भास्कर अपडेट्स:दिल्ली में उत्तम नगर की मछली मंडी के पास आग लगी, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं
दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में मछली मंडी के पास बुधवार देर रात को भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम कर रही हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। राहत और बचाव कार्य जारी है और अभी किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली है। मामले में अधिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। आज की अन्य बड़ी खबरें… जेएनयू वीसी के खिलाफ जनमत, 90% छात्र इस्तीफे के पक्ष में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के रेफरेंडम में 90% छात्रों ने कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। छात्र संघ के अनुसार 2,409 छात्रों ने मतदान किया, जिनमें 2,181 (90.54%) ने वीसी के पद पर बने रहने का विरोध किया। वहीं 207 छात्रों (8.59%) ने उनके पक्ष में वोट दिया। जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि रेफरेंडम वीसी की कथित जातिवादी टिप्पणियों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कराया गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। चारधाम में दिन में सिर्फ दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु , पूजा-अनुष्ठान पर रोक 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। अब दिन में श्रद्धालु पूजा-अनुष्ठान नहीं कर सकेंगे। गर्भगृह में गंगा जल, फूल-फल भी नहीं चढ़ा सकेंगे। केवल दर्शन कर बाहर आना होगा। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर में विशेष पूजा-अनुष्ठान दोपहर के समय नहीं होंगी। ये रात 11 से तड़के 4 बजे के बीच कराई जाएंगी। ₹20 हजार करोड़ के गेन बिटकॉइन करेंसी घोटाले में घोटाले में डार्विन लैब्स के को फाउंडर गिरफ्तार सीबीआई ने बुधवार को 20 हजार करोड़ रुपए के गेन बिटकॉइन करेंसी घोटाले में डार्विन लैब्स के को फाउंडर आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार किया है। इसी कंपनी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से गेन बिटकॉइन धोखाधड़ी की गई। इसमें वाओमी एआई के सीओओ निकुंज जैन और साहिल बाघला की भी भूमिका सामने आई है। तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली के 23वें उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को दिल्ली के 23वें उपराज्यपाल (एलजी) के रूप में पदभार संभाला। उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने लोक निवास में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। संधू ने विनय कुमार सक्सेना का स्थान लिया है, जिन्हें अब लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी रहे हैं। वे 2020 से जनवरी 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में सेवा दे चुके हैं। राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वे मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे और अमृतसर से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। संधू के शपथ ग्रहण समारोह में सीएम रेखा गुप्ता अपने मंत्रिमंडल के साथ शामिल हुईं। संधू के पदभार ग्रहण करने पर उन्होंने मंत्रिमंडल के साथ उन्हें बधाई दी। तेलंगाना- कविता की भूख हड़ताल में बेटे आदित्य भी शामिल, वेलुगुमटला के पीड़ितों को घर के लिए जगह देने की मांग तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के कविता वेलुगुमटला के पीड़ितों को घर की जगह देने की मांग को लेकर तीन दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं। उनके समर्थन में बुधवार को उनके बेटे आदित्य कलवकुंतला भी हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित पार्टी ऑफिस में प्रदर्शन में शामिल हुए। आदित्य हाल ही में अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे हैं और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी मां के साथ सक्रिय रूप से नजर आए हैं। पार्टी नेताओं और समर्थकों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर सरकार से मांग की है कि वेलुगुमटला के प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द घर की जगह उपलब्ध कराई जाए।
आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू करने की तैयारी:अप्रैल के आखिरी हफ्ते से मिलेंगे परमिट; पिछले साल 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू करने की तैयारी है। मौसम अनुकूल रहा तो प्रशासन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से इनर लाइन परमिट जारी कर सकता है। पिछले साल यहां 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे, ऐसे में इस बार और बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद है। आदि कैलाश पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की व्यास घाटी में स्थित है। नवंबर से मार्च तक यहां भारी बर्फबारी के कारण आवागमन बंद रहता है। सुरक्षा कारणों के चलते व्यास घाटी में छियालेख से आगे जाने के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है, जिसे तहसील प्रशासन जारी करता है। पिथौरागढ़ के डीएम आशीष भटगांई ने बताया, यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जल्द ही आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी। परमिट के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों सुविधा आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट धारचूला स्थित एसडीएम कार्यालय से ऑफलाइन लिया जा सकता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी होते हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी सुविधा है। पिछले पांच साल में तेजी से बढ़े श्रद्धालु आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस धार्मिक स्थल को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिली। इसके बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2023 में पीएम मोदी ने की थी आदि कैलाश यात्रा साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड दौरे के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र का भ्रमण किया था। तब उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और पार्वती कुंड में पूजा-अर्चना की, साथ ही कुमाऊं के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में भी दर्शन किए थे। यात्रा के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा था, यदि कोई मुझसे पूछे कि उत्तराखंड में एक जगह जरूर देखनी चाहिए तो मैं कहूंगा कि कुमाऊं क्षेत्र में पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर अवश्य जाएं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और दिव्यता आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। अब 5 पॉइंट्स में आदि कैलाश के बारे में जानिए… 1. भारत में स्थित ‘छोटा कैलाश’ आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित है। इसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विवाह के बाद भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश जाते समय यहां कुछ समय तक रुके थे और अपने पुत्रों कार्तिकेय व गणेश के साथ यहीं निवास किया था। 2. पार्वती सरोवर, गौरी कुंड और शिव-पार्वती मंदिर आदि कैलाश पर्वत के नीचे गौरी कुंड और सामने की पहाड़ी पर पार्वती सरोवर स्थित है, जहां से पर्वत के भव्य दर्शन होते हैं। पार्वती सरोवर के किनारे शिव-पार्वती मंदिर और ध्यान स्थल बने हैं। करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर 1971 में कुटी गांव के लोगों ने बनवाया था। 3. जोलिंगकोंग से होते हैं आदि कैलाश के दर्शन धारचूला से करीब 70 किमी दूर गुंजी (3200 मीटर) और वहां से लगभग 25 किमी आगे जोलिंगकोंग (4400 मीटर) स्थित है। यहीं से आदि कैलाश के सबसे भव्य दर्शन होते हैं। जोलिंगकोंग से करीब 2 किमी दूर पार्वती सरोवर और लगभग 2–3 किमी दूर गौरी कुंड झील स्थित है। 4. ओम पर्वत और लिपुलेख मार्ग का महत्व गुंजी से लिपुलेख पास की ओर जाते समय नाभीढांग से 6191 मीटर ऊंचे ओम पर्वत के दर्शन होते हैं, जिसके शिखर पर बर्फ से ‘ॐ’ की आकृति दिखाई देती है। इसी मार्ग से कैलाश मानसरोवर के यात्री भी लिपुलेख पास के जरिए तिब्बत की ओर जाते हैं। 5. सीमावर्ती क्षेत्र, परमिट और यात्रा मार्ग आदि कैलाश सीमावर्ती और ऊंचाई वाला क्षेत्र है, इसलिए यहां जाने के लिए इनर लाइन परमिट, मेडिकल जांच और पुलिस सत्यापन जरूरी होता है। यात्रा के लिए हल्द्वानी, काठगोदाम या टनकपुर से पिथौरागढ़ होते हुए धारचूला पहुंचना पड़ता है। टनकपुर से धारचूला करीब 240 किमी और हल्द्वानी से करीब 280 किमी दूर है, यहां से आगे स्थानीय वाहनों से यात्रा की जाती है। आदि कैलाश और कैलाश पर्वत में अंतर भी समझिए… आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भारत की सीमा के भीतर स्थित है, इसलिए यहां की यात्रा अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है। इसके लिए केवल इनर लाइन परमिट, मेडिकल जांच और स्थानीय प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है। सड़क बनने के बाद अब श्रद्धालु धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग तक वाहनों से पहुंचकर पार्वती सरोवर और गौरी कुंड के साथ आदि कैलाश के दर्शन कर सकते हैं। वहीं, कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) में स्थित है और उसके पास पवित्र मानसरोवर झील है। वहां की यात्रा अंतरराष्ट्रीय होने के कारण पासपोर्ट-वीजा और भारत सरकार की आधिकारिक प्रक्रिया से होकर गुजरती है। यह यात्रा अधिक कठिन मानी जाती है, जिसमें ऊंचाई वाले इलाके में ट्रेकिंग और कैलाश पर्वत की परिक्रमा करनी पड़ती है। धार्मिक दृष्टि से कैलाश पर्वत को भगवान शिव का मुख्य धाम माना जाता है, जबकि आदि कैलाश को उसका प्रतीकात्मक स्वरूप या ‘छोटा कैलाश’ कहा जाता है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें : कैलाश मानसरोवर का पुराना पैदल मार्ग हो रहा विलुप्त: यात्री विश्राम के लिए बनी धर्मशालाएं खंडहर; एक्सपर्ट बोले- धरोहर का हो संरक्षण कैलाश मानसरोवर यात्रा का 400 किलोमीटर लंबा मार्ग, जिस पर कभी भक्तों के कदमों की आहट और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते थे, अब सिमटता जा रहा है। यह मार्ग कहीं सड़क निर्माण में कट गया तो कहीं जंगलों में गुम हो गया है। यात्रियों और व्यापारियों के ठहरने के लिए बनी करीब 500 धर्मशालाएं भी खंडहर में बदल रही हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
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