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एक-दो नहीं जंग के बीच फंसे हैं भारत के इतने जहाज, सरकार ने दी जानकारी

मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारतीय समुद्री व्यापार और नाविकों पर भी दिखने लगा है. बुधवार, 11 मार्च 2026 को भारत सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में भारत के 28 जहाज फंसे हुए हैं. इन जहाजों पर कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर सरकार बेहद गंभीर है. नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने इस स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 28 जहाजों में से 24 जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पश्चिमी हिस्से में हैं, जिन पर 677 नाविक मौजूद हैं. वहीं, 4 जहाज इस जलमार्ग के पूर्वी हिस्से में फंसे हैं, जहां 101 लोग सवार हैं. पश्चिमी एशिया में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने इन जहाजों और उन पर मौजूद कर्मियों की सुरक्षा के लिए निगरानी और तैयारी के उपायों को काफी सख्त कर दिया है.

सुरक्षा के लिए कड़े कदम और मॉनिटरिंग

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सरकार हर एक जहाज की लोकेशन और वहां के हालात पर पल-पल की नजर रख रही है. जहाजों के अधिकारियों, शिप मैनेजर्स और भर्ती एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है. इसके साथ ही भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन भी नाविकों को चिकित्सा सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं. डीजी शिपिंग ने सभी भारतीय ध्वज वाले जहाजों और नाविकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने और रियल-टाइम जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए हैं.

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पोर्ट ऑपरेशंस की क्या है स्थिति? 

राजेश कुमार सिन्हा ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है. बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही की निरंतर निगरानी की जा रही है और शिपिंग लाइन्स के साथ रियल-टाइम डेटा साझा किया जा रहा है. मंत्रालय और डीजी शिपिंग में 24 घंटे चलने वाले समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं. ये कंट्रोल रूम शिप ओनर्स और ऑपरेटर्स के साथ सीधे संपर्क में हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.

एक्सपोर्टर्स और व्यापार पर असर

युद्ध के कारण समुद्री मार्ग में आई इस बाधा से निर्यातकों (Exporters) को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए भी सरकार ने कदम उठाए हैं. बंदरगाहों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्यातकों को हर संभव सहायता प्रदान करें ताकि भारत का आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार प्रभावित न हो. सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि वैश्विक तनाव के बीच भारतीय सप्लाई चेन और नाविकों के जीवन पर कोई आंच न आए. फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है, लेकिन बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति में बदलाव के लिए भी तैयारी पूरी है.

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ट्रंप का बड़ा बयान 'ईरान में अब कुछ नहीं बचा', बताया कब बंद होगा युद्ध?

मध्य पूर्व में जारी Iran–Israel conflict अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है. बुधवार को यह संघर्ष 12वें दिन में प्रवेश कर गया, और दोनों पक्षों के बीच सैन्य हमले लगातार जारी हैं. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने सबका ध्यान खींचा है. दरअसल ट्रंप ने अपने बयान में साफ कर दिया है कि अब ईरान में कुछ नहीं बचा है. यही नहीं उन्होंने ये भी बता दिया का ये युद्ध कब तक खत्म होगा.? 

क्या बोले यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान में अमेरिका के लिए टारगेट करने के लिए “लगभग कुछ भी नहीं बचा है.” यानी ईरान में सबकुछ खत्म किया जा चुका है. उनका एक और बयान चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि 'जब भी वह चाहेंगे, यह युद्ध खत्म हो सकता है.'
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है.

ट्रंप का बयान क्यों चर्चा में

एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका चाहे तो संघर्ष को जल्दी खत्म कराया जा सकता है. उनका कहना था कि क्षेत्र में हाल के सैन्य अभियानों ने ईरान की कई अहम सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाया है.

ट्रंप के इस बयान को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मध्य पूर्व की स्थिति पर अमेरिका की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

ईरान की कार्रवाई से होर्मुज में बढ़ा तनाव

संघर्ष के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसने Strait of Hormuz में दो जहाजों को निशाना बनाया. ईरान के मुताबिक, इन जहाजों ने उसके सुरक्षा बलों की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया था. इनमें एक जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला कंटेनर पोत बताया गया है, जबकि दूसरा थाईलैंड का बल्क कैरियर था.

ईरानी गार्ड्स का कहना है कि दोनों जहाजों को चेतावनी के बावजूद न रुकने पर प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्हें रुकना पड़ा. इस घटना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है.

वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस की सप्लाई के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करता है. ऐसे में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या जहाजों पर हमले से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है.

ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लगी चोट

इस बीच ईरान की आंतरिक राजनीति से जुड़ी एक खबर भी सामने आई है. एक अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजत्बा खामेनेई को हल्की चोट लगी है.

हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें यह चोट कब और किस परिस्थिति में लगी. साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि उन्होंने अब तक जनता को इस बारे में जानकारी क्यों नहीं दी है. अधिकारी के अनुसार, चोट लगने के बावजूद खामेनेई अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं और देश के प्रशासनिक कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं.

अब क्या हो सकता है?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ रही है। कई देश इस संघर्ष को जल्द खत्म कराने की अपील कर चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है.

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस युद्ध को रोका जा सकेगा या यह क्षेत्र और अधिक अस्थिरता की ओर बढ़ेगा.

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  Sports

हमारे बच्चे सुरक्षित नहीं हैं... युद्ध और तनाव के बीच ईरान का बड़ा फैसला, फीफा वर्ल्ड कप से हटने का किया आधिकारिक ऐलान

Iran pulls out FIFA World Cup: ईरान ने अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2026 से हटने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. खेल मंत्री अहमद दुनियामाली ने साफ किया कि अमेरिका के साथ जारी युद्ध और शीर्ष नेतृत्व की हत्या के बाद ईरान किसी भी परिस्थिति में वहां मैच नहीं खेलेगा. ईरान ग्रुप-जी में शामिल था, जिसके मैच अमेरिका में होने थे. युद्ध की विभीषिका और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईरान ने इस वैश्विक टूर्नामेंट का पूर्ण बहिष्कार किया है. Wed, 11 Mar 2026 22:07:21 +0530

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