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Breaking News Today Live Updates: देशभर में आज शुक्रवार को धनतेरस का त्योहार उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. बाजारों में खरीदारी को लेकर रौनक देखने को मिलेगी. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के दौरे पर पहुंचेंगे. पीएम मोदी 21 नवंबर को वैशाली जाएंगे. उनके दौरे से पहले 20 नवंबर को बिहार की एनडीए सरकार के एक साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
वहीं, जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कैबिनेट फेरबदल के बाद हलचल तेज हो गई है. मंत्रिमंडल में हुए बदलाव से नाराज कई विधायक आज नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी शिकायतें रख सकते हैं. दूसरी ओर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर अहम निर्देश दिया है. अदालत ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि वह अपने पूर्व निर्देश का पालन करते हुए विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध सभी महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया 75 दिनों के भीतर पूरी कराए. देश और दुनिया की राजनीति, त्योहारों, अदालतों और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर के लिए इस लाइव ब्लॉग पर बने रहें. यहां आपको दिनभर के सभी अहम अपडेट मिलते रहेंगे.
नेतन्याहू की सत्ता से विदाई तय? इजरायल में आइसेनकोट के पास पहुंचा बहुमत
इजरायल में पिछले एक सप्ताह से जारी राजनीतिक खींचतान के बीच नई सरकार के गठन की तस्वीर साफ होती नजर आ रही है. गुरुवार देर शाम अरब दलों के गठबंधन ज्वाइंट लिस्ट ने मध्यमार्गी गठबंधन के नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति आइजक हरजोग से मुलाकात कर उन्हें समर्थन से जुड़ा पत्र भी सौंप दिया.
इस समर्थन के बाद आइसेनकोट के पक्ष में सांसदों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है. इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नीसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. ऐसे में आइसेनकोट बहुमत के आंकड़े से छह सीट आगे निकल गए हैं.
अरब दलों के समर्थन से मजबूत हुई आइसेनकोट की दावेदारी
आइसेनकोट को आठ सांसदों वाली अरब पार्टी राएम का समर्थन पहले ही मिल चुका था. अब 11 सांसदों वाले ज्वाइंट लिस्ट गठबंधन के समर्थन ने उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है. हालांकि, चुनाव में आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें ही मिली थीं. सरकार बनाने के लिए उन्हें दूसरे दलों का साथ लेना जरूरी था.
नेतन्याहू बहुमत जुटाने में रहे नाकाम
इजरायल में करीब 19 साल तक सत्ता में रहने वाले बेंजामिन नेतन्याहू इस बार सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाए. 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में उनके नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली थीं, लेकिन अन्य दलों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. इस बीच गुरुवार को उनके गठबंधन में शामिल यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (यूटीजेड) ने अलग होने का फैसला कर लिया. इस पार्टी के सात सांसद हैं. उसके अलग होने के बाद नेतन्याहू के गठबंधन की ताकत घटकर 46 सांसदों तक रह गई है. यूटीजेड ने फिलहाल संसद में अलग बैठने का निर्णय लिया है.
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नई सरकार के लिए तय की गईं नीतिगत शर्तें
समर्थन देने से पहले ज्वाइंट लिस्ट के नेताओं ने गादी आइसेनकोट के साथ बैठक की और नई सरकार की नीतियों पर चर्चा की.इस दौरान कुछ अहम शर्तों पर सहमति बनी. आइसेनकोट की शर्तों के मुताबिक, इजरायल को यहूदी राष्ट्र के रूप में बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक तरीके से शासन चलाया जाएगा. हमास को आतंकी संगठन मानते हुए उसकी सैन्य ताकत खत्म करने की नीति अपनाई जाएगी. इसके अलावा सेना में सभी वर्गों की भर्ती से जुड़े नियमों में बदलाव करने और देश की स्थापना के समय नागरिकों के अधिकारों के लिए तय की गई आचार संहिता का पालन करने पर भी सहमति बनी.
ज्वाइंट लिस्ट में शामिल हैं तीन अरब पार्टियां
इन मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ज्वाइंट लिस्ट के नेता राष्ट्रपति आइजक हरजोग से मिले और आइसेनकोट के समर्थन का औपचारिक पत्र सौंपा. ज्वाइंट लिस्ट में हदाश, ताल और बलद नाम की तीन अरब पार्टियां शामिल हैं. वहीं, राएम ने गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ा था. इस घटनाक्रम के बाद इजरायल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की संभावनाएं कमजोर हुई हैं, जबकि आइसेनकोट के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता मजबूत हुआ है.
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