इंदौर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, एमडी ड्रग्स सप्लाई करने वाले फरार आरोपी को किया गिरफ्तार, पढ़ें खबर
इंदौर में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। आए दिन अवैध नशीले पदार्थ जब्त एवं तस्करों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इसी बीच, गुरुवार को इंदौर क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। क्राइम ब्रांच की टीम ने एमडी ड्रग्स तस्करी के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात आरोपी शाहिद उर्फ ‘नाइट्रा’ को गिरफ्तार किया है।
बता दें कि आरोपी पहले से ही 11 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामदगी के एक मामले में वांछित था। गिरफ्तारी के दौरान उसने पुलिस टीम पर झपट्टा मारकर भागने की कोशिश की, लेकिन क्राइम ब्रांच की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर उसे दबोच लिया।
पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को किया गिरफ्तार
इस मामले की जानकारी देते हुए क्राइम ब्रांच पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजेश त्रिपाठी ने बताया कि आरोपी शाहिद उर्फ नाइट्रा खुद भी एमडी ड्रग्स का आदी है और शहर में अवैध रूप से नशीले पदार्थों की सप्लाई करने में सक्रिय रहा है। लगातार उसके खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं। जिसके बाद पुलिस उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुई थी। तभी मुखबिर से मिली सूचना के बाद हमारी टीम सक्रिय हुई और घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
पुलिस के अनुसार, आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में उसके मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा होने के संकेत मिले हैं। आशंका है कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर शहर में एमडी ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क संचालित कर रहा था।
आरोपी से पूछताछ के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों पर भी होगी कार्रवाई
पुलिस आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। रिमांड के दौरान उससे ड्रग्स की सप्लाई चेन, उसके सहयोगियों, मादक पदार्थ के स्रोत तथा शहर में सक्रिय अन्य तस्करों के बारे में गहन पूछताछ की जाएगी। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी कार्रवाई की जाएगी।
CBI का बड़ा एक्शन, अंतरराष्ट्रीय टेक सपोर्ट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़; 4 आरोपी गिरफ्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टेक सपोर्ट फ्रॉड और उगाही (एक्सटॉर्शन) रैकेट का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह पंजाब और दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर और ऑफिस संचालित कर रहा था. CBI ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गिरोह का सरगना भी शामिल है.
जांच के अनुसार, यह संगठित गिरोह मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को अपना शिकार बनाता था. आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट, वित्तीय संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे. इसके लिए वे लोगों के कंप्यूटर स्क्रीन पर फर्जी पॉप-अप संदेश भेजते थे, जिनमें नकली माइक्रोसॉफ्ट टोल-फ्री नंबर दिखाई देते थे. पीड़ित जैसे ही इन नंबरों पर कॉल करते, उनकी कॉल सीधे गिरोह के फर्जी कॉल सेंटर तक पहुंच जाती थी.
इसके बाद आरोपी लोगों को यह कहकर डराते थे कि उनके कंप्यूटर में गंभीर तकनीकी समस्या है और उसे ठीक कराने के नाम पर उनसे पैसे ऐंठते थे. कई मामलों में आरोपियों ने पीड़ितों पर यह झूठा आरोप भी लगाया कि उनके कंप्यूटर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसी गैरकानूनी सामग्री मिली है और वे गंभीर अपराध में फंस सकते हैं. इस डर का फायदा उठाकर उनसे बिटकॉइन एटीएम के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में फिरौती जैसी रकम जमा कराई जाती थी.
CBI के मुताबिक, ठगी से हासिल की गई क्रिप्टोकरेंसी को कई अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए अमेरिका से बाहर ट्रांसफर किया जाता था. बाद में इन पैसों को दिल्ली स्थित ऑपरेटरों की मदद से मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी.
गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं: सौरभ राणा (गिरोह का सरगना), इंदरमोहन सिंह, हरनीत सिंह, जप्पनदीप सिंह
बता दें कि CBI ने 5 और 6 अगस्त 2026 की दरमियानी रात पंजाब और दिल्ली में कुल 10 स्थानों पर छापेमारी की. इनमें मोहाली स्थित मुख्य आरोपी के परिसर में चल रहा फर्जी कॉल सेंटर भी शामिल था.
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने 20 से अधिक मोबाइल फोन, 15 लैपटॉप और टैबलेट, कई हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, बड़ी मात्रा में नकदी, आपत्तिजनक दस्तावेज और क्रिप्टो वॉलेट सहित कई अहम सबूत बरामद किए हैं. मुख्य आरोपी समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. मामले की आगे की जांच जारी है.
इस गिरोह की ठगी का शिकार अमेरिका के कई नागरिक हुए. वर्ष 2022 में फ्लोरिडा की एक महिला को धोखेबाजों ने यह कहकर डराया कि उसकी निजी और बैंकिंग जानकारी चोरी हो चुकी है तथा उसके कंप्यूटर में अवैध सामग्री डाल दी गई है. दबाव में आकर महिला ने कई किस्तों में लगभग 4.40 लाख अमेरिकी डॉलर बिटकॉइन एटीएम के जरिए जमा कर दिए. जांच में पता चला कि यह रकम आरोपियों के नियंत्रण वाले क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंचाई गई.
इसी तरह वर्ष 2023 में न्यू जर्सी की एक अन्य महिला को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया. उसे बताया गया कि उसका कंप्यूटर हैक हो गया है और उसकी बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग किया जा रहा है. डर के माहौल में उसने भी लगभग 1.30 लाख अमेरिकी डॉलर बिटकॉइन एटीएम के माध्यम से जमा कर दिए. CBI अब इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
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