादी समुदाय को लंबे समय से मिल रही अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट समाप्त करना चाहते हैं। शनिवार को हर्जोग द्वारा उन्हें सरकार बनाने के लिए चुने जाने की घोषणा के बाद आइजेनकोट ने जल्द से जल्द सरकार बनाने का संकल्प जताया।

हालांकि, ऐसा करने के लिए उन्हें लगभग निश्चित रूप से समझौते करने होंगे या अपने वादों से पीछे हटना होगा। नेतन्याहू बार-बार दावा करते रहे हैं कि अरब दलों ने अपने समर्थकों को बड़ी संख्या में मतदान के लिए प्रेरित करके चुनाव ‘‘चुरा लिया’’। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में बहुत कम सबूत पेश किए हैं।

उम्मीद है कि नेतन्याहू आइजेनकोट पर दबाव बनाने की अपनी रणनीति जारी रखेंगे और कहेंगे कि अरब दलों के साथ किसी भी तरह का गठबंधन करना विश्वासघात होगा। इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने मतदान में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका की जांच शुरू की है। हालांकि, देश के केंद्रीय निर्वाचन आयोग और हर्जोग का कहना है कि मतदान वैध था और यदि किसी तरह की गड़बड़ी पाई भी जाती है तो उसका चुनाव परिणाम पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा।

नेतन्याहू ने शनिवार रात आइजेनकोट के साथ ‘राष्ट्रीय एकता’ सरकार बनाने का आह्वान किया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों प्रतिद्वंद्वी सत्ता साझा करने के समझौते पर सहमत हो पाएंगे या नहीं। ऐसे गठबंधन अक्सर अस्थिर होते हैं और समय से पहले टूट जाते हैं।

आइजेनकोट के पास दो अरब दलों के समर्थन से गठबंधन बनाने का विकल्प भी है। इन दलों ने अरब समुदाय के रिकॉर्ड मतदान के बीच कुल 19 सीट जीती हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

अब तक केवल एक अरब दल, रआम ने 2021 में किसी इजराइली सरकार में शामिल होकर गठबंधन का हिस्सा बनने का इतिहास बनाया है। रआम ने आइजेनकोट को समर्थन देने की बात कही है, लेकिन उसके पास अकेले इतना संख्याबल नहीं है कि वह आइजेनकोट को बहुमत दिला सके। कई दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए दूसरे अरब दल ‘ज्वाइंट लिस्ट’ ने नेतन्याहू की सत्ता समाप्त करने के लिए गठबंधन में शामिल हुए बिना आइजेनकोट को समर्थन देने की घोषणा की है।

हालांकि, दोनों पक्षों के लिए यह सहयोग मुश्किलों भरा हो सकता है। ज्वाइंट लिस्ट के लिए इसका मतलब ऐसी सरकार का समर्थन करना होगा, जिससे इजराइल के युद्ध समाप्त करने या कब्जे वाले पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियों का विस्तार रोकने की संभावना कम है। वहीं, आइजेनकोट और अन्य विपक्षी दलों के लिए इसका मतलब ऐसे दलों के साथ जुड़ना होगा जो न केवल इजराइल की नीतियों की आलोचना करते हैं, बल्कि यहूदी राष्ट्र के रूप में उसकी पहचान को भी खारिज करते हैं।

आइजेनकोट ने अपने गठबंधन में किसी अरब दल को शामिल करने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें इजराइल को यहूदी राष्ट्र के रूप में मान्यता देना और फलस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करना शामिल है। आइजेनकोट के सहयोगियों में शामिल अधिक रूढ़िवादी दल ‘इजराइल बेतेनु’ पहले ही कह चुका है कि वह अरब दलों के साथ किसी गठबंधन में शामिल नहीं होगा।

आइजेनकोट का कहना है कि उनके साथ गठबंधन में शामिल होने वाले प्रत्येक दल को अनिवार्य सैन्य या नागरिक सेवा का समर्थन करना होगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अति-रूढ़िवादी धार्मिक दल इस मुद्दे पर समझौता करने के लिए तैयार हैं या नहीं। ये धार्मिक दल नेतन्याहू की निवर्तमान सरकार का हिस्सा थे और सैन्य सेवा से मिली छूट बरकरार रखना चाहते हैं।

उनका कहना है कि यह छूट उनकी धार्मिक जीवनशैली को बनाए रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, पिछले तीन वर्षों से जारी युद्ध के दौरान आम जनता के बीच इस छूट को लेकर विवाद काफी बढ़ गया है। अति-रूढ़िवादी दल ‘यूनाइटेड टोरा जूडिज्म’ ने निर्णायक भूमिका में होने की संभावना को देखते हुए आइजेनकोट के साथ सहयोग के विकल्प खुले रखे हैं।

आइजेनकोट को रविवार को एक समारोह में गठबंधन सरकार बनाने का औपचारिक निमंत्रण दिया जाएगा। यह कदम पिछले सप्ताह हर्जोग और राजनीतिक दलों के बीच दो दिन तक चली बैठकों के बाद उठाया जा रहा है। इससे पहले पिछले सप्ताह हर्जोग ने दो दिन तक विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बैठकें की थीं।

आइजेनकोट को गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा। राष्ट्रपति उन्हें दो सप्ताह का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। यदि वह सरकार बनाने में विफल रहते हैं तो नेतन्याहू को गठबंधन बनाने का मौका दिया जा सकता है।

यदि नेतन्याहू भी ऐसा करने में नाकाम रहते हैं तो अगले साल शुरुआती वसंत में देश में फिर से चुनाव होंगे। इजराइल की संसद ‘नेसेट’ के नए सदस्य मंगलवार शाम शपथ लेंगे। गठबंधन सरकार बनने तक नेतन्याहू और उनका मंत्रिमंडल सीमित अधिकारों के साथ कार्यवाहक सरकार के रूप में काम करते रहेंगे।

Continue reading on the app

'खरगे के दिवाली संदेश पर सियासत गरमाई', BJP ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का लगाया आरोप

दिवाली के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संदेश को लेकर बहस छिड़ गई है। देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं देने के साथ खरगे ने इस त्योहार को ‘खुशियों की ईद’ बताया है। उन्होंने कहा कि दिवाली कई दिनों तक चलने वाला खुशियों का पर्व है। ये लोगों को साथ लाने की कोशिश करता है। अपने प्रियजनों से मिलने का मौका होता है। खरगे ने इस मौके पर देश में शांति बनाए रखने के साथ  आपसी गलतफहमियां दूर करने के साथ राष्ट्रीय एकता के लिए मिलकर काम करने की अपील की। 

हालांकि, खरगे के इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान को तुष्टीकरण की राजनीति बताया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा कि  कांग्रेस दिवाली जैसे त्योहार पर भी वोट बैंक की राजनीति में लगी है। 

दिवाली की शुभकामनाएं दीं

मल्लिकार्जुन खरगे ने दिवाली की शुभकामनाएं देते कहा कि यह भारत का प्रमुख त्योहार है। इसे सभी लोग मिलकर मानते हैं। उन्होंने दिवाली को खुशियों, मेल-मिलाप और आपसी सद्भाव का प्रतीक करार दिया। उन्होंने कहा, ‘दिवाली खुशियों की ईद है, कई दिनों तक चलने वाली ईद है.’

Continue reading on the app

  Sports

Cheteshwar Pujara का बड़ा दावा, IPL 2027 से पहले KKR कई खिलाड़ी करेगी बाहर और RCB रहेगी स्थिर

आईपीएल 2027 की तैयारी अभी से शुरू हो गई है और अगले सीजन से पहले कई टीमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखने की आखिरी तारीख नजदीक आने के साथ ही फ्रेंचाइजी अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की जरूरतों का आकलन कर रही हैं। इस बीच भारत के पूर्व बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने उन खिलाड़ियों और टीमों को लेकर अपनी राय रखी है, जिनके अगले सीजन से पहले बाहर होने की संभावना है। उनके मुताबिक, कोलकाता नाइट राइडर्स इस बार सबसे ज्यादा खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है, जबकि मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अपनी पूरी टीम को बरकरार रख सकती है।

स्टार स्पोर्ट्स के साथ बातचीत में पुजारा ने खिलाड़ियों की छुट्टी, कप्तानी में बदलाव और नीलामी से पहले टीमों की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोलकाता नाइट राइडर्स को अपनी टीम में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। टीम के सामने कप्तानी को लेकर भी सवाल है, जिसका असर खिलाड़ियों को बनाए रखने के फैसले पर पड़ सकता है।

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी कैमरन ग्रीन और वेस्टइंडीज के बल्लेबाज निकोलस पूरन को लेकर है। कैमरन ग्रीन को कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल 2026 की नीलामी में 25.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। वहीं, लखनऊ सुपर जायंट्स ने निकोलस पूरन को 21 करोड़ रुपये में अपनी टीम में बरकरार रखा था।

पुजारा का मानना है कि कोलकाता इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद ग्रीन को टीम से बाहर कर सकती है। हालांकि, फ्रेंचाइजी नीलामी में दोबारा उन्हें खरीदने की कोशिश भी कर सकती है। पुजारा ने कहा कि टीम उन्हें रिलीज करने के बाद नीलामी में वापस लेने का विकल्प रख सकती है।

निकोलस पूरन को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। आईपीएल 2026 में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। ऐसे में लखनऊ सुपर जायंट्स उन्हें रिलीज करके नीलामी के लिए अपनी रकम बढ़ा सकती है। हालांकि, पुजारा ने यह भी संभावना जताई कि लखनऊ पूरन को बनाए रखते हुए आयुष बदोनी को बाहर कर सकती है।

चेन्नई सुपर किंग्स में भी मैट हेनरी और मैथ्यू शॉर्ट में से किसी एक को लेकर फैसला हो सकता है। गुजरात टाइटंस में राहुल तेवतिया और शाहरुख खान के बीच किसी एक खिलाड़ी को रिलीज करने की संभावना है। वहीं, पंजाब किंग्स जेवियर बार्टलेट या लॉकी फर्ग्यूसन में से किसी एक को बाहर कर सकती है। सनराइजर्स हैदराबाद में जयदेव उनादकट और हर्षल पटेल के भविष्य पर भी फैसला हो सकता है।

पुजारा ने मुंबई इंडियंस को भी ऐसी टीम बताया है, जो खिलाड़ियों को रिलीज करने के मामले में सबको चौंका सकती है। 5 बार की चैंपियन टीम में बदलाव की चर्चा के बीच हार्दिक पांड्या के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

दूसरी तरफ, पुजारा को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं दिखती। उनका मानना है कि मौजूदा चैंपियन के पास संतुलित टीम है और उसे नीलामी में ज्यादा नए खिलाड़ियों की तलाश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बता दें कि आईपीएल 2027 की छोटी नीलामी 16 दिसंबर को गोवा में आयोजित होनी है। इससे पहले सभी 10 टीमों को 17 नवंबर तक अपने खिलाड़ियों को बनाए रखने और रिलीज करने की सूची सौंपनी होगी। इसके बाद बाहर किए गए खिलाड़ी नीलामी में शामिल होंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में कई बड़े खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

Sun, 08 Nov 2026 19:37:00 +0530

  Videos
See all

Diwali Celebrations | पाकिस्तानी बॉर्डर पर जवानों ने बांटी मिठाई | #diwali #jammukashmir #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-11-08T14:38:56+00:00

8th Pay Commission: 8 बजते ही कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! Salary Hike | Salary Update | DA Hike | #tmktech #vivo #v29pro
2026-11-08T14:30:36+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers