खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी का दबदबा, पाकिस्तानी सुरक्षा बल बेबस
नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर काबू पाने से नाकाम रहे पाकिस्तानी सुरक्षा बल की वजह से खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के अशांत इलाके में एक समानांतर सरकार का कब्जा हो गया है।
अफगानिस्तान तालिबान और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के खिलाफ चल रही लड़ाई का असर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर पड़ा है, जिसके कारण टीटीपी ने बड़े स्तर पर बढ़त बना ली है।
इन घटनाओं पर नजर रख रहे भारतीय अधिकारियों के अनुसार, टीटीपी खैबर जिले में बड़े पैमाने पर अपनी पकड़ बनाने में कामयाब रहा है। इलाके में कई जगहों पर टीटीपी के लड़ाके तलाशी और चेकिंग करते दिखाई दे रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह से बेबस हो गई है और टीटीपी के लड़ाके खुलेआम इलाके में तलाशी अभियान चलाते दिख रहे हैं।
हालांकि, टीटीपी अभी रोजमर्रा के प्रशासन में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन उसने सुरक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे स्थानीय पुलिस सिर्फ मूक दर्शक बनकर रह गई है।
टीटीपी को यह भी समझ है कि इस नियंत्रण को बनाए रखने के लिए उसे पैसे की जरूरत होगी, इसलिए उसके सदस्य लोगों से चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि अपनी गतिविधियों को चला सके।
लंबे समय में टीटीपी पूरे इलाके पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। वह लोगों से कह रहा है कि अब वही इस क्षेत्र का प्रभारी है और जल्द ही सामान्य स्थिति बन जाएगी। स्थानीय सुरक्षा बल टीटीपी से टकराव से बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे इस लड़ाई में कमजोर पड़ सकते हैं।
खैबर पख्तूनख्वा के बारा इलाके में टीटीपी का दबदबा है। यहां वह खुलेआम अपनी ताकत दिखा रहा है और पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से किसी प्रतिक्रिया की कमी ने उसकी मदद की है।
अधिकारियों के अनुसार, टीटीपी को स्थानीय लोगों से ज्यादा विरोध नहीं मिला है। केपी के लोग लंबे समय से पाकिस्तान के शासन से नाराज रहे हैं। वे इस बात से भी नाखुश हैं कि पाकिस्तान की सेना ने तालिबान के खिलाफ युद्ध छेड़ा है। यह स्पष्ट नहीं है कि लोग टीटीपी का समर्थन करते हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि वे सरकार के इस क्षेत्र के प्रति रवैये से खुश नहीं हैं।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि टीटीपी को एहसास है कि उसने इलाके में बड़ी बढ़त हासिल कर ली है और वह इसे खोना नहीं चाहता। यही कारण है कि उसने कई जगहों पर सुरक्षा चौकियां स्थापित कर दी हैं। संगठन नहीं चाहता कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का कोई अधिकारी इस इलाके में प्रवेश करे। साथ ही हथियार और गोला-बारूद के आने को रोकने के लिए भी जांच जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पाकिस्तान की सरकार चुप है, लेकिन जल्द ही वह इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (आईएसकेपी) और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को टीटीपी के खिलाफ लड़ने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। यह योजना लंबे समय से बनाई जा रही थी और हाल के महीनों में पाकिस्तान सरकार आईएसकेपी के साथ आधिकारिक और अनौपचारिक दोनों तरीकों से संपर्क में रही है।
आईएसकेपी इस समय ऐसे डेथ स्क्वॉड तैयार कर रहा है, जिन्हें केपी और बलूचिस्तान दोनों जगह इस्तेमाल किया जाएगा। पाकिस्तान सरकार को लगने लगा है कि वह टीटीपी और बीएलए जैसे संगठनों से पारंपरिक तरीके से नहीं लड़ सकती, इसलिए उसका मानना है कि आईएसकेपी इन समूहों से लड़ने में ज्यादा सक्षम है और इसी कारण उसे अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारतीय एजेंसियों के अनुसार केपी की स्थिति बहुत गंभीर है और जल्द ही बड़े स्तर पर संघर्ष बढ़ सकता है। फिलहाल, पाकिस्तान अफगान तालिबान के साथ अपने संघर्ष में व्यस्त है, इसलिए वह केपी पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहा है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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रुकने का नाम नहीं ले रहा ईरान, अब इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम की फूल रही सांसें, ग्राउंड जीरो से मिडिल-ईस्ट वॉर रिपोर्ट
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब अपने सबसे चरम पर पहुंच गया है. इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच की यह जंग अब रुकने का नाम नहीं ले रही है. न्यूज नेशन के सीनियर रिपोर्टर मधुरेंद्र के जरिए ग्राउंड जीरो से मिल रही जानकारी के मुताबिक, यह अब एक 'न्यू नॉर्मल' बन गया है कि दिन भर सायरन बजते हैं और लोग बंकरों की ओर भागते हैं. ईरान की ओर से लगातार मिसाइलों की बारिश हो रही है, जबकि इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें आसमान में ही ढेर करने की कोशिश कर रहा है.
वार ज़ोन में मौजूद रिपोर्टर के मुताबिक, तेल अवीव और हाइफा जैसे बड़े शहरों को ईरान सीधे निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, इजराइल के डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को नाकाम किया है, लेकिन वॉर हेड्स गिरने से नुकसान की खबरें भी आ रही हैं. इस बीच, सोशल मीडिया पर कई पुराने और एआई (AI) जनरेटेड वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जो भ्रम फैला रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान का स्टॉक खत्म होने के बजाय उसके हमले और ज्यादा बढ़ गए हैं.
लेबनान में भारी तबाही और मौतों का मंजर
इजराइल की सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत में भीषण एयर स्ट्राइक की है. बेरूत के आयशा बकर इलाके में किए गए हमले में एक बहुमंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई. इस हमले में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं. इजराइल का दावा है कि वह हिजबुल्ला के ठिकानों और उनके कमांड सेंटर को चुन-चुन कर निशाना बना रहा है, लेकिन रिहायशी इलाकों में हो रहे इन हमलों से आम लोगों की जान जा रही है.
हिजबुल्ला भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. उसने इजराइल के उत्तरी बॉर्डर पर स्थित मिलिट्री बेस, रडार सेंटर और टेलीकम्युनिकेशन सेंटर्स पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. इजराइल की सेना लेबनान के अंदर दाखिल तो हुई है, लेकिन फिलहाल उसके ऑपरेशंस बॉर्डर एरिया तक ही सीमित हैं. हिजबुल्ला के पास मौजूद ड्रोन और मिसाइलों के भंडार ने इजराइल के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
रिफाइनरी पर हमला और तेल की सप्लाई ठप
जंग की सबसे बड़ी आंच अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगी है. ईरान ने यूएई की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी, रुएस प्लांट पर ड्रोन से हमला किया है. इस प्लांट से हर दिन 9 लाख बैरल से ज्यादा तेल प्रोसेस किया जाता है. हमले के बाद प्लांट में भीषण आग लग गई, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मच गया है. ईरान अब रणनीतिक रूप से उन देशों को निशाना बना रहा है जो अमेरिका और इजराइल के करीबी माने जाते हैं.
ईरान ने इसके साथ ही हॉर्मुज ट्रेड (Strait of Hormuz) को बंद करने का बड़ा फैसला लिया है. यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक पेट्रोलियम सप्लाई का करीब 20 पर्सेंट हिस्सा गुजरता है. हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से एशियाई और यूरोपीय देशों तक पहुंचता है. ईरान के इस कदम से इराक, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
12 देशों में बारूद की बारिश
मिडिल ईस्ट के करीब 12 देश इस वक्त बारूद की गंध से दहल रहे हैं. ईरान ने सिर्फ इजराइल ही नहीं, बल्कि बहरीन, कतर और सऊदी अरब की तरफ भी अपनी मिसाइलों का रुख मोड़ दिया है. कतर के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि उसने ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया है. अमेरिका के सैन्य बेस भी ईरान के निशाने पर हैं, जिससे पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसा डर पैदा हो गया है.
जानकारों का मानना है कि अगर यह जंग जल्द नहीं रुकी, तो दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. एशियाई देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे ज्यादा गल्फ देशों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है. फिलहाल मिडिल ईस्ट का आसमान मिसाइलों और धुएं से भरा हुआ है और शांति का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है.
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