Kal Ka Mausam: कहीं लू का कहर तो कहीं गिरेगी बिजली, मौसम विभाग ने जारी कर दी बड़ी चेतावनी
देश के कई हिस्सों मौसम में इन दिनों काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. एक तरफ जहां गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में सूरज की तपिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में गुजरात के राजकोट में सबसे ज्यादा 42 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है. सौराष्ट्र और कच्छ के इलाकों में भीषण लू यानी हीट वेव का कहर जारी है.
मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि आने वाले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज और भी बदल सकता है. 14 मार्च से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस दस्तक देने वाला है. इसके असर से पहाड़ों पर बर्फबारी तेज होगी और मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान के साथ हल्की बारिश देखने को मिल सकती है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की इस लुका-छिपी के बीच अपनी सेहत का खास ध्यान रखें.
गुजरात और राजस्थान में गर्मी का कहर
गुजरात और राजस्थान के कई इलाकों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है. सौराष्ट्र, कच्छ और गुजरात के अन्य हिस्सों में हीट वेव से लेकर गंभीर हीट वेव जैसे हालात बने हुए हैं. राजकोट में पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है, जो सामान्य से काफी ज्यादा है. हिमाचल प्रदेश और उत्तर कोंकण के कुछ हिस्सों में भी गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. वहीं, राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में भी तापमान 38 से 42 डिग्री के बीच बना हुआ है. रात के तापमान की बात करें तो उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है.
उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट
गर्मी के बीच पहाड़ों से राहत की खबर भी आ रही है. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है. मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में 11 मार्च को भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश में 11 और 12 मार्च को ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है. उत्तराखंड में भी 17 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी का दौर जारी रह सकता है. इन इलाकों में बिजली कड़कने और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है.
मैदानी इलाकों में बदलेगा मौसम
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 14 से 16 मार्च के बीच हल्की बारिश हो सकती है. उत्तर प्रदेश में 15 और 16 मार्च को मौसम बदल सकता है, जहां बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. राजस्थान में भी 14 और 15 मार्च को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर देखने को मिल सकता है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है.
उत्तर-पूर्व और मध्य भारत का हाल
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी अगले एक हफ्ते तक बारिश का दौर जारी रहेगा. अरुणाचल प्रदेश में 12 से 14 मार्च के बीच भारी बारिश और बर्फबारी हो सकती है. वहीं, मध्य भारत के छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 13 से 15 मार्च के दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है. मध्य प्रदेश में भी 14 और 15 मार्च को मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है. पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में भी 15 और 16 मार्च को बारिश की संभावना बनी हुई है.
कोहरे और विजिबिलिटी की स्थिति
सिर्फ गर्मी और बारिश ही नहीं, बल्कि देश के कुछ हिस्सों में कोहरे का असर भी देखा गया है. उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और मेघालय में घना कोहरा छाया रहा. कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में विजिबिलिटी 200 मीटर से भी कम दर्ज की गई. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. कोंकण, गोवा और केरल के तटीय इलाकों में उमस भरी गर्मी परेशान कर सकती है.
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देश में 7.72 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड सक्रिय, बकाया लोन 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक
नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। देश में 7.72 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सक्रिय हैं और इनमें बकाया लोन 10.2 लाख करोड़ रुपए के करीब है। यह जानकारी बुधवार को आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई।
सरकारी बयान में कहा गया कि केसीसी प्लेटफॉर्म से 457 बैंक जुड़े हुए हैं और इस पर 1,998.7 लाख से ज्यादा क्रेडिट एप्लीकेशन प्रोसेस की गई हैं, जिसमें से 631.5 लाख कमर्शियल बैंकों, 337.2 लाख रीजनल बैंकों और 1,030 लाख एप्लीकेशन कॉरपोरेटिव बैंकों द्वारा प्रोसेस की गई हैं।
ये आंकड़े केसीसी के कार्यान्वयन में व्यापक संस्थागत भागीदारी को दर्शाते हैं और कृषि ऋण प्रदान करने में सहकारी बैंकों की केंद्रीय भूमिका को उजागर करते हैं।
हालिया सुधारों, जिनमें ऋण सीमा में वृद्धि, संबद्ध क्षेत्रों तक विस्तारित कवरेज और किसान ऋण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल एकीकरण शामिल हैं, ने केसीसी की पहुंच और पारदर्शिता में मजबूत सुधार किया है।
आंकड़ों पर आधारित निगरानी को सक्षम बनाकर, ऋण प्रक्रिया को तेज करके और पारदर्शी दावा निपटान सुनिश्चित करके, इन उपायों ने कृषि ऋण वितरण की परिचालन दक्षता को मजबूत किया है।
सरकार ने संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत फसल ऋण सीमा को 3 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है और मत्स्य पालन और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण सीमा को 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है।
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत, सीमांत और गैर-सीमांत किसानों के लिए उनकी भूमि जोत के आकार, निवेश क्षमता और आजीविका आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, सावधि ऋण और समग्र ऋण सीमाएं अलग-अलग निर्धारित की गई हैं।
भूमि जोत के आकार और फसल पैटर्न जैसे कारकों के आधार पर 10,000 रुपए से 50,000 रुपए तक की लचीली सीमा स्वीकृत की जा सकती है। समग्र केसीसी सीमा पांच साल की अवधि के लिए निर्धारित की जाएगी।
किसानों को संस्थागत ऋण से जोड़ने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और उनकी पहुंच में सुधार लाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कई सुगम उपाय लागू किए गए हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
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