अक्टूबर में भारत में ऑटो रिटेल बिक्री 31.72 लाख यूनिट के पार, ईवी बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने अक्टूबर 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने शुक्रवार को कहा कि देशभर में कुल वाहन खुदरा बिक्री 31,72,466 यूनिट रही, जो सितंबर की तुलना में 25.05 प्रतिशत अधिक रही, हालांकि अक्टूबर 2025 के मुकाबले 23.80 प्रतिशत कम दर्ज की गई। फाडा का कहना है कि सालाना आधार पर दिख रही यह गिरावट मुख्य रूप से पिछले वर्ष के असाधारण उच्च आधार प्रभाव का परिणाम है।
अक्टूबर का सबसे बड़ा आकर्षण इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेगमेंट रहा। ईवी खुदरा बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर लगभग 3.55 लाख यूनिट रही, जो एक साल पहले की तुलना में 44.88 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 11.5 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह करीब 6 प्रतिशत थी। दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहन, सभी श्रेणियों में अक्टूबर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ महीना रहा।
फाडा अध्यक्ष साई गिरिधर ने कहा कि अक्टूबर 2025 असाधारण रूप से मजबूत महीना था, क्योंकि उस समय नवरात्रि और दीपावली दोनों एक ही महीने में आए थे। इसके अलावा जीएसटी 2.0 दरों में कटौती के बाद बनी अतिरिक्त मांग का भी लाभ बाजार को मिला था। इसके विपरीत इस वर्ष नवरात्रि अक्टूबर में रही, जबकि धनतेरस और दीपावली नवंबर में चली गईं।
इसी उच्च आधार के कारण दोपहिया वाहनों की बिक्री में 28.35 प्रतिशत और यात्री वाहन बिक्री में 14.23 प्रतिशत की सालाना गिरावट दिखाई दी। हालांकि वाणिज्यिक वाहन बिक्री 2.29 प्रतिशत, तिपहिया वाहन 3.97 प्रतिशत, ट्रैक्टर 3.10 प्रतिशत और निर्माण उपकरण 22.07 प्रतिशत बढ़े।
साई गिरिधर ने कहा कि वास्तविक तस्वीर देखने पर यह अक्टूबर इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा अक्टूबर रहा। वाणिज्यिक वाहन, तिपहिया और ट्रैक्टर श्रेणियों ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ अक्टूबर प्रदर्शन दर्ज किया। सितंबर की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि ही त्योहारी मांग का सही संकेतक है।
दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 23,21,419 यूनिट रही। यह सेगमेंट सबसे अधिक ग्रामीण और त्योहारी मांग पर निर्भर करता है। हालांकि सालाना आधार पर गिरावट दिखी, लेकिन मासिक आधार पर दोपहिया बिक्री 29.67 प्रतिशत बढ़ी। डीलरों के अनुसार, त्योहारी सीजन में ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रही, हालांकि कुछ क्षेत्रों में कम बारिश और कमजोर खरीफ फसल के कारण ग्रामीण मांग पर दबाव देखा गया।
वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। अक्टूबर में इस श्रेणी की बिक्री 1,15,140 यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 2.29 प्रतिशत और सितंबर की तुलना में 11.19 प्रतिशत अधिक है। भारी वाणिज्यिक वाहनों (एचसीवी) की बिक्री 28.95 प्रतिशत और मध्यम वाणिज्यिक वाहनों (एमसीवी) की बिक्री 21.16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि हल्के वाणिज्यिक वाहनों (एलसीवी) में 9.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
यात्री वाहन श्रेणी में 5,07,768 यूनिट की खुदरा बिक्री हुई। यह अक्टूबर 2025 के असाधारण स्तर से 14.23 प्रतिशत कम रही, लेकिन सितंबर के मुकाबले 18.86 प्रतिशत अधिक रही। यह अब तक का तीसरा सर्वश्रेष्ठ अक्टूबर प्रदर्शन है। स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) और नए मॉडलों की लॉन्चिंग ने मांग को मजबूत बनाए रखा, जबकि एंट्री-लेवल कारों की मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही।
फाडा ने यात्री वाहन इन्वेंटरी को लेकर चिंता भी जताई। रिकॉर्ड थोक आपूर्ति के बावजूद डीलरशिप स्तर पर स्टॉक लगभग 43-45 दिनों के बराबर बना हुआ है। संगठन को उम्मीद है कि धनतेरस और दीपावली की बिक्री के बाद वर्ष के अंत तक यह घटकर लगभग 30 दिनों के स्तर पर आ जाएगा।
--आईएएनएस
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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स 358 अंक उछला तो निफ्टी में भी रिकवरी, IT शेयरों में तेजी
पिछले दिनों की लगातार शानदार तेजी के बाद, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई तेज गिरावट के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला. बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,310.01 से 103.65 अंक यानी 0.13 प्रतिशत चढ़कर 79,413.66 पर खुला. हालांकि कुछ ही समय बाद इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 293.95 अंक यानी 0.37 प्रतिशत गिरकर 79,016.05 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया. हालांकि बाद के कारोबार में बाजार ने फिर से रिकवरी की और यह 358.36 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,668.37 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.
वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद भाव 24,536.60 की तुलना में 24,538.20 पर फ्लैट खुला और कुछ ही देर में इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 148.55 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 24,388.05 के दिन के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया. हालांकि बाद के कारोबार में इसने भी रिकवरी की और 108.55 अंक या 0.44 प्रतिशत चढ़कर 24,645.15 के दिन के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया. इस बीच, व्यापक बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
सेक्टोरल आधार पर सबसे ज्यादा दबाव मेटल शेयरों पर देखने को मिला, और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.7 प्रतिशत गिर गया. इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.56 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई. केमिकल, ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में भी 1.34 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली. इसके विपरीत आईटी सेक्टर ने बाजार की धारणा को कुछ हद तक संभाला. निफ्टी आईटी करीब 2 प्रतिशत चढ़ गया। निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम, प्राइवेट बैंक और मीडिया शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई.
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बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बाजारों में आई भारी गिरावट का असर दुनिया के अधिकांश शेयर बाजारों पर दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है. उनका कहना है कि नैस्डैक में 5.6 प्रतिशत की तेज गिरावट डेटा सेंटर निवेश में संभावित मंदी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कारोबार की विकास दर को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण आई. विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तकनीकी शेयरों में आई गिरावट और एआई आधारित निवेश थीम की रफ्तार कम होने का भारतीय बाजार को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अन्य उभरते बाजारों की ओर बढ़ सकती है.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक बना हुआ है. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने 35,781 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं. गुरुवार को उन्होंने लगातार पांचवें सत्र में 14,974 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की. दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और गुरुवार को उन्होंने 10,444 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में जारी हालिया तेजी को मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों का समर्थन मिला है. खासकर लार्जकैप शेयरों में आकर्षक मूल्यांकन के कारण निवेशकों की खरीदारी बढ़ी है, जिससे बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है.
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 91.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया. विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में वैश्विक बाजारों की अस्थिरता, कच्चे तेल की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और एफआईआई की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक कारक बने हुए हैं.
INPUT: IANS
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