ट्रंप ने ईरान पर हमलों को तेल की कीमतों में कमी से जोड़ा
वॉशिंगटन, 12 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने केंटकी में अपने समर्थकों से कहा कि आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार की समन्वित रिलीज़ और तेहरान पर लगातार दबाव बनाए रखने से ऊर्जा बाज़ार स्थिर हो जाएंगे।
केंटकी के हेब्रोन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान का बचाव किया और कहा कि वॉशिंगटन अपने उद्देश्यों की प्राप्ति तक अभियान जारी रखेगा।
ट्रंप ने कहा, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए अमेरिका ईरान के आतंकी शासन से उत्पन्न खतरे को रोकने के लिए निर्णायक कार्रवाई कर रहा है और दावा किया कि यह अभियान सफल रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगभग ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की वायुसेना “खत्म हो चुकी है, पूरी तरह खत्म”, और देश के पास अब कोई काम करने वाला रडार या एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण नहीं बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता “90 प्रतिशत कम हो गई है” और उसके ड्रोन “85 प्रतिशत तक नष्ट हो चुके हैं।”
उन्होंने कहा, “हम उन फैक्ट्रियों को लगातार उड़ा रहे हैं जहां ये बनाए जाते हैं और सच कहूं तो किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा।”
राष्ट्रपति ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ पहले की अमेरिकी कार्रवाइयों का भी जिक्र किया और कहा कि सेना ने “ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।”
ट्रंप ने तर्क दिया कि भविष्य के खतरों को रोकने के लिए यह अभियान जरूरी है और जोर देकर कहा कि अमेरिका समय से पहले पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा, “जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता, हम यहां से नहीं जाएंगे।” सैन्य दावों के साथ-साथ ट्रंप ने कहा कि संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित व्यवधान को रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने भीड़ को बताया कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने उसी दिन पहले सहमति जताई है कि दुनियाभर के विभिन्न राष्ट्रीय पेट्रोलियम भंडारों से “रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल” जारी करने के लिए समन्वय किया जाएगा।
ट्रंप के मुताबिक रणनीतिक तेल भंडार जारी करने से “तेल की कीमतों में काफी कमी आएगी।”
ट्रंप ने ईरानी नौसैनिक संपत्तियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने उन जहाजों को निशाना बनाया जो समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने में शामिल थे।
उन्होंने कहा, हमने 58 नौसैनिक जहाजों को निष्क्रिय कर दिया और यह भी जोड़ा कि अमेरिका ने क्षेत्रीय जल में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले “31 जहाजों को नष्ट कर दिया।”
ट्रंप ने कहा कि अभियान तेजी से आगे बढ़ा है और दावा किया कि कम समय में ही ईरान की सैन्य संरचना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने कहा, “जो आप अभी देख रहे हैं, वैसा पहले कभी किसी ने नहीं देखा।” संघर्ष के बावजूद अमेरिका ऊर्जा आपूर्ति को जारी रखने के लिए भी काम कर रहा है।
ट्रंप ने कहा, “हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि तेल की आपूर्ति जारी रहे,” और दोहराया कि सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उसके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
--आईएएनएस
पीएम
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लेबनान में शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए भारत ने 29 अन्य देशों के साथ मिलकर की सुरक्षा की मांग
संयुक्त राष्ट्र, 12 मार्च (आईएएनएस)। ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए हालात में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव तेज हो गया है। इसी बीच भारत ने लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
भारत और 29 अन्य देशों ने बुधवार (स्थानीय समय) को एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सभी पक्ष हर परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईफिल) के सैनिकों और उनके ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना चाहिए।
बयान में कहा गया कि शांति सैनिकों को किसी भी तरह के हमले या डराने-धमकाने को लेकर निशाना कभी नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही यूएनआईफिल के शांति सैनिकों के साहस, पेशेवर काम और अपने दायित्व को निभाने की प्रतिबद्धता की सराहना भी की गई।
यूएनआईफिल में कुल 7,438 सैनिक तैनात हैं, जिनमें 642 भारतीय शांति सैनिक शामिल हैं। इस तरह भारतीय सैनिकों की टुकड़ी यहां दूसरी सबसे बड़ी टुकड़ी है।
यह शांति मिशन वर्ष 1978 में बनाया गया था। इसका मुख्य काम वहां संघर्ष विराम की निगरानी करना और लेबनान सरकार को दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करने में मदद करना है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश की मौजूदगी में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले यह संयुक्त बयान पढ़कर सुनाया। इस बैठक में लेबनान की स्थिति पर चर्चा की गई।
यूएनआईफिल के अनुसार, पिछले सप्ताह दक्षिणी लेबनान में स्थित एक ठिकाने पर भारी गोलीबारी के दौरान घाना के तीन शांति सैनिक घायल हो गए थे।
इस हमले की निंदा करते हुए बयान में कहा गया कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है और अभी तक किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
बयान में हिज़्बुल्लाह की भी कड़ी आलोचना की गई और कहा गया कि इज़राइल के खिलाफ ईरान के हमलों में शामिल होने का उसका फैसला बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। इससे लेबनान को ऐसे युद्ध में घसीटा गया, जिसे न तो वहां की सरकार चाहती थी और न ही वहां की जनता।
इज़राइल के बारे में भी बयान में कहा गया कि उसे नागरिक ढांचे और घनी आबादी वाले इलाकों पर हमले से बचना चाहिए और लेबनान की संप्रभुता तथा उसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।
बयान में यह भी कहा गया कि सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए और नागरिकों तथा नागरिक ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव जीन-पियरे लैक्रोइक्स ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यूएनआईफिल इस समय बेहद खतरनाक और अस्थिर माहौल में अपना काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि 1 मार्च से अब तक यूएनआईफिल ने ब्लू लाइन के दोनों ओर से 4,120 हमलों या मिसाइलों की आवाजाही दर्ज की है। ब्लू लाइन वह सीमा है जो इजरायल और लेबनान को अलग करती है।
उन्होंने बताया कि हिजबुल्लाह रोज़ाना ब्लू लाइन के पार इजरायल और सीरिया के कब्जे वाले गोलान इलाके में रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, यूएनआईफिल ने यह भी देखा है कि इजरायल की रक्षा बलों की इकाइयों ने कई जगहों पर लेबनान की सीमा में घुसपैठ की है। साथ ही इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के बीच सीधी झड़प भी हुई हैं।
--आईएएनएस
एएस/
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