गांव के तरीके से बनाएं नींबू का चटपटा तीखा अचार, सालों साल चलेगा, नहीं होगा खराब
सर्दी की शुरुआत हो चुकी है. सर्दी के सीजन में हरी सब्जियों, सरसों का साग और मक्का-बाजरे की रोटी का स्वाद आत्मा को तृप्त कर देता है. इसी सीजन में अमरूद, आंवला और नींबू भी बाजार में आसानी से मिलने लगते हैं. रसीले, ताजे-पीले नींबू का अचार भी इसी सीजन में रखा जाता है. नींबू का अचार खाने पाचन सुधारता है. इम्युनिटी बढ़ाता है. भूख बढ़ाता है, हड्डियां मजबूत करता है. इसमें मौजूद पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. नींबू का चटपटा अचार कैसे रखते हैं, अचार रखने की सबसे आसान विधि कौन सी है, आइये जानते हैं.....
Diwali 2026: मां Lakshmi और गणेश जी की आराधना 8 नवंबर को, Pradosh Kaal में करें Deepawali पूजन
हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दीपवली का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस तिथि पर भगवान श्रीराम 14 साल का वनवास पूरा करके मां सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या वापस आए थे। श्रीराम के अयोध्या वापस आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। वहीं दिवाली की रात धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि दीपावली पर अमावस्या तिथि और प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनका आशीर्वाद मिलता है और घर में उनका वास होता है। हालांकि इस बार दीपावली की डेट को लेकर लोगों के मन में कंफ्यूजन है। तो आइए जानते हैं दिवाली की डेट, लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में...
इसे भी पढ़ें: Dhanteras पर समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे Lord Dhanvantari
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत 08 नवंबर की सुबह 11:27 मिनट से हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 09 नवंबर 2026 की रात 12:31 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि और प्रदोष काल के आधार पर 08 नवंबर 2026 को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। वहीं इस दिन लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 05: 54 से 07:50 बजे है और प्रदोष काल शाम 05:31 से 08:09 बजे तक है।
पूजन विधि
सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करें और फिर ईशान कोण दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। अब इस पर अक्षत रखें और भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद चौकी के पास तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरकर रखें। कलश के अंदर सुपारी, एक सिक्का, अक्षत और रोली आदि डालें। फिर कलश के मुख पर आम के पत्ते रखकर उस पर दीपक रखें।
अब हाथ में थोड़ा सा जल लेकर अपने ऊपर और सभी पूजन सामग्री के ऊपर छिड़काव करें और इस दौरान 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥' मंत्र का जाप करें। फिर आचमन करने के बाद दाहिने हाथ में फल, अक्षत, फूल और जल लेकर मां लक्ष्मी और श्रीगणेश से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। दिवाली पूजा से पहले प्रथम पूज्य देवता भगवान गणेश की पूजा करें और उनको रोली, अक्षत, दूर्वा, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें।
इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा शुरू करें। मां लक्ष्मी को रोली, कुमकुम का तिलक करें। फिर लाल फूल, कमल, खील, बताशे, मिठाई और फल आदि अर्पित करें। इसके बाद तिजोरी में रखन के लिए पीली कौड़ियों, कुछ सिक्के, कमलगट्टे और गोमती चक्र को मां लक्ष्मी के चरणों में रखें और फिर कुबेर देव की पूजा-अर्चना करें। अब भगवान गणेश की आरती और मां लक्ष्मी की आरती करें और अंजाने में पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें। लक्ष्मी-गणेश की पूजा के बाद घर के सभी जगहों पर दीपक रखें।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
prabhasakshi










