Explainer: अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने कैसे बढ़ाया अपना सियासी दायरा और ग्रामीण इलाकों में बनाई जगह?
US Mid Term Election 2026: अमेरिका के ग्रामीण इलाकों को लंबे समय से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन हाल ही में हुए मध्यावधि चुनावों में तस्वीर बदलती नजर आई. डेमोक्रेटिक पार्टी ने आयोवा, कंसास, टेक्सास और विस्कॉन्सिन जैसे राज्यों के ग्रामीण इलाकों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराकर कई सीटों पर कब्जा कर लिया. इन नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में एक अहम बदलाव का संकेत दिया है.
डेमोक्रेटिक पार्टी की इस सफलता के पीछे सिर्फ ट्रंप सरकार के खिलाफ नाराजगी नहीं थी, बल्कि पार्टी की कई साल की मेहनत, ग्रामीण मतदाताओं से सीधा संपर्क और चुनावी रणनीति में बदलाव भी शामिल था. पार्टी ने उन छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंचने की कोशिश की, जिन्हें पहले चुनावी राजनीति में ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था.
ग्रामीण इलाकों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़ती सक्रियता
अक्टूबर 2025 में आयोवा के वॉरेन काउंटी में डेमोक्रेटिक पार्टी का एक फंड जुटाने वाला कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसमें उम्मीद से कहीं ज्यादा लोग पहुंच गए. हालात ऐसे हो गए कि खाने का सामान खत्म होने पर पार्टी के स्थानीय अध्यक्ष जिम कल्बर्ट को लोगों के लिए पिज्जा मंगवाना पड़ा.
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि अगर खाना कम पड़ रहा है तो यह अच्छी समस्या है. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने संकेत दिया कि ग्रामीण अमेरिका में भी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है.
इसके करीब एक साल बाद हुए मध्यावधि चुनावों में पार्टी को इसका फायदा मिला. ग्रामीण इलाकों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने बेहतर प्रदर्शन किया और कई ऐसी सीटें जीत लीं, जहां पहले रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा था.
ट्रंप की नीतियों से ग्रामीण मतदाताओं में नाराजगी
ग्रामीण इलाकों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के पीछे ट्रंप सरकार की नीतियों से पैदा हुई नाराजगी भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है.
- ट्रंप के वैश्विक टैरिफ अभियान से किसानों और कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा.
- ईरान युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाईं.
- ग्रामीण इलाकों में ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई.
रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के मुताबिक, अक्टूबर में ग्रामीण इलाकों में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 45 प्रतिशत रह गई. उनके कार्यकाल की शुरुआत में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत था.
रॉयटर्स और यूएसए टुडे की ओर से जुटाए गए चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, जिन 1,500 से ज्यादा ग्रामीण काउंटियों में बुधवार तक लगभग सभी वोटों की गिनती हो चुकी थी, वहां रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को मिले वोटों के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत अंक कम वोट मिले.
गांव-गांव जाकर मतदाताओं से मिले डेमोक्रेटिक उम्मीदवार
डेमोक्रेटिक पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया. उम्मीदवारों ने सिर्फ चुनाव के दौरान प्रचार करने के बजाय लंबे समय तक लोगों से संपर्क बनाए रखने की कोशिश की.
आयोवा में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार क्रिस्टीना बोहानन ने लगातार 11 महीने तक हर सप्ताह ग्रामीण इलाकों में प्रचार किया. उन्होंने इस अभियान को 'स्मॉल टाउन ट्यूजडे' नाम दिया था. इस दौरान उनकी टीम छोटे कस्बों में जाकर लोगों से मिलती थी और उनकी समस्याएं सुनती थी.
उनके चुनाव अभियान के मैनेजर डैन ड्रिस्कॉल के मुताबिक, कई लोगों ने बताया कि किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार ने पहले कभी उनसे संपर्क करने की कोशिश नहीं की थी. बोहानन ने आयोवा की पहली कांग्रेसनल सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की.
विस्कॉन्सिन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रेबेका कुक ने भी इसी तरह की रणनीति अपनाई. उन्होंने चार क्षेत्रीय चुनावी आयोजकों की नियुक्ति की और ग्रामीण इलाकों सहित करीब 54 हजार घरों तक पहुंच बनाई. उनकी टीम ने घर-घर जाकर लोगों से बातचीत की.
कुक ने जीत के बाद कहा कि ग्रामीण अमेरिका के कई लोगों को लगता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी उनसे दूर हो गई थी. अब पार्टी के लिए कोई भी समुदाय इतना छोटा नहीं है कि वहां पहुंचने की कोशिश न की जाए.
पहली बार हर राज्य में चुनाव लड़ने पर जोर
डेमोक्रेटिक पार्टी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव यह भी रहा कि उसने कुछ चुनिंदा राज्यों पर ध्यान देने के बजाय पूरे देश में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की.
पहले पार्टी का ज्यादा ध्यान उन छह-सात राज्यों पर रहता था, जहां चुनावी मुकाबला कड़ा होता था. लेकिन इस बार डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी (DNC) ने हर राज्य की पार्टी को संसाधन उपलब्ध कराने और ज्यादा से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारने पर जोर दिया.
इसका मकसद उन इलाकों में भी पार्टी को मजबूत करना था, जहां वह लंबे समय से कमजोर रही थी.
डेमोक्रेटिक रणनीतिकार साइमन रोसेनबर्ग के मुताबिक, पार्टी पहले बहुत सीमित चुनावी क्षेत्रों पर ध्यान दे रही थी. इस बार उसने अपना दायरा बढ़ाया और उन इलाकों में भी काम किया, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था.
चुनावी अभियान में बेहतर तालमेल से मिला फायदा
आयोवा में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने 2018 के बाद पहली बार मिलकर चुनाव अभियान चलाया. इस साझा अभियान से उम्मीदवारों को प्रचार और संगठन से जुड़े खर्च कम करने में मदद मिली.
आयोवा डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से इस अभियान का संचालन करने वाली फ्रांसेस पाटानो के मुताबिक, साझा रणनीति से कार्यकर्ताओं का बेहतर इस्तेमाल हो सका. अलग-अलग उम्मीदवारों को एक ही कार्यकर्ता समूह के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ी.
अक्टूबर के शुरुआती दो सप्ताहांत में राज्यभर में घर-घर जाकर प्रचार करने की कोशिशें 2018 के मध्यावधि चुनावों के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गईं.
वॉरेन काउंटी में भी इस अभियान के तहत एक कर्मचारी की नियुक्ति की गई, जो हर सप्ताहांत छह प्रचार कार्यक्रमों का संचालन करता था. इससे स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ी. स्थानीय पार्टी अध्यक्ष जिम कल्बर्ट के मुताबिक, अब प्रचार करने आने वाले कई चेहरे उनके लिए नए थे.
कंसास में चार साल पहले से शुरू हुई तैयारी
कंसास में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति पर कई साल पहले से काम शुरू कर दिया था. पार्टी ने एडम हैमिल्टन को सीनेटर बनाने के लिए करीब चार साल पहले तैयारी शुरू की थी. हैमिल्टन कंसास से लगभग एक सदी में चुने जाने वाले पहले डेमोक्रेटिक सीनेटर बने.
2022 में जियाना रेपास ने कंसास डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्षता संभाली. उन्हें पता था कि ग्रामीण आबादी वाले इस राज्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए लगातार काम करना होगा. ट्रंप ने 2016 और 2020 के चुनावों में कंसास में बड़ी बढ़त हासिल की थी.
रेपास ने सालभर काम करने वाले एक आयोजक को नियुक्त किया और पार्टी की स्थानीय इकाइयों की संख्या 57 से बढ़ाकर 68 कर दी.
इस साल पार्टी ने 2022 के मध्यावधि चुनावों के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत ज्यादा घरों तक पहुंचने की कोशिश की. खास बात यह रही कि इस अभियान में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए, जो पहले निर्दलीय या रिपब्लिकन समर्थक थे और ट्रंप को वोट दे चुके थे.
इस रणनीति का फायदा एडम हैमिल्टन को मिला. खासतौर पर सेवर्ड काउंटी में उनका प्रदर्शन काफी बेहतर रहा. इस काउंटी की करीब आधी योग्य मतदाता आबादी हिस्पैनिक है. हैमिल्टन ने यहां 13 प्रतिशत अंकों से जीत दर्ज की. जबकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने इसी काउंटी में 39 प्रतिशत अंकों की बढ़त हासिल की थी.
जीत के बाद हैमिल्टन ने कहा कि कंसास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह इलाका अमेरिका का दिल है.
क्या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव तक कायम रहेगी यह बढ़त?
मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह 2028 के राष्ट्रपति चुनाव तक ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी.
हालांकि, इन चुनावों में जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति समर्थन से ज्यादा ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नाराजगी के तौर पर भी देखा जा रहा है. इसके अलावा अर्कांसस, ओक्लाहोमा और नेब्रास्का जैसे ग्रामीण राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है.
अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में भी ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब किसी एक पार्टी को मध्यावधि चुनावों में बड़ी जीत मिली, लेकिन दो साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में वह जीत बरकरार नहीं रह सकी.
डेमोक्रेटिक रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी को अपनी इस सफलता को बनाए रखने के लिए ग्रामीण इलाकों में लगातार काम करना होगा. सिर्फ चुनाव के समय प्रचार करने के बजाय वहां के लोगों से नियमित संपर्क रखना होगा और उनकी समस्याओं को समझना होगा.
कुल मिलाकर, ग्रामीण अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के पीछे ट्रंप सरकार के प्रति नाराजगी के साथ-साथ पार्टी की बदली हुई रणनीति भी अहम रही. उम्मीदवारों का गांवों तक पहुंचना, स्थानीय कार्यकर्ताओं को मजबूत करना और अलग-अलग चुनावी अभियानों में तालमेल बनाना उसके लिए फायदेमंद साबित हुआ. अब यह देखना होगा कि पार्टी इस बदलाव को स्थायी राजनीतिक समर्थन में कितना बदल पाती है.
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