'मिडिल ईस्ट संकट से घबराएं नहीं', आंध्र प्रदेश सरकार ने एक्वा किसानों से की अपील
अमरावती, 11 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य के एक्वा किसानों से घबराने या जल्दबाजी न करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि इस संकट का भारत के समुद्री खाद्य निर्यात पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
राज्य के कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री किंजारापु अच्चन्नायडु ने बुधवार को आंध्र प्रदेश स्टेट एक्वाकल्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (अप्सडा) के सह-उपाध्यक्ष, गैर-सरकारी समिति और एक्वाकल्चर सलाहकार समिति के सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की।
मंत्री ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों के कारण कुछ एक्वा किसान चिंतित हो गए हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत के कुल समुद्री खाद्य निर्यात का केवल 3 से 4 प्रतिशत ही मध्य-पूर्व देशों को जाता है और वह भी मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता है।
अच्चन्नायडु ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान और चीन जैसे अन्य देशों को भेजे जाने वाले समुद्री खाद्य कंटेनर रेड सी–सुएज नहर मार्ग, केप ऑफ गुड होप मार्ग और चीन सागर मार्ग से बिना किसी बाधा के जा रहे हैं। इसलिए मौजूदा हालात से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात पर बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2026 के अंत तक अमेरिकी बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है। विशेष रूप से 15 से 17 मार्च तक बोस्टन में होने वाले ‘सीफूड एक्सपो नॉर्थ अमेरिका’ के बाद मांग में तेजी आ सकती है। आमतौर पर अमेरिकी बाजार में 50 और 60 काउंट के झींगे की अच्छी मांग रहती है, जो आंध्र प्रदेश के किसान बड़ी मात्रा में पैदा करते हैं। इसलिए इस आकार तक उत्पादन होने से पहले बीच में कटाई करने की जरूरत नहीं है।
मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय झींगे पर अमेरिका द्वारा लगाए गए करीब 20 प्रतिशत शुल्क (बेसिक ड्यूटी, एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी सहित) अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर ही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी हुई है।
उन्होंने कंटेनरों की कमी से निर्यात प्रभावित होने की खबरों को भी गलत बताया। उनके अनुसार कंटेनरों की कोई कमी नहीं है और आंध्र प्रदेश से भेजे गए कंटेनर सामान्य रूप से चल रहे हैं।
अच्चन्नायडु ने कहा कि हर महीने के अंतिम सप्ताह में समीक्षा बैठक कर निर्यात की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और किसानों को समय-समय पर सुझाव दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पूरा होने से भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात के लिए नए बाजार खुलेंगे।
मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे घबराकर जल्दबाजी न करें, क्योंकि इससे बाजार में एक साथ अधिक आपूर्ति हो सकती है, जिससे झींगे की कीमतें गिरेंगी और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों को अपने उत्पादन चक्र के पूरा होने के बाद ही, निर्यातकों और मत्स्य अधिकारियों की सलाह से कटाई करनी चाहिए।
इस बीच मुख्यमंत्री ने भी जिला कलेक्टरों के सम्मेलन में मध्य-पूर्व की स्थिति के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि युद्ध के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश की जाए।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि वह अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रख रही है और निर्यातकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर राज्य से समुद्री खाद्य निर्यात को बिना बाधा जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
--आईएएनएस
डीएससी
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Kal Ka Mausam: कहीं लू का कहर तो कहीं गिरेगी बिजली, मौसम विभाग ने जारी कर दी बड़ी चेतावनी
देश के कई हिस्सों मौसम में इन दिनों काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. एक तरफ जहां गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में सूरज की तपिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में गुजरात के राजकोट में सबसे ज्यादा 42 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है. सौराष्ट्र और कच्छ के इलाकों में भीषण लू यानी हीट वेव का कहर जारी है.
मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि आने वाले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज और भी बदल सकता है. 14 मार्च से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस दस्तक देने वाला है. इसके असर से पहाड़ों पर बर्फबारी तेज होगी और मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान के साथ हल्की बारिश देखने को मिल सकती है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की इस लुका-छिपी के बीच अपनी सेहत का खास ध्यान रखें.
गुजरात और राजस्थान में गर्मी का कहर
गुजरात और राजस्थान के कई इलाकों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है. सौराष्ट्र, कच्छ और गुजरात के अन्य हिस्सों में हीट वेव से लेकर गंभीर हीट वेव जैसे हालात बने हुए हैं. राजकोट में पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है, जो सामान्य से काफी ज्यादा है. हिमाचल प्रदेश और उत्तर कोंकण के कुछ हिस्सों में भी गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. वहीं, राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में भी तापमान 38 से 42 डिग्री के बीच बना हुआ है. रात के तापमान की बात करें तो उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है.
उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट
गर्मी के बीच पहाड़ों से राहत की खबर भी आ रही है. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है. मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में 11 मार्च को भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश में 11 और 12 मार्च को ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है. उत्तराखंड में भी 17 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी का दौर जारी रह सकता है. इन इलाकों में बिजली कड़कने और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है.
मैदानी इलाकों में बदलेगा मौसम
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 14 से 16 मार्च के बीच हल्की बारिश हो सकती है. उत्तर प्रदेश में 15 और 16 मार्च को मौसम बदल सकता है, जहां बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. राजस्थान में भी 14 और 15 मार्च को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर देखने को मिल सकता है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है.
उत्तर-पूर्व और मध्य भारत का हाल
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी अगले एक हफ्ते तक बारिश का दौर जारी रहेगा. अरुणाचल प्रदेश में 12 से 14 मार्च के बीच भारी बारिश और बर्फबारी हो सकती है. वहीं, मध्य भारत के छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 13 से 15 मार्च के दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है. मध्य प्रदेश में भी 14 और 15 मार्च को मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है. पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में भी 15 और 16 मार्च को बारिश की संभावना बनी हुई है.
कोहरे और विजिबिलिटी की स्थिति
सिर्फ गर्मी और बारिश ही नहीं, बल्कि देश के कुछ हिस्सों में कोहरे का असर भी देखा गया है. उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और मेघालय में घना कोहरा छाया रहा. कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में विजिबिलिटी 200 मीटर से भी कम दर्ज की गई. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. कोंकण, गोवा और केरल के तटीय इलाकों में उमस भरी गर्मी परेशान कर सकती है.
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