मार्च 2028 तक देश में लगेंगे 25 करोड़ स्मार्ट मीटर, रोज लगाने होंगे 2.5 लाख मीटर
भारत को मार्च 2028 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंस्टॉलेशन की रफ्तार में उल्लेखनीय तेजी लानी होगी, और इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए देश को प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित करने होंगे. शुक्रवार को जारी केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2026 तक देशभर में करीब 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जो कुल लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है. हालांकि लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए मौजूदा गति की तुलना में कहीं अधिक तेजी की आवश्यकता होगी.
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रतिदिन औसतन लगभग 99,000 स्मार्ट मीटर लगाए गए थे. इस लिहाज से आगामी लक्ष्य हासिल करने के लिए इंस्टॉलेशन की गति को ढाई गुना से अधिक बढ़ाना होगा. रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटरों की स्थापना में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. जहां वित्त वर्ष 2023-24 में 48 लाख मीटर लगाए गए थे, वहीं यह संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1.47 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में 3.63 करोड़ हो गई.
राज्यवार प्रदर्शन की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे आगे है। राज्य में लगभग 1.1 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देश में कुल इंस्टॉलेशन का करीब 17 प्रतिशत है. महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश मिलकर देश में हुए कुल स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. हालांकि विभिन्न राज्यों में प्रगति की गति समान नहीं है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश ने स्वीकृत क्षमता का लगभग 32 प्रतिशत इंस्टॉलेशन किया है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा करीब 52 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन क्षमता और राज्य सरकारों की भूमिका लक्ष्य हासिल करने में बेहद महत्वपूर्ण है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि स्मार्ट मीटरों का पूर्ण पैमाने पर उपयोग वित्त वर्ष 2030-31 तक बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त संचयी राजस्व उत्पन्न कर सकता है. यह लाभ बिलिंग और वसूली दक्षता में सुधार तथा तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों (एटीएंडसी लॉस) में कमी के कारण संभव होगा. बिजली वितरण क्षेत्र में कई प्रमुख संकेतकों में पहले ही सुधार देखने को मिला है. एटीएंडसी नुकसान वित्त वर्ष 2019-20 के 20.73 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 15.04 प्रतिशत पर आ गया है. इसी अवधि में बिलिंग दक्षता लगभग 88 प्रतिशत तक पहुंची है, जबकि संग्रहण दक्षता करीब 97 प्रतिशत दर्ज की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटरों के व्यापक उपयोग से बिलिंग दक्षता बढ़कर 97-98 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. प्रीपेड मॉडल के जरिए संग्रहण दक्षता 99 प्रतिशत से अधिक हो सकती है और AT&C नुकसान घटकर लगभग 12 प्रतिशत तक आ सकता है. हालांकि रिपोर्ट ने यह भी कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को अपनाने की गति अभी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. अप्रैल 2026 तक 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बावजूद केवल लगभग 9 प्रतिशत मीटर ही प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे थे.
केयरएज रेटिंग्स के निदेशक रवलीन सेठी ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिजली वितरण कंपनियां इंस्टॉलेशन को परिचालन सुधार में कितनी प्रभावी तरह बदल पाती हैं. उन्होंने कहा कि सटीक मीटर रीडिंग को बिलिंग और भुगतान प्रणाली से जोड़ना होगा तथा उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए आवश्यक साधन और भरोसा देना होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 89 प्रतिशत बिजली बिल वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 49 प्रतिशत मामलों में स्वचालित रीडिंग प्रणाली का उपयोग हो रहा है.
Input: IANS
टेंपल एक फिटनेस ट्रैकर डिवाइस, डॉक्टर के सवाल उठाने पर बोले दीपिंदर गोयल
नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। वियरएबल डिवाइस टेंपल पर डॉक्टरों द्वारा सवाल उठाने पर स्टार्टअप के संस्थापक और इटरनल के पूर्व सीईओ दीपिंदर गोयल ने शुक्रवार को कहा कि यह एक फिटनेस ट्रैकर और वेलनेस डिवाइस है और यूजर्स के लिए प्रोडक्ट उपलब्ध होने पर वैज्ञानिक सत्यापन और स्वतंत्र अध्ययन को साझा किया जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की एक सीरीज में, गोयल ने कहा कि जैसे ही यह डिवाइस ग्राहकों तक पहुंचेगी, वे खुद ही टेंपल के दावों को परख सकेंगे। उन्होंने बताया कि कंपनी ने 14 दिन की रिटर्न पॉलिसी रखी है, जिसमें बिना किसी सवाल-जवाब के डिवाइस को वापस ले लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि टेंपल ने इस वियरेबल डिवाइस को विकसित करने में लगभग 30 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसमें उनकी अपनी लगभग 20 मिलियन डॉलर की पूंजी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में किया गया निवेश और इसके पीछे की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता इस बात को गलत साबित करती है कि यह कोई धोखाधड़ी वाला डिवाइस है।
टेंपल पर ध्यान देने के लिए इटरनल के सीईओ का पद छोड़ने वाले गोयल ने कहा कि उनकी साख इस बात से जुड़ी है कि उत्पाद के पीछे का विज्ञान सटीक हो।
उन्होंने स्वीकार किया कि टेंपल ने अभी तक अपने सभी पैमानों का क्लिनिकल सत्यापन नहीं किया है, और कहा कि जब ऐसा सत्यापन उपलब्ध होगा, तो कंपनी इसकी जानकारी देगी।
गोयल ने कहा, टेम्पल एक फिटनेस ट्रैकर और वेलनेस डिवाइस है। हम कोई मेडिकल डिवाइस नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब यह उत्पाद उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो जाएगा, तब और अधिक वैज्ञानिक सत्यापन और स्वतंत्र अध्ययन सामने आएंगे।
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब डॉक्टरों की ओर से, विशेष रूप से हेपेटोलॉजिस्ट (लिवर विशेषज्ञ) सिरियाक एबी फिलिप्स - जिन्हें ऑनलाइन द लिवर डॉक के नाम से जाना जाता है - के नेतृत्व में, इसकी आलोचना बढ़ रही है।
फिलिप्स ने सार्वजनिक रूप से टेंपल के वैज्ञानिक दावों पर सवाल उठाए हैं, खासकर सुपरफिशियल टेम्पोरल आर्टरी के जरिए मस्तिष्क से जुड़े पैमानों को मापने की उसकी क्षमता पर।
एक्स पर की गई पोस्ट में, फिलिप्स ने आरोप लगाया कि कंपनी ने मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और अन्य जटिल पैमानों से जुड़े अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं दिए हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री और प्री-प्रिंट रिसर्च पेपर, डिवाइस की क्षमताओं को पूरी तरह साबित नहीं करते हैं। उन्होंने कंपनी पर अपने प्रोडक्ट के पीछे के विज्ञान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप भी लगाया।
इस बहस ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है कि स्वास्थ्य से जुड़े दावे करने से पहले, कंज्यूमर वेलनेस डिवाइस (उपभोक्ता स्वास्थ्य उपकरणों) को किस स्तर का वैज्ञानिक प्रमाण देना चाहिए।
गोयल ने कहा कि टेंपल आगे भी अपने वैलिडेशन डेटा प्रकाशित करना जारी रखेगी और कंपनी अपने वैज्ञानिक तरीकों पर कायम है। वहीं, आलोचकों का कहना है कि ऐसे दावों को स्वीकार करने से पहले स्वतंत्र पीयर-रिव्यू (विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा किए गए) सबूत पेश किए जाने चाहिए।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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