पाकिस्तान में हर साल दो हजार दुल्हनों की मौत, फिर भी दहेज को बैन करने वाला बिल 'अव्यावहारिक': रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 11 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान में दहेज को बैन करने वाले एक बिल को अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया गया। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की इंटरियर स्टैंडिंग कमेटी ने इस बिल को खारिज किया, जबकि पाकिस्तान में हर साल दहेज के विवादों के कारण लगभग दो हजार दुल्हनों की हत्या होती है।
इस बिल का खारिज होना न केवल संसदीय असफलता है, बल्कि यह राज्य की उस असहज स्थिति को भी दिखाता है, जिसमें वह परंपरा के नाम पर महिलाओं पर होने वाले भेदभाव और हिंसा को चुनौती देने से बचता है।
पाकिस्तान में दहेज को उपहार या सांस्कृतिक परंपरा के रूप में देखा जाता है, जिसमें दुल्हन का परिवार नकद, जेवरात, घरेलू सामान और अन्य मूल्यवान वस्तुएं वर के परिवार को देता है। यह वही प्रथा है जिसके कारण दबाव, अपमान और हिंसा होती है।
जिन परिवारों के पास पर्याप्त दहेज देने की क्षमता नहीं होती, उन्हें समाज से बहिष्कार का सामना करना पड़ता है और बेटियों को बोझ समझा जाता है। पिछले साल पंजाब असेंबली के एक स्पीकर ने कहा कि पाकिस्तान में लगभग 1.35 करोड़ महिलाएं अभी भी अविवाहित हैं, क्योंकि उनके परिवार दहेज नहीं दे सके।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नेता शर्मिला फारूकी ने दहेज बैन करने का बिल पेश किया। इस प्रस्तावित कानून के अनुसार, कोई भी जो दहेज देगा, लेगा या प्रथा अपनाएगा, उसे पांच साल तक की जेल और 2,50,000 पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) या दहेज की बराबर कीमत का जुर्माना हो सकता था।
साथ ही, बिल में यह भी प्रावधान था कि जो कोई भी दहेज मांगता है, उसे दो साल तक जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है। बिल का उद्देश्य दहेज को सामान्य मानने वाली संस्कृति को रोकना और इसके प्रचार या विज्ञापन को अपराध बनाना था। इसके अलावा, बिल ने सभी शादी के उपहारों को दुल्हन की व्यक्तिगत संपत्ति माना और कहा कि जो भी उपहार उसके अलावा किसी और के पास हैं, उन्हें तीन महीने के अंदर उसे सौंपना होगा।
बिल के उद्देश्यों के बावजूद कमेटी ने इसे सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। अध्यक्ष राजा खुर्रम नवाज ने कहा कि पाकिस्तान में पहले से ही शादी के खर्च और दहेज प्रथाओं को नियंत्रित करने वाले कानून हैं और उन्हें सख्ती से लागू करना अधिक प्रभावी होगा। अन्य कमेटी सदस्यों जैसे ख्वाजा इजरुल हसन ने इस बिल की आलोचना की कि शिकायत करने की जिम्मेदारी दुल्हन और उसके परिवार पर डाली गई है, जिससे पारिवारिक रिश्ते खराब हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस नामंजूरी से पाकिस्तान की कानून बनाने की प्रक्रिया की गहरी समस्या सामने आती है। संरचनात्मक असमानता को चुनौती देने वाले कानूनों को अक्सर अत्यधिक उच्च मानकों पर तौला जाता है, जबकि जो स्थिति को बनाए रखते हैं, उन्हें कम जांच-पड़ताल के साथ मंजूरी मिल जाती है।
डॉ. रखशिंदा परवीन ने कहा कि इसे अव्यवहारिक बताकर खारिज करना रोजमर्रा के लैंगिक दबाव के खिलाफ कानून बनाने से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। कमेटी की चर्चा, चिंताजनक रूप से, दहेज को बढ़ावा देती प्रतीत हुई।
उन्होंने कहा, यह परिणाम विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह संकट बहुत बड़ा है। दहेज विवाद न केवल हिंसा को बढ़ाते हैं, बल्कि गरीबी को भी गहरा करते हैं, क्योंकि गरीब परिवार दहेज पूरा करने के लिए कर्ज लेते हैं और और अधिक वित्तीय संकट में फंस जाते हैं। बिल का खारिज होना संकेत देता है कि राज्य इस दबावपूर्ण व्यवस्था का सीधे सामना करने के बजाय इसे केवल नियंत्रित करने में ही रुचि रखता है।
--आईएएनएस
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Bihar: पटना में 5 मार्च को होगी मैराथन, 'नशा मुक्त बिहार' का दिया जाएगा संदेश
Bihar: मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोग से पटना में 15 मार्च को मैराथन का आयोजन किया जाएगा. इस संबंध में बुधवार को पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि “नशा मुक्त बिहार” के संदेश के साथ आयोजित होने वाली पटना मैराथन राज्य में जनजागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी. आयुक्त ने बताया कि इस वर्ष मैराथन का आयोजन कुछ विलंब से हो रहा है, लेकिन इसे बेहतर और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं ताकि आयोजन सफल और प्रभावी हो सके.
चार श्रेणियों में होगी दौड़
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के आयुक्त अंशुल अग्रवाल ने बताया कि पटना मैराथन अब बिहार की पहचान बन चुकी है. इस वर्ष मैराथन में देशभर से करीब 10 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने का अनुमान है. मैराथन में चार श्रेणियों में दौड़ आयोजित की जाएगी.
फुल मैराथन (42.195 किमी), हाफ मैराथन (21.097 किमी), 10 किलोमीटर रन और 5 किलोमीटर रन शामिल हैं. सभी दौड़ की शुरुआत गांधी मैदान से होगी और गंगा पथ व अटल पथ से होकर गुजरते हुए इसका समापन भी गांधी मैदान में ही होगा.
इस दौरान प्रतिभागियों को पटना के रिवरफ्रंट और आधुनिक सड़कों का अनुभव मिलेगा.उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को प्रेरित करने के लिए इस बार मैराथन में मुख्य अतिथि के तौर पर ओलंपिक पदक विजेता और विश्व प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी पी. वी. सिंधु को आमंत्रित किया गया है.
प्रतिभागियों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा के इंतजाम
मैराथन के सफल आयोजन के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं. प्रतिभागियों की सुविधा के लिए प्रत्येक किलोमीटर पर कुल 20 एड स्टेशन बनाए जाएंगे. इसके अलावा मार्ग और आयोजन स्थल पर मनोरंजन की भी व्यवस्था रहेगी.
स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजन में 30 डॉक्टर, पारामेडिकल स्टाफ और 20 फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की जाएगी. वहीं यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस और संबंधित विभागों की टीम लगातार निगरानी करेगी. नगर निगम की ओर से साफ-सफाई और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी.
कई मार्गों पर रहेगा यातायात प्रतिबंध
मैराथन को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए 14 मार्च की रात 11 बजे से 15 मार्च की सुबह 10 बजे तक संबंधित मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित रहेगा. इस दौरान प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है.
विजेताओं को मिलेंगे 30 लाख रुपये के पुरस्कार
मैराथन के विजेताओं को कुल 30 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी. पुरस्कार वितरण समारोह प्रातः 6:45 बजे आयोजित किया जाएगा. इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को रिफ्रेशमेंट और मेडल भी प्रदान किए जाएंगे. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैराथन से जुड़े मेडल और टी-शर्ट को भी लॉन्च किया गया.
दौड़ शुरू होने का समय
फुल मैराथन - प्रातः 3:30 बजे
हाफ मैराथन - प्रातः 5:00 बजे
10 किलोमीटर रन - प्रातः 6:00 बजे
5 किलोमीटर रन - प्रातः 7:15 बजे
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