बुक रिव्यू- एक शानदार एपिक करियर कैसे बनाएं:सबसे जरूरी है जानना अपना पैशन और पर्पज, इसी से बनेगा ग्रोथ माइंडसेट, आएगा डिसिप्लिन
किताब- बनाएं एक शानदार करियर (बेस्टसेलर किताब 'बिल्ड एन एपिक करियर' का हिंदी अनुवाद) लेखक- अंकुर वारिकू प्रकाशक- पेंगुइन मूल्य- 299 रुपए ‘बनाएं एक शानदार करियर’ मशहूर आंत्रप्रेन्योर, कंटेंट क्रिएटर और लेखक अंकुर वारिकू की लेटेस्ट बुक है। ये किताब करियर को लेकर कन्फ्यूज युवाओं के लिए एक प्रैक्टिकल गाइड है। मौजूदा समय में ट्रेडिशनल और नॉन-ट्रेडिशनल फील्ड में करियर के हजारों ऑप्शन्स हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग कन्फ्यूजन में गलत रास्ते चुन लेते हैं। वजह ये होती है कि लोग दूसरों की सक्सेस स्टोरी कॉपी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अपना विजन नहीं बनाते। नतीजतन उन्हें करियर में वो खुशी और सफलता नहीं मिलती, जो वह डिजर्व करते हैं। अंकुर वारिकू ने इस किताब में अपनी जिंदगी के रियल एक्सपीरियंस शेयर किए हैं और बताया है कि अपना पैशन कैसे पहचानें। उन्होंने किताब में बताया है कि सक्सेस माइंडसेट कैसे बनाएं, अच्छी आदतें कैसे डेवलप करें और खुद को कैसे पहचानें। यह ट्रेडिशनल सेल्फ-हेल्प बुक नहीं, बल्कि एक एक्शन-ओरिएंटेड किताब है। किताब क्या कहती है? इस किताब में करियर को बोझ नहीं, बल्कि एक रोमांचक यात्रा की तरह बताया गया है। इसके मुख्य पॉइंट्स ये हैं- पैशन बनाम पर्पज (उद्देश्य)- वारिकू कहते हैं कि करियर चुनने से पहले खुद से पूछें- "कौन सा काम मुझे ऊर्जा से भर देता है?" यह किताब आपको अपना असली हुनर पहचानने में मदद करती है। ग्रोथ माइंडसेट- लेखक अपनी असफलताओं को साझा करते हुए बताते हैं कि हार से डरना नहीं, बल्कि उसे सीख की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। अनुशासन की शक्ति- मोटिवेशन अस्थायी है, लेकिन अनुशासन स्थायी है। लेखक ने अपने अनुभव से बताया है कि कैसे छोटी-छोटी आदतें करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाती हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस- ‘एपिक करियर’ का मतलब सिर्फ काम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार और शौक के बीच संतुलन बनाना भी है। ये किताब क्यों है इतनी खास? आजकल करियर की किताबें ज्यादातर थ्योरी से भरी होती हैं, लेकिन अंकुर का तरीका अलग है। छोटे-छोटे वाक्य, सीधी बातें, कोई भारी-भरकम शब्द नहीं। यह किताब फ्रेशर हो या एक्सपीरियंस्ड प्रोफेशनल, सबके लिए फिट बैठती है। इसमें एक खास चैप्टर है, जहां अंकुर तमाम कठिन सवालों के जवाब देते हैं। अंत में टेम्प्लेट्स, एक्शन प्लान और फ्रेमवर्क दिया गया है। इसमें बताया गया है कि- नीचे दिए ग्राफिक से किताब के आठ जरूरी सबक जानिए- अब इन पॉइंट्स को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं, क्योंकि ये सिर्फ किताब की बातें नहीं, बल्कि जिंदगी की सच्चाई हैं। पैशन और पर्पज पहचानो, करियर खुद-ब-खुद एपिक बनेगा ज्यादातर लोग करियर चुनते समय दूसरों को देखते हैं। अगर कोई IAS बनकर सेटल हो गया या किसी ने स्टार्टअप करके करोड़ों रुपए बना लिए तो उसे कॉपी करने लगते हैं। जबकि अंकुर वारिकू लिखते हैं, पहले खुद से पूछो- ग्रोथ माइंडसेट बनाओ, असफलता को दोस्त बनाओ अंकुर ने अपनी जिंदगी की फेलियर स्टोरीज शेयर की हैं। कैसे उन्होंने कंपनियां बनाईं, फेल हुईं, लेकिन सीखते रहे और आगे बढ़े। किताब में बताया है कि फिक्स माइंडसेट छोड़ो, ग्रोथ माइंडसेट अपनाओ। हर फेलियर के बाद खुद से पूछो कि इससे मैंने क्या सीखा? अच्छी आदतें बनाओ, डिसिप्लिन से करियर चमकेगा मोटिवेशन आता-जाता है, लेकिन डिसिप्लिन हमेशा साथ रहता है। अंकुर बताते हैं कि वे पिछले 4 साल से लगातार हर साल एक किताब लिख रहे हैं। यह सिर्फ डिसिप्लिन की वजह से संभव हुआ है। छोटी-छोटी अच्छी आदतें बनाएं, रोज 30 मिनट पढ़ें, लिखें या नई स्किल सीखें। वर्क-लाइफ बैलेंस रखो, बर्नआउट से बचो किताब बताती है कि करियर एपिक बनाने का मतलब सिर्फ काम नहीं, बल्कि जिंदगी जीना भी है। फैमिली, हेल्थ और हॉबीज को इग्नोर मत करो। हफ्ते में एक दिन ऑफ रखो, उस दिन का पूरा समय सिर्फ खुद के लिए रखो। नेटवर्किंग और जॉब सर्च के प्रैक्टिकल टिप्स किताब में रेडीमेड टेम्प्लेट्स हैं, जैसे कि- कोल्ड ईमेलिंग की A-टू-Z गाइड दी गई है। वह कहते हैं कि हर हफ्ते 5 नए लोगों से बातचीत करो। जरूरी नहीं है कि आपको इससे कुछ हासिल ही हो, लेकिन नए कनेक्शंस बनाओ। लगातार सीखते रहो, कभी अटकोगे नहीं दुनिया बदल रही है, स्किल्स पुरानी हो रही हैं। किताब में रियल स्टोरीज का उदाहरण देकर बताया गया है कि कैसे लोग इंडस्ट्री चेंज करके सफल हुए। ऑनलाइन कोर्स करो, बुक्स पढ़ो और नई चीजें ट्राई करो। एक्शन प्लान बनाओ, सपनों को हकीकत में बदलो बुक के अंत में कुछ फ्रेमवर्क और वर्कशीट्स हैं, जो करियर प्लानिंग को आसान बनाते हैं। अपने 1 साल, 5 साल और 10 साल के गोल लिखो और छोटे स्टेप्स में अचीव करो। इसे क्यों पढ़ें? किताब के बारे में मेरी राय 'बनाएं एक शानदार करियर' उन लोगों के लिए एक 'जीपीएस' की तरह है, जो करियर की भीड़ में रास्ता भटक गए हैं। अंकुर वारिकू की ईमानदारी और सरल भाषा इस किताब को हर युवा की बुकशेल्फ का हिस्सा बनाने के लायक बनाती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए बुक रिव्यू- नए पेरेंट्स के लिए एक जरूरी किताब: नए नन्हे मेहमान को कैसे पालें, पेरेंटिंग से जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब पेरेंटिंग एक बेहद खूबसूरत जर्नी है। हर शादीशुदा कपल इस पल का बेसब्री से इंतजार करता है। यह सिर्फ बच्चे की परवरिश नहीं, बल्कि खुद के सीखने, धैर्य रखने और भावनात्मक रूप से मैच्योर होने की प्रक्रिया भी है। इस सफर में खुशियां हैं, जिम्मेदारियां हैं और अनगिनत यादें हैं, जो परिवार को मजबूत बनाती हैं। आगे पढ़िए…
जरूरत की खबर- आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं:रेगुलर करें ये 8 आई एक्सरसाइज, डाइट में शामिल करें ये हेल्दी चीजें, न करें 8 गलतियां
मौजूदा वक्त में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। ये चीजें जिंदगी में इस कदर हावी हो गई हैं कि हम अपनी नींद भी पूरी नहीं कर पाते हैं। इसका सीधा असर आंखों पर पड़ता है। नतीजतन आंखों की रोशनी कम हो रही है। उम्र के साथ नजर कमजोर होना कॉमन है, लेकिन बच्चों और युवाओं में ये समस्या चिंता का विषय है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आंखों की रोशनी फिर से बढ़ सकती है। क्या इसका कोई नेचुरल तरीका हो सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में ‘विजन हेल्थ’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. दिग्विजय सिंह, कंसल्टेंट, ऑप्थेल्मोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- उम्र के साथ स्वाभाविक ढंग से आंखों की रोशनी कम होती है। लेकिन क्या उम्र के अलावा खराब लाइफस्टाइल और आदतों से भी आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है? जवाब- एजिंग के अलावा खराब लाइफस्टाइल भी आंखों की रोशनी को प्रभावित करती है। जैसेकि– इन सभी खराब आदतों के कारण नजरें कमजोर हो सकती हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या आंखों की रोशनी बढ़ाई भी जा सकती है? जवाब- आंखों की रोशनी पूरी तरह बढ़ाना संभव नहीं है, लेकिन इसे बेहतर किया जा सकता है। हेल्दी और संतुलित डाइट आंखों को सपोर्ट करती है। साथ सही लाइफस्टाइल से आंखों की रोशनी को लंबे समय तक हेल्दी रखा जा सकता है। सवाल- आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इसके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना सबसे जरूरी है, जैसेकि- सवाल- आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कौन-सी एक्सरसाइज करनी चाहिए? जवाब- आंखों की एक्सरसाइज करने से आई-मसल्स रिलैक्स होती हैं और तनाव कम होता है। हालांकि, एक्सरसाइज से आंखों की रोशनी पूरी तरह नहीं लौटती, लेकिन आई स्ट्रेन और थकान जरूर कम होती है। सभी एक्सरसाइज ग्राफिक में देखिए- सवाल- आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए हमारी डाइट कैसी होनी चाहिए? जवाब- आई हेल्थ के लिए विटामिन A, C, E, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड बेहद महत्वपूर्ण हैं। डिटेल पॉइंटर्स से समझें- डिटेल फूड चार्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन विटामिन्स की कमी से आंखों की रोशनी कमजोर होती है? उन विटामिन्स को फूड में कैसे शामिल करें? जवाब- इसके लिए कई विटामिन जरूरी होते हैं- सवाल- क्या आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए सप्लीमेंट्स लेना सही है? जवाब- अगर डाइट संतुलित है, तो आमतौर पर सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती है। कुछ मामलों में डॉक्टर विटामिन और मिनरल्स के लिए सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन याद रखें– सवाल- आंखों को हेल्दी रखने के लिए फूड के अलावा लाइफस्टाइल में और कौन से बदलाव करने चाहिए? क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल में ये जरूरी बदलाव करें- ग्राफिक में देखिए, किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए- आंखों की रोशनी से जुड़े कुछ कॉमन सवाल-जवाब सवाल- किन बीमारियों के कारण आई-साइट कमजोर हो सकती है? जवाब- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से आंखों की नर्व्स और रेटिना को नुकसान हो सकता है। इन बीमारियों में समय पर इलाज और नियमित आई-चेकअप न हो तो नजर कमजोर हो सकती है। सवाल- क्या चश्मा लगाने से आंखें ज्यादा कमजोर होती हैं? जवाब- चश्मा लगाने से आंखें कमजोर नहीं होतीं, बल्कि साफ देखने में मदद मिलती है। गलत नंबर का चश्मा या जरूरत होने पर भी चश्मा न पहनने से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता है। इससे आंखें कमजोर हो सकती हैं। सवाल- क्या कॉन्टेक्ट लेंस लगाने से नजर कमजोर हो सकती है? जवाब- आमतौर पर कॉन्टेक्ट लेंस चश्मे की तरह साफ देखने में मदद करते हैं। लेकिन अगर लेंस साफ न रखा जाए तो आंखों में इन्फेक्शन और जलन का कारण बन सकता है। सवाल- क्या जेनेटिक कारणों से नजर कमजोर हो सकती है? जवाब- ग्लूकोमा या मैक्युलर डिजेनरेशन जैसी समस्याएं जेनेटिक हो सकती हैं। इसलिए अगर परिवार में किसी को ऐसी समस्या है, तो नियमित आई-चेकअप जरूरी है। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या है ‘EAT लैंसेट’ डाइट: किडनी डिजीज का रिस्क कम करने में मददगार, 9 हेल्थ बेनिफिट्स, जानें किन्हें नहीं खाना चाहिए कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, ये डाइट क्रॉनिक किडनी डिजीज के रिस्क को काफी हद तक कम कर सकती है। भारत में हार्ट डिजीज के बाद क्रॉनिक किडनी डिजीज दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है। हेल्थ जर्नल ‘द लैंसेट’ में पब्लिश एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, साल 2023 में भारत में करीब 13.8 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थे। आगे पढ़िए…
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