Video: न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ब्लेयर टिकनर ने टीम इंडिया की बल्लेबाजी पर दिया बड़ा बयान
न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ब्लेयर टिकनर का कहना है कि दो साल पहले अपनी पत्नी की कैंसर से लड़ाई को देखने के बाद जिंदगी को लेकर उनका नजरिया बदल गया है और अब वह अपने करियर की शुरुआत में महसूस होने वाले प्रदर्शन के दबाव में दबने के बजाय क्रिकेट का आनंद लेने पर ध्यान देते हैं. टिकनर ने 2019 में टी20 प्रारूप में न्यूजीलैंड के लिए पदार्पण किया था और इसके बाद क्रमशः 2022 और 2023 में वनडे और टेस्ट टीमों में जगह बनाई. अप्रैल 2024 में जब उनकी पत्नी सारा को ल्यूकेमिया का पता चला और उन्हें आठ महीने तक कैंसर का इलाज कराना पड़ा, तब उनके लिए व्यक्तिगत रूप से चीजें काफी मुश्किल हो गई थीं. उन्हें उस साल क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और तब से वह स्वस्थ हैं. टिकनर उस वनडे टीम का हिस्सा हैं जो इस समय भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज खेल रही है. प्रारूप में यह उनका केवल 19वां राष्ट्रीय मैच है. भारत के खिलाफ दूसरे वनडे से पहले 33 वर्षीय तेज गेंदबाज ने कहा, मेरा जीवन, हां, इसमें उतार-चढ़ाव आए हैं. इस सब दौर में सारा और मेरे परिवार का साथ होना अद्भुत है.
मार्च 2028 तक देश में लगेंगे 25 करोड़ स्मार्ट मीटर, रोज लगाने होंगे 2.5 लाख मीटर
भारत को मार्च 2028 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंस्टॉलेशन की रफ्तार में उल्लेखनीय तेजी लानी होगी, और इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए देश को प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित करने होंगे. शुक्रवार को जारी केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2026 तक देशभर में करीब 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जो कुल लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. हालांकि लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए मौजूदा गति की तुलना में कहीं अधिक तेजी की आवश्यकता होगी.
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रतिदिन औसतन लगभग 99,000 स्मार्ट मीटर लगाए गए थे. इस लिहाज से आगामी लक्ष्य हासिल करने के लिए इंस्टॉलेशन की गति को ढाई गुना से अधिक बढ़ाना होगा. रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटरों की स्थापना में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. जहां वित्त वर्ष 2023-24 में 48 लाख मीटर लगाए गए थे, वहीं यह संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1.47 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में 3.63 करोड़ हो गई.
राज्यवार प्रदर्शन की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे आगे है। राज्य में लगभग 1.1 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देश में कुल इंस्टॉलेशन का करीब 17 प्रतिशत है. महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश मिलकर देश में हुए कुल स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. हालांकि विभिन्न राज्यों में प्रगति की गति समान नहीं है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश ने स्वीकृत क्षमता का लगभग 32 प्रतिशत इंस्टॉलेशन किया है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा करीब 52 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन क्षमता और राज्य सरकारों की भूमिका लक्ष्य हासिल करने में बेहद महत्वपूर्ण है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि स्मार्ट मीटरों का पूर्ण पैमाने पर उपयोग वित्त वर्ष 2030-31 तक बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त संचयी राजस्व उत्पन्न कर सकता है. यह लाभ बिलिंग और वसूली दक्षता में सुधार तथा तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों (एटीएंडसी लॉस) में कमी के कारण संभव होगा. बिजली वितरण क्षेत्र में कई प्रमुख संकेतकों में पहले ही सुधार देखने को मिला है. एटीएंडसी नुकसान वित्त वर्ष 2019-20 के 20.73 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 15.04 प्रतिशत पर आ गया है. इसी अवधि में बिलिंग दक्षता लगभग 88 प्रतिशत तक पहुंची है, जबकि संग्रहण दक्षता करीब 97 प्रतिशत दर्ज की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटरों के व्यापक उपयोग से बिलिंग दक्षता बढ़कर 97-98 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. प्रीपेड मॉडल के जरिए संग्रहण दक्षता 99 प्रतिशत से अधिक हो सकती है और AT&C नुकसान घटकर लगभग 12 प्रतिशत तक आ सकता है. हालांकि रिपोर्ट ने यह भी कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को अपनाने की गति अभी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. अप्रैल 2026 तक 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बावजूद केवल लगभग 9 प्रतिशत मीटर ही प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे थे.
केयरएज रेटिंग्स के निदेशक रवलीन सेठी ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिजली वितरण कंपनियां इंस्टॉलेशन को परिचालन सुधार में कितनी प्रभावी तरह बदल पाती हैं. उन्होंने कहा कि सटीक मीटर रीडिंग को बिलिंग और भुगतान प्रणाली से जोड़ना होगा तथा उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए आवश्यक साधन और भरोसा देना होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 89 प्रतिशत बिजली बिल वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 49 प्रतिशत मामलों में स्वचालित रीडिंग प्रणाली का उपयोग हो रहा है.
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