ट्रंप का बड़ा बयान 'ईरान में अब कुछ नहीं बचा', बताया कब बंद होगा युद्ध?
मध्य पूर्व में जारी Iran–Israel conflict अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है. बुधवार को यह संघर्ष 12वें दिन में प्रवेश कर गया, और दोनों पक्षों के बीच सैन्य हमले लगातार जारी हैं. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने सबका ध्यान खींचा है. दरअसल ट्रंप ने अपने बयान में साफ कर दिया है कि अब ईरान में कुछ नहीं बचा है. यही नहीं उन्होंने ये भी बता दिया का ये युद्ध कब तक खत्म होगा.?
क्या बोले यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान में अमेरिका के लिए टारगेट करने के लिए “लगभग कुछ भी नहीं बचा है.” यानी ईरान में सबकुछ खत्म किया जा चुका है. उनका एक और बयान चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि 'जब भी वह चाहेंगे, यह युद्ध खत्म हो सकता है.'
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है.
ट्रंप का बयान क्यों चर्चा में
एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका चाहे तो संघर्ष को जल्दी खत्म कराया जा सकता है. उनका कहना था कि क्षेत्र में हाल के सैन्य अभियानों ने ईरान की कई अहम सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाया है.
ट्रंप के इस बयान को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मध्य पूर्व की स्थिति पर अमेरिका की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
ईरान की कार्रवाई से होर्मुज में बढ़ा तनाव
संघर्ष के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसने Strait of Hormuz में दो जहाजों को निशाना बनाया. ईरान के मुताबिक, इन जहाजों ने उसके सुरक्षा बलों की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया था. इनमें एक जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला कंटेनर पोत बताया गया है, जबकि दूसरा थाईलैंड का बल्क कैरियर था.
ईरानी गार्ड्स का कहना है कि दोनों जहाजों को चेतावनी के बावजूद न रुकने पर प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्हें रुकना पड़ा. इस घटना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है.
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस की सप्लाई के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करता है. ऐसे में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या जहाजों पर हमले से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है.
ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लगी चोट
इस बीच ईरान की आंतरिक राजनीति से जुड़ी एक खबर भी सामने आई है. एक अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजत्बा खामेनेई को हल्की चोट लगी है.
हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें यह चोट कब और किस परिस्थिति में लगी. साथ ही यह भी नहीं बताया गया कि उन्होंने अब तक जनता को इस बारे में जानकारी क्यों नहीं दी है. अधिकारी के अनुसार, चोट लगने के बावजूद खामेनेई अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं और देश के प्रशासनिक कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं.
अब क्या हो सकता है?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ रही है। कई देश इस संघर्ष को जल्द खत्म कराने की अपील कर चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है.
फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस युद्ध को रोका जा सकेगा या यह क्षेत्र और अधिक अस्थिरता की ओर बढ़ेगा.
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पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता चीन की पारिस्थितिक सभ्यता के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम होगा
बीजिंग, 11 मार्च (आईएएनएस)। 15वीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष, चीन की दूसरी संहिता – पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता – का मसौदा औपचारिक रूप से विचार-विमर्श के लिए राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एनपीसी के प्रतिनिधियों और सीपीपीसीसी के सदस्यों ने संशोधनों पर चर्चा की। यह संहिता चीन में पारिस्थितिक सभ्यता के लिए कानून के शासन के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण की बात करते हुए, मुझे एक पुरानी बात याद आती है। लगभग बीस साल पहले, मैं भारत की राजधानी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रही थी। हर सुबह, मेरी खिड़की के बाहर पक्षियों के मधुर गीत से मेरी नींद खुल जाती थी। लेकिन उस समय चीन की राजधानी पेइचिंग में जंगली पक्षी दुर्लभ थे और लोगों से अलग-थलग थे। भारतीय समाज में मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य की यह तस्वीर मुझे लालसा से भर देती थी: पेइचिंग में अपने घर में खिड़की खोलकर पक्षियों का मधुर गीत सुनना कितना सुखद होगा! दो दशक से अधिक के व्यापक प्रयास के बाद, चीन के पारिस्थितिक सभ्यता निर्माण ने स्थिर और तेज प्रगति की है, और आज, यह अपेक्षा वास्तव में साकार हो गई है।
पक्षी पारिस्थितिक पर्यावरण के सबसे प्रत्यक्ष मूल्यांकनकर्ता होते हैं। एक समय था जब चीनी लोग समुद्री पक्षियों को देखने और उनका पीछा करने के लिए युन्नान के खुनमिंग जाया करते थे। लेकिन अब, छिंगदाओ और श्यामन से लेकर हबेई, थ्येनचिन और यहां तक कि पेइचिंग के थोंगचो जिले तक फैले नीले पानी पर नाचते समुद्री पक्षियों के झुंड का शानदार नजारा वीचैट मोमेंट्स पर वायरल हो गया है। आज पेइचिंग में पक्षियों की 527 प्रजातियां हैं, जो जी20 की राजधानियों में दूसरे स्थान पर है। शहरी पार्कों से लेकर उपनगरीय आर्द्रभूमि तक, पक्षियों के झुंड मधुरता से उड़ते और गाते हैं, जो चीन के पारिस्थितिक शासन में उनके सच्चे विश्वास का प्रमाण है।
यह जबरदस्त बदलाव चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की इस गहन अवधारणा से उपजा है कि पारिस्थितिक समृद्धि सभ्यतागत समृद्धि की ओर ले जाती है। चीन ने पहले प्रदूषण फैलाओ, बाद में सफाई करो के पुराने रास्ते को त्याग दिया है और उत्पादन विकास, समृद्ध जीवन शैली और स्वस्थ पारिस्थितिक पर्यावरण की विशेषता वाली सभ्यता के एक नए मार्ग पर अग्रसर हुआ है, जिसमें राष्ट्र के सतत विकास के लिए पारिस्थितिक सभ्यता निर्माण को रणनीतिक रूप से उच्च प्राथमिकता दी गई है।
चीन की एनपीसी और सीपीपीसीसी ने पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता के संकलन को बढ़ावा दिया है, जो बहुत महत्वपूर्ण है। चीन की दूसरी संहिता के रूप में, यह बिखरे हुए पर्यावरण संरक्षण नियमों को एकीकृत करती है, एक संपूर्ण कानूनी प्रणाली का निर्माण करती है, और कठोर संस्थानों के माध्यम से हरे-भरे पहाड़ों और स्वच्छ जल की रक्षा करती है। मानव जाति के लिए एक साझा भविष्य वाले समुदाय की अवधारणा पर आधारित यह संहिता सुनिश्चित करती है कि पारिस्थितिक संरक्षण नियमों और कानूनों द्वारा शासित हो, जिससे सुंदर चीन के निर्माण के लिए एक अटूट कानूनी बाधा तैयार हो सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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