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हम खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों से सहमत नहीं: चीन

बीजिंग, 11 मार्च (आईएएनएस)। चीन ने खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों को गलत बताया है। कहा है कि इसकी चपेट में आम लोग और गैर-सैन्य स्थल आ रहे हैं जो ठीक नहीं है इसलिए हम इससे असहमत हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।

प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि नागरिकों और जरूरी इमारतों को निशाना बनाना गलत है और इससे इलाके में तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि चीन ने अपने बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया।

तेहरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से ईरान अपने पड़ोसियों और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बना रहा है। इस हमले में कई गैर-सैन्य स्थलों पर भी ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिनकी जद में आने से कई लोग घायल हुए हैं या उनकी जान जा रही है।

इस बीच, ईरान ने कहा है कि वह देश में मौजूद अमेरिका और इजरायल से जुड़े बैंकों और आर्थिक ठिकानों पर हमला कर सकता है। उसके मुताबिक ये उसके एक बैंक पर हुए हमले का जवाब होगा।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े खातम अल-अनबिया मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि दुश्मनों के हमले के बाद अब ईरान के पास जवाब देने का पूरा अधिकार है। उनका यह बयान स्टेट मीडिया ने प्रसारित किया।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और इजरायल से जुड़े बैंक और आर्थिक सेंटर्स ईरान के निशाने पर आ सकते हैं। आईआरजीसी ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि बैंकों के आसपास न जाएं और उनसे कम से कम 1 किलोमीटर की दूरी बनाकर रखें।

अमेरिका-इजरायल और ईरान सैन्य संघर्ष के 12वें दिन ईरान ने दावा किया है कि उसने इजरायल के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला शुरू कर दिया है।

ईरानी मीडिया के अनुसार ईरान अमेरिकी टेक कंपनियों के दफ्तरों और डेटा सेंटर्स पर भी हमला कर सकता है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बुधवार को एक प्रस्ताव पर वोटिंग करने वाली है। इसमें ईरान से अपील की गई है कि वो बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन पर हमले बंद करे।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सर्विस एक्सपोर्ट और रेमिटेंस से भारत पर तेल संकट का असर कम हो सकता है: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट और विदेशों से आने वाली कमाई (रेमिटेंस) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पड़ने वाले आर्थिक असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं। हालांकि भारत अब भी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

डीएसपी नेत्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चा तेल भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे अहम कारकों में से एक बना हुआ है। हाल ही में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है, जिससे चिंता बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत रोजाना करीब 5.3 से 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत करता है, जबकि देश में घरेलू उत्पादन केवल करीब 0.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इस कारण भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल आयात करता है।

भारत के कुल आयात में पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 25 से 30 प्रतिशत है। इसलिए तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देश के विदेशी व्यापार संतुलन (एक्सटर्नल बैलेंस) को काफी प्रभावित करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के सालाना आयात बिल में करीब 12 से 15 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है और वित्त वर्ष 2027 तक ऊंची बनी रहती है, तो भारत का तेल व्यापार घाटा बढ़कर करीब 220 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) भी बढ़कर जीडीपी के 3.1 प्रतिशत से ऊपर जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहले ऐसे हालात में रुपए में 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट, महंगाई में बढ़ोतरी और बाजार में नकदी की कमी जैसी स्थितियां देखने को मिलती रही हैं।

हालांकि हाल के वर्षों में भारत के विदेशी सेक्टर की संरचना में बड़ा बदलाव आया है। मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस अब कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के झटके को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद कर रहे हैं।

इस वजह से रिपोर्ट का मानना है कि भले ही तेल की कीमतों में तेजी अभी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम है, लेकिन करंट अकाउंट बैलेंस पर इसका असर पहले की तुलना में कम हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अभी भी काफी अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि क्या तेल की कीमतें एक बार फिर रुपए की चाल, महंगाई और पूंजी प्रवाह को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक बनती हैं या नहीं।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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