मध्य प्रदेश के व्यक्ति को दुबई से एयर एम्बुलेंस के जरिए वापस लाया गया, दिल्ली एम्स में भर्ती
भोपाल, 6 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के व्यक्ति को दुबई से एयर एम्बुलेंस के जरिए भारत वापस लाया गया है। अनूपपुर जिले के रहने वाले ज्ञानेंद्र तिवारी को 15 अक्टूबर को कार्डियक अरेस्ट आने के बाद दुबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय तक कोमा में रहे।
विदेश में लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के कारण, तिवारी का परिवार उनकी हालत को लेकर चिंतित था और उन्हें आगे के इलाज के लिए भारत वापस लाने के इंतजामों को लेकर परेशान था। कई हफ्तों की अनिश्चितता के बाद, तिवारी को एयर एम्बुलेंस से भारत लाया गया और दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
गुरुवार देर रात मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनकी वापसी के लिए पहल की और जरूरी समन्वय के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से संपर्क किया। बयान में कहा गया, मुख्यमंत्री की पहल पर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ जरूरी समन्वय किया गया।
इसमें बताया गया कि उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह ने भी तिवारी की सुरक्षित वापसी और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए। बयान के अनुसार, सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर किए गए संयुक्त प्रयासों के बाद तिवारी को दुबई से एयर एम्बुलेंस के जरिए लाने के इंतजाम किए गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया।
ज्ञानेंद्र की वापसी से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। परिवार उनकी सेहत को लेकर चिंतित था और दूसरे देश से एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को वापस लाने में आने वाली मुश्किलों के कारण उनके भारत पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
तिवारी के रिश्तेदार देवेंद्र तिवारी ने बताया कि परिवार उनकी वापसी को लेकर काफी चिंतित था। उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने में मदद की। उन्होंने परिवार की ओर से केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के साथ-साथ उन अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में मदद की।
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क्या Home Loan पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज वापस मिलते हैं? जानिए इसमें कितना खर्च आएगा
Stamp Duty On Home Loan: क्या होम लोन पर स्टाम्प ड्यूटी दी जा सकती है? इसका आसान जवाब है आम तौर पर नहीं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों को होम लोन के लोन-टू-वैल्यू (LTV) कैलकुलेशन में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज शामिल न करने का निर्देश दिया है. बैंक ये चार्ज केवल ₹10 लाख तक की प्रॉपर्टी के लिए ही शामिल कर सकते हैं. LTV का मतलब है घर की वैल्यू का वह परसेंटेज जो बैंक लोन के तौर पर देगा. ज्यादातर खरीदारों के लिए स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन डाउन पेमेंट के ऊपर अपनी जेब से देना होता है. यही वह जगह है जहाँ पहली बार घर खरीदने वाले लोग चूक जाते हैं. ज्यादातर लोग डाउन पेमेंट ध्यान से कैलकुलेट करते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन के समय अलग से बिल देखकर अक्सर चौंक जाते हैं. स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज मिलाकर आम तौर पर प्रॉपर्टी की कीमत का 6% से 9% होता है, जो राज्य पर निर्भर करता है. यह एक बड़ा खर्च है, इसलिए इसके लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है.
स्टाम्प ड्यूटी क्या है?
स्टाम्प ड्यूटी एक राज्य सरकार का टैक्स है जो सेल डीड पर तब लगाया जाता है जब प्रॉपर्टी आपके नाम पर ट्रांसफर होती है. इसे प्रॉपर्टी की वैल्यू के परसेंटेज के तौर पर कैलकुलेट किया जाता है. यह आम तौर पर ओरिजिनल ट्रांजैक्शन प्राइस और सरकार के सर्कल रेट (जिसे रेडी रेकनर रेट भी कहते हैं) में से जो ज्यादा हो, उसे लेता है. सर्कल रेट उस एरिया में जमीन और प्रॉपर्टी के लिए सरकार द्वारा तय की गई मिनिमम प्राइस है. स्टाम्प ड्यूटी पे किए बिना और डीड रजिस्टर किए बिना आपकी ओनरशिप लीगली वैलिड नहीं होती है.
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रजिस्ट्रेशन चार्ज क्या है?
रजिस्ट्रेशन चार्ज एक अलग सरकारी फीस है जो सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस में ट्रांजैक्शन को ऑफिशियली रजिस्टर करने के लिए दी जाती है. यह आम तौर पर प्रॉपर्टी वैल्यू का लगभग 1% से 2% होता है, कुछ राज्य मैक्सिमम लिमिट भी लगाते हैं. स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन दोनों राज्य सरकार को जाते हैं, आपके बैंक को नहीं और प्रॉपर्टी खरीदने के लिए जरूरी हैं. बिना स्टाम्प वाली या अनरजिस्टर्ड डीड को झगड़ों, रीसेल या बाद के लोन एप्लीकेशन में ओनरशिप का वैलिड प्रूफ नहीं माना जाता है.
₹10 लाख तक की प्रॉपर्टी के लिए छूट
एक एक्सेप्शन है. ₹10 लाख तक की कीमत वाली प्रॉपर्टी के लिए, RBI ने बैंकों को घर की कीमत में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और दूसरे डॉक्यूमेंटेशन खर्च जोड़कर LTV कैलकुलेट करने की इजाजत दी है. यह छूट खास तौर पर समाज के कम इनकम वाले और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के छोटे घरों पर शुरुआती बोझ कम करने के लिए बनाई गई है. इस लिमिट से ज्यादाा कीमत वाले घरों के लिए, आम नियम लागू होता है, और इन खर्चों को लोन से बाहर रखा जाता है.
शुरुआती कुल कितना कैश चाहिए?
घर खरीदते समय आपके पास इतना कैश तैयार होना चाहिए: डाउन पेमेंट (घर की कीमत और मंज़ूर लोन अमाउंट के बीच का अंतर) + स्टाम्प ड्यूटी + रजिस्ट्रेशन चार्ज + दूसरे डॉक्यूमेंटेशन खर्च. सिर्फ डाउन पेमेंट कैलकुलेट करना काफी नहीं है.
उदाहरण: ₹40 लाख का घर
यह उदाहरण केवल दिखाने के लिए है और यह मानता है कि स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज मिलाकर लगभग 7% है. प्रॉपर्टी की कीमत ₹40 लाख है. स्टाम्प ड्यूटी और 7% रजिस्ट्रेशन मिलाकर लगभग ₹2.80 लाख होते हैं. अगर बैंक 80% LTV पर लोन देता है, जो RBI के ₹30 लाख से ₹75 लाख के स्लैब में आता है, तो लोन की रकम लगभग ₹32 लाख होगी. डाउन पेमेंट लगभग ₹8 लाख होगा. इसका मतलब है कि शुरू में जरूरी कुल कैश लगभग ₹8 लाख + ₹2.80 लाख = ₹10.80 लाख है. ध्यान दें कि स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च डाउन पेमेंट में लगभग एक तिहाई जुड़ जाता है.
बजट कैसे बनाएं? 6 आसान स्टेप्स
1. अपने राज्य और शहर में मौजूदा स्टाम्प ड्यूटी रेट चेक करें. कई राज्यों में महिला खरीदारों के लिए कम रेट हैं.
2. रजिस्ट्रेशन चार्ज रेट और उसकी ज्यादा से ज्यादा लिमिट चेक करें.
3. चेक करें कि क्या आपका शहर कोई एक्स्ट्रा लोकल लेवी लगाता है जैसे मेट्रो सेस या लोकल बॉडी टैक्स.
4. ओरिजिनल डील प्राइस और सर्कल रेट में से जो ज्यादा हो, उसके आधार पर कैलकुलेट करें.
5. इस रकम को डाउन पेमेंट में जोड़ें, लोन में नहीं.
6. यह रकम अलग रख लें और डील फाइनल करने से पहले इसे तैयार रखें, क्योंकि सेल एग्रीमेंट के बाद तय समय के अंदर रजिस्ट्रेशन जरूरी है.
कितना टैक्स डिडक्शन मिलता है?
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने पर दी गई स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक का डिडक्शन मिलता है. यह डिडक्शन आम तौर पर उसी फाइनेंशियल ईयर में मिलता है जिसमें पेमेंट किया जाता है. यह सेक्शन 80C के तहत ओवरऑल लिमिट में आता है, जिसमें दूसरे इन्वेस्टमेंट और खर्चे भी शामिल हैं. टैक्स के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए अपने टैक्स एडवाइजर से इसकी पुष्टि जरूर कर लें.
इन गलतियों से बचें:
- केवल डाउन पेमेंट के लिए बजट बनाना और रजिस्ट्रेशन के समय स्टाम्प ड्यूटी बिल देखकर परेशान होना.
- यह मान लेना कि लोन ₹10 लाख से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर भी इन खर्चों को कवर कर लेगा.
- केवल बेस स्टाम्प ड्यूटी को देखना और मेट्रो सेस या लोकल बॉडी टैक्स जैसे लोकल चार्ज को नजरअंदाज करना, जिससे 1% से 2% और जुड़ सकता है.
- सिर्फ एग्रीमेंट वैल्यू के आधार पर खर्च का अनुमान लगाना, जबकि बढ़ते मार्केट में सर्कल रेट ज्यादा हो सकता है.
- रजिस्ट्रेशन की समय सीमा चूक जाना, क्योंकि देरी पर जुर्माना लग सकता है या दोबारा भुगतान करना पड़ सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी सिर्फ सूचना के लिए है, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं है. घर खरीदने से पहले अपने वित्तीय और कानूनी सलाहकार से जरूर बात करें.
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