सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति का चौथा पूर्णाधिवेशन संपन्न
बीजिंग, 11 मार्च (आईएएनएस)। चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन यानी सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति का चौथा पूर्णाधिवेशन 11 मार्च की सुबह पेइचिंग के जन बृहद भवन में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।
पूर्णाधिवेशन में सीपीपीसीसी की सभी सहभागी इकाइयों और सदस्यों से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को केंद्र में रखते हुए सीपीसी केंद्रीय समिति के इर्द-गिर्द और अधिक एकजुट होने, एक मन और एक भाव से मिलकर काम करने, दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने, चीनी विशेषता वाले समाजवाद के मार्ग पर अडिग रहने और चीनी शैली के आधुनिकीकरण के माध्यम से एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण और चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने में नए और बड़े योगदान देने का आह्वान किया गया।
पूर्णाधिवेशन की अध्यक्षता सीपीपीसीसी राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष वांग हुनिंग ने की। शी चिनफिंग, ली छ्यांग, चाओ लजी, त्साई छी, तिंग शुएश्यांग, ली शी, हान चेंग और अन्य नेताओं ने भाग लिया।
समापन समारोह सुबह 9:00 बजे शुरू हुआ। वांग हनिंग ने घोषणा की कि सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति के चौथे पूर्णाधिवेशन में 2,125 सदस्य शामिल होने चाहिए, जबकि 2,059 सदस्य उपस्थित थे, जो आवश्यक कोरम को पूरा करते हैं।
समापन समारोह में सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति के चौथे पूर्णाधिवेशन की स्थायी समिति की कार्य रिपोर्ट संबंधी प्रस्ताव, सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति के तीसरे पूर्णाधिवेशन के बाद से प्राप्त प्रस्तावों के निपटान संबंधी रिपोर्ट, सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति के चौथे पूर्णाधिवेशन के प्रस्तावों की समीक्षा संबंधी रिपोर्ट और सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति के चौथे पूर्णाधिवेशन के राजनीतिक प्रस्ताव को पारित किया गया।
वांग हनिंग ने कहा कि वर्ष 2026 15वीं पंचवर्षीय योजना का पहला वर्ष है, और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) पूर्ण विश्वास के साथ करोड़ों लोगों को चीनी शैली के आधुनिकीकरण की नई यात्रा पर ले जा रही है। सीपीपीसीसी को अपनी प्रकृति, स्थिति, कर्तव्यों और मिशन के आधार पर, सीपीसी के नेतृत्व को कायम रखना चाहिए, सैद्धांतिक सामर्थ्य को मजबूत करना चाहिए, और एक राजनीतिक संगठन के रूप में अपनी भूमिका, सलाह और सुझाव प्रदान करने की भूमिका, और जनता के दिलों और दिमागों को एकजुट करने की भूमिका को बेहतर ढंग से निभाना चाहिए, ताकि व्यापक रूप से जनता का समर्थन प्राप्त किया जा सके, आम सहमति बनाई जा सके, ज्ञान का संग्रह किया जा सके और 15वीं पंचवर्षीय योजना की सफल शुरुआत के लिए शक्ति जुटाई जा सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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एक-दो नहीं जंग के बीच फंसे हैं भारत के इतने जहाज, सरकार ने दी जानकारी
मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारतीय समुद्री व्यापार और नाविकों पर भी दिखने लगा है. बुधवार, 11 मार्च 2026 को भारत सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में भारत के 28 जहाज फंसे हुए हैं. इन जहाजों पर कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर सरकार बेहद गंभीर है. नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने इस स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 28 जहाजों में से 24 जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पश्चिमी हिस्से में हैं, जिन पर 677 नाविक मौजूद हैं. वहीं, 4 जहाज इस जलमार्ग के पूर्वी हिस्से में फंसे हैं, जहां 101 लोग सवार हैं. पश्चिमी एशिया में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने इन जहाजों और उन पर मौजूद कर्मियों की सुरक्षा के लिए निगरानी और तैयारी के उपायों को काफी सख्त कर दिया है.
सुरक्षा के लिए कड़े कदम और मॉनिटरिंग
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सरकार हर एक जहाज की लोकेशन और वहां के हालात पर पल-पल की नजर रख रही है. जहाजों के अधिकारियों, शिप मैनेजर्स और भर्ती एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है. इसके साथ ही भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन भी नाविकों को चिकित्सा सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं. डीजी शिपिंग ने सभी भारतीय ध्वज वाले जहाजों और नाविकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने और रियल-टाइम जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए हैं.
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पोर्ट ऑपरेशंस की क्या है स्थिति?
राजेश कुमार सिन्हा ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है. बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही की निरंतर निगरानी की जा रही है और शिपिंग लाइन्स के साथ रियल-टाइम डेटा साझा किया जा रहा है. मंत्रालय और डीजी शिपिंग में 24 घंटे चलने वाले समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं. ये कंट्रोल रूम शिप ओनर्स और ऑपरेटर्स के साथ सीधे संपर्क में हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.
28 Indian flagged vessels are operating in the Persian Gulf area. Out of these 28 vessels, 24 are west of the #StraitofHormuz. There are 677 Indian citizens on these vessels. On the east of Strait of Hormuz, there are 4 vessels in which 101 Indian citizens are on board
— PIB India (@PIB_India) March 11, 2026
- Rajesh… pic.twitter.com/WBq8iQrtqx
एक्सपोर्टर्स और व्यापार पर असर
युद्ध के कारण समुद्री मार्ग में आई इस बाधा से निर्यातकों (Exporters) को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए भी सरकार ने कदम उठाए हैं. बंदरगाहों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्यातकों को हर संभव सहायता प्रदान करें ताकि भारत का आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार प्रभावित न हो. सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि वैश्विक तनाव के बीच भारतीय सप्लाई चेन और नाविकों के जीवन पर कोई आंच न आए. फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है, लेकिन बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति में बदलाव के लिए भी तैयारी पूरी है.
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