इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के रिपोर्ट कार्ड पर कांग्रेस का पलटवार, चिंटू चौकसे ने लगाए लापरवाही के आरोप
इंदौर नगर निगम परिषद के चार साल पूरे होने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा रिपोर्ट कार्ड जारी किए जाने के बाद शहर कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जवाब दिया। दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने नगर निगम पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनता की समस्याओं की अनदेखी के आरोप लगाए। चौकसे ने महापौर को सार्वजनिक डिबेट की चुनौती भी दी।
दरअसल महापौर के चार साल के कार्यकाल को लेकर कांग्रेस ने दावा किया कि शहर में विकास के बजाय कई मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि नगर निगम में हुए बड़े मामलों में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि कई मामलों में अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया। कांग्रेस ने कहा कि रिपोर्ट कार्ड में जिन उपलब्धियों का जिक्र किया गया है, वे जमीनी हालात से मेल नहीं खातीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि नगर निगम के कामकाज पर खुली चर्चा हो तो वे हर मुद्दे पर तथ्यों के साथ जवाब देने को तैयार हैं।
निगम की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस का निशाना
दरअसल कांग्रेस ने बेलेश्वर बावड़ी हादसे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि घटना के बाद जिस तरह की जवाबदेही तय होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। वहीं पार्टी का कहना है कि निलंबित किए गए कुछ इंजीनियरों को बाद में फिर से अच्छी जिम्मेदारियां दे दी गईं। वहीं भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 लोगों की मौत का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पानी में आखिर ऐसी क्या समस्या थी, जिससे लोगों की जान गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस मामले में भी किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। कांग्रेस ने यह भी कहा कि नगर निगम के चुंगी, स्टैंप ड्यूटी, क्षतिपूर्ति और प्रवेश कर से जुड़े 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि राज्य सरकार पर बकाया है, लेकिन इस मुद्दे पर महापौर सरकार के सामने प्रभावी ढंग से आवाज नहीं उठा सके।
जनसुविधाओं को लेकर भी साधा निशाना
वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निगम के कई अधिकारी मुख्यालय में कम और अन्य कार्यालयों में अधिक समय बिताते हैं, जिससे आम लोगों और पार्षदों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता। कांग्रेस ने ड्रेनेज लाइन और नामांतरण से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया और कहा कि इनकी जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी। पार्टी के अनुसार नामांतरण मामले में कई संपत्तियां कथित तौर पर गलत नामों पर दर्ज हो गईं और उनमें से कुछ की बिक्री भी हो चुकी है। इसके अलावा कांग्रेस ने सराफा क्षेत्र की व्यवस्था, शहर की खराब सड़कें, बरसात में जलभराव, गर्मी के दौरान पेयजल संकट, दूषित पानी, ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रभावित लोगों को मुआवजा नहीं मिलने जैसे मुद्दे भी उठाए। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी मामलों पर नगर निगम को जवाब देना चाहिए और जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए
इस बैंक ने तोड़े KYC से जुड़े नियम, RBI ने उठाया सख्त कदम, लगाया जुर्माना, जानें डिटेल
अगस्त में भी रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) की कार्रवाई जारी है। नियमों का उल्लंघन करने पर आरबीआई ने महाराष्ट्र में स्थित एक बैंक के खिलाफ कदम उठाया है। केदारनाथ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड लातूर पर 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कदम केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया है।
31 मार्च 2025 तक इस बैंक के वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए एक संवैधानिक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान पाया गया कि बैंक दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन नहीं कर रहा है। जिसके बाद एक नोटिस जारी करते हुए आरबीआई ने स्पष्टीकरण मांगा। इस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक प्रस्तुतियों को ध्यान में रखते हुए जब आरोप सही साबित हुए, तब पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंक ने तोड़े ये नियम
बैंक ने निर्धारित समय की सीमा के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड पर को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर अपलोड नहीं किया। इसके अलावा सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क निर्देशों का उल्लंघन भी किया। डिपॉजिट पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों से अधिक इंटरेस्ट ऑफर किया।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
आरबीआई ने अपने नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। सेंट्रल बैंक ने कहा कि, “यह क्रिया विनियामक खामियों पर आधारित है। जिसका उद्देश्य बैंक और ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट की वैधता पर प्रभाव डालना नहीं है। न ही भविष्य में होने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर इसका कोई असर पड़ेगा।”
यहाँ देखें आरबीआई का नोटिसजुलाई में 21 बैंकों पर लगा था जुर्माना
आरबीआई ने जुलाई में देशभर के विभिन्न राज्यों में स्थित अलग-अलग बैंकों के कार्रवाई की थी। 21 बैंकों पर जुर्माना लगाया गया था। बैंक ऑफ बड़ौदा पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं पद्मश्री डॉ. विठलराव विखे पाटिल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। 6 महीने तक इसके लिक्विडिटी स्टेटस पर निगरानी रखी जाएगी।
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