Responsive Scrollable Menu

क्या देश ने गरीबी को कम करने के मामले में पाई सफलता? विश्व बैंक के आंकड़ों से जाने हकीकत

भारत ने गरीबी कम करने के मोर्चे पर बीते एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. देश में आर्थिक विकास, रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का असर अब अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों में भी नजर आने लगा है. विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन की अंतरराष्ट्रीय गरीबी सीमा से ऊपर आ गए. इस अवधि में गरीबी के अनुपात में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. विश्व बैंक ने भारत में आए इस बदलाव को गरीबी उन्मूलन की दिशा  में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गरीबी कम होने के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारकों की भूमिका रही है. इनमें परिवारों की उपभोग क्षमता में सुधार, रोजगार के नए अवसर, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सरकारी सहायता कार्यक्रमों की बढ़ती पहुंच प्रमुख हैं.

सरकारी योजनाओं ने कमजोर परिवारों को दिया सहारा

भारत में गरीबी कम करने की प्रक्रिया में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. विश्व बैंक के आकलन में खाद्य सहायता और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी व्यवस्थाओं को भी अहम माना गया है. इन योजनाओं के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को जरूरी सुविधाएं और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है.

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पात्र परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया. इससे कम आय वाले परिवारों के भोजन पर होने वाले खर्च का बोझ कम करने में मदद मिली. वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में काम हुआ.

इसी तरह पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसानों को आर्थिक सहायता दी गई. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई. इन पहलों से कमजोर आय वर्ग के परिवारों को घरेलू खर्च और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक सहारा मिला.

रोजगार में 13.4 करोड़ की बढ़ोतरी, महिलाओं की भागीदारी भी अहम

गरीबी में गिरावट की एक बड़ी वजह रोजगार के अवसरों में हुआ विस्तार भी है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार की संख्या में करीब 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई. इस दौरान ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

महिलाओं का रोजगार से जुड़ना परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाला कारक साबित हुआ है. इससे घरेलू आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हुए और परिवारों की खर्च करने की क्षमता में सुधार आया. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने आर्थिक गतिविधियों के दायरे को भी विस्तार दिया है.

रिपोर्ट में परिवारों की उपभोग क्षमता में सुधार को भी गरीबी घटने के प्रमुख संकेतकों में शामिल किया गया है. आमदनी बढ़ने और सरकारी सहायता मिलने से परिवारों के लिए भोजन, आवास और दूसरी जरूरी जरूरतों पर  खर्च करना अपेक्षाकृत आसान हुआ है.

दो दशकों में गरीबी के आंकड़ों में बड़ा बदलाव

भारत में गरीबी कम होने का सिलसिला केवल पिछले कुछ वर्षों तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल की गई प्रो. सुरेश तेंदुलकर समिति (गठन 2005) के मुताबिक, वर्ष 2004-05 में देश की 37.2 फीसदी आबादी  गरीबी की श्रेणी में थी. वर्ष 2011-12 तक यह अनुपात घटकर 21.9 फीसदी रह गया था.

इसके बाद अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानकों पर आधारित आंकड़ों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला. विश्व बैंक की 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी सीमा के अनुसार, वर्ष 2011 में भारत की 57.7 फीसदी आबादी गरीबी के   दायरे में थी. वर्ष 2023 तक यह आंकड़ा घटकर 16.1 फीसदी रह गया. इस तरह करीब 49.6 करोड़ लोगों के इस गरीबी सीमा से ऊपर आने का अनुमान है. यह बदलाव भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में आए  व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है.

अत्यधिक गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

अत्यधिक गरीबी के मामले में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है. विश्व बैंक के तीन डॉलर प्रतिदिन के अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक के अनुसार, वर्ष 2011 में देश की 27.1 फीसदी आबादी अत्यधिक गरीबी में जीवन गुजार रही थी. वर्ष 2023 तक यह अनुपात घटकर 2.6 फीसदी रह गया. रिपोर्ट में वर्ष 2022-23 के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है. इस दौरान 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर देश में गरीबी का अनुपात 23.9 फीसदी था, जबकि तीन डॉलर प्रतिदिन के मानक पर अत्यधिक गरीबी का स्तर 5.3 फीसदी दर्ज किया गया था.

इसके बाद के आकलन में दोनों मानकों पर गिरावट सामने आई. इससे पता चलता है कि भारत में न केवल गरीबी से प्रभावित आबादी का अनुपात कम हुआ है, बल्कि अत्यधिक आर्थिक अभाव की स्थिति में रहने वाले लोगों की संख्या में भी बड़ी कमी आई है.

आगे की क्या है चुनौती 

गरीबी के आंकड़ों में सुधार के बावजूद भारत के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं. गरीबी में आई गिरावट को स्थायी बनाने के लिए बेहतर और नियमित रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी होगा. खासकर युवाओं के लिए ऐसे रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिनसे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और स्थिर आय मिल सके.

इसके अलावा राज्यों के बीच विकास का अंतर और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में मौजूद आर्थिक असमानता भी महत्वपूर्ण चुनौती है. कई क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अभी भी समान नहीं है. ऐसे में विकास योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों तक पहुंचाना जरूरी होगा.

प्रगति को लंबे समय तक बनाए रखना जरूरी 

कुल मिलाकर, विश्व बैंक की रिपोर्ट भारत में गरीबी कम करने की दिशा में हुई प्रगति की तस्वीर पेश करती है. करीब 49.6 करोड़ लोगों का 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा से ऊपर आना एक बड़ी उपलब्धि है. हालांकि, अब देश के सामने इस प्रगति को लंबे समय तक बनाए रखने की चुनौती है. इसके लिए रोजगार की गुणवत्ता सुधारने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने पर विशेष ध्यान देना होगा.

Continue reading on the app

गुजरात में युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर, CM भूपेंद्र पटेल बोले- शिक्षा और उद्योग के बीच बने मजबूत तालमेल

गुजरात को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ उच्च शिक्षा को रोजगार और उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज की है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि विकसित गुजरात 2047 के रोडमैप के तहत युवाओं के लिए कुशल प्रतिभाओं का समूह तैयार करना और उनके कौशल विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है. उन्होंने शिक्षा, उद्योग और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया.

मुख्यमंत्री अहमदाबाद में आयोजित ‘विकसित गुजरात 2047: हायर एजुकेशन फॉर फ्यूचर वर्कफोर्स रेडीनेस’ विषयक एक दिवसीय सेमिनार के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन गुजरात स्टेट इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (GRIT) ने राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से किया.

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युवा विकसित भारत और विकसित गुजरात की सबसे महत्वपूर्ण कार्यशक्ति हैं. वर्ष 2047 तक गुजरात की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि युवाओं को बदलते समय के अनुरूप कितनी प्रासंगिक शिक्षा और कौशल उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने विकसित गुजरात 2047 के रोडमैप को खुले दृष्टिकोण और परिणाम-केंद्रित तरीके से लागू करने की आवश्यकता भी बताई.

AI और नई तकनीकों को शिक्षा से जोड़ने पर जोर

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा ने कहा कि डिजिटल साक्षरता और तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना समय की जरूरत है. विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमेशन जैसी उभरती तकनीकों की जानकारी दी जानी चाहिए.

उन्होंने विश्वविद्यालयों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बहुविषयक और अनुभव आधारित शिक्षण दृष्टिकोण के अनुरूप उद्योगों के सहयोग से पाठ्यक्रम अपडेट करने, इंटर्नशिप और शोध को बढ़ावा देने की अपील की.

उद्योगों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग

सेमिनार में नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर सोनिया पंत ने ‘हायर एजुकेशन फॉर विकसित भारत’ विषय पर प्रस्तुति दी. इसमें भविष्य की कार्यशक्ति की जरूरतों, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर चर्चा हुई.

कार्यक्रम में शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा युवाओं को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया.

 

 

 

 

 

Continue reading on the app

  Sports

India vs New Zealand 2026 Live Score: वेलिंगटन में बारिश, दूसरे वनडे के आगाज में देरी के आसार

Ind vs NZ Match Live Score: भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरा वनडे वेलिंगटन में है. 5 वनडे मैचों की सीरीज में भारत 1-0 से आगे है. Sat, 07 Nov 2026 06:33:31 +0530

  Videos
See all

7 November Rashifal: मकर राशि (Capricorn) के लिए 7 नवंबर 2026 का राशिफल | Astrology |Hindi Astrology #tmktech #vivo #v29pro
2026-11-07T00:40:24+00:00

7 November Rashifal: कुंभ राशि (Aquarius) के लिए 7 नवंबर 2026 का राशिफल | Astrology |Hindi Astrology #tmktech #vivo #v29pro
2026-11-07T00:45:34+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers