ट्रंप का दावा: ईरान की नौसेना और एयर डिफेंस सिस्टम तबाह
वॉशिंगटन, 11 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिकी हमलों से ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना तथा वायु रक्षा प्रणाली लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि मौजूदा संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर अभूतपूर्व और बेहद प्रभावी हमले किए हैं।
ट्रंप ने कहा, “हमारी सेना दुनिया की सबसे बेहतरीन और सबसे शक्तिशाली है, और वे उन्हें बहुत जोरदार तरीके से निशाना बना रहे हैं। इस समय उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है, उनके एयरपोर्ट नष्ट हो गए हैं। उनके पास अब कोई एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम या रडार नहीं बचा है। उनके नेता भी खत्म हो चुके हैं और हम इससे भी ज्यादा कर सकते हैं।”
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ने जानबूझकर कुछ लक्ष्यों को अभी नष्ट नहीं किया है, लेकिन यदि ऐसा किया गया तो ईरान के लिए अपने देश को फिर से खड़ा करना लगभग असंभव हो जाएगा।
ट्रंप ने कहा, “हमने कुछ चीजें जानबूझकर छोड़ी हैं। अगर हम चाहें तो आज दोपहर तक, बल्कि एक घंटे के भीतर ही उन्हें खत्म कर सकते हैं। इसके बाद वे अपना देश दोबारा खड़ा नहीं कर पाएंगे।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि अभियान के दौरान ईरान की अधिकांश नौसैनिक क्षमता नष्ट कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लगभग उसके सभी जहाज तबाह हो चुके हैं।
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान की कई स्तरों वाली रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा, “हमने उनकी नौसेना को खत्म कर दिया, उनकी वायुसेना को भी खत्म कर दिया और उनके सभी एंटी-डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान की शर्तें पूरी न होने पर भी सैन्य कार्रवाई रोक सकता है, तो ट्रंप ने संकेत दिया कि अभियान अभी जारी रह सकता है। उन्होंने कहा, “हमने उन्हें इतिहास में शायद ही किसी देश को जितना नुकसान पहुंचा हो, उससे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है और अभी यह खत्म नहीं हुआ है।”
--आईएएनएस
डीएससी
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पतंजलि अनुसंधान संस्थान में जेब्राफिश-ड्रोसोफिला की आधुनिक लैब का उद्घाटन, जैव-चिकित्सीय क्षेत्र में हासिल की बड़ी उपलब्धि
भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने की दिशा में Patanjali Research Institute ने अहम कदम उठाया है. इंस्टीट्यूट में अत्याधुनिक जेब्राफिश और ड्रोसोफिला अनुसंधान प्रयोगशाला का उद्घाटन हुआ है. लैब का उद्घाटन खुद प्रसिद्ध आयुर्वेद वैज्ञानिक आचार्य बालकृष्ण ने किया है. खास मौके पर संस्थान के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि और रिसर्चर्स मौजूद थे.
ऐसे किया जाएगा रिसर्च
नई प्रयोगशाला आधुनिक जैव-चिकित्सीय अनुसंधान के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी, जिसमें जेब्राफिश और ड्रोसोफिला जैसे मॉडल जीवों पर रिसर्च की जाएगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जीवों के जीन्स इंसानों के जीन्स से बहुत मिलते-जुलते हैं. इस वजह से इनका उपयोग दवाओं और बीमारियों के रिसर्च में किया जाता है. जेब्राफिश शुरुआत में ट्रांसपेरेंट होता है, जिसे वैज्ञानिक उनकी शरीर के अंदर होने वाली गतिविधियों को आसानी से देख सकते हैं. इसके अलावा, ड्रोसोफिला मक्खियों का लाइफ साइकिल छोटा होता है, जिससे प्रयोग जल्दी पूरे किए जा सकते हैं.
दुनिया के सामने आयुर्वेद की शक्ति को वैज्ञानिक आधार पर रखा जाएगा
लैब के उद्घाटन के दौरान, आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारत की आयुर्वेदिक परंपरा में बहुत बड़ा ज्ञान छिपा हुआ है. इसी ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करना आवश्यक है, जिससे दुनिया के सामने आयुर्वेद की शक्ति को वैज्ञानिक आधार के साथ रखा जा सकता है. पतंजलि संस्थान इसी दिशा में लगातार काम कर रहा है.
लैब में सारी सुविधाएं मौजूद- डॉ. अनुराग
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक Dr. Anurag Varshney ने बताया कि नई प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं. इसमें नियंत्रित तापमान वाले एक्वेरियम, ड्रोसोफिला के लिए विशेष कल्चर सिस्टम और हाई-रिजॉल्यूशन माइक्रोस्कोपी जैसी सुविधाएं मौजूद हैं.
देश में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगी ये लैब- एक्सपर्ट
इस प्रयोगशाला की मदद से मेटाबोलिक बीमारियां, न्यूरोलॉजिकल रोग, सूजन से जुड़ी समस्याएं और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों पर आयुर्वेदिक दवाओं के प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा भारत में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देगी और युवाओं को अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी.
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