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भारत में डेटा सेंटर निवेश और व्यापार समझौते रुपए को कमजोर किए बिना आर्थिक विकास को दे सकते हैं बढ़ावा: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश और नए व्यापार समझौतों से शुरुआत में आयात बढ़ सकता है और व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है। हालांकि, अगर इन निवेशों का वित्तपोषण विदेशी पूंजी से होता है और इनसे भविष्य में निर्यात को बढ़ावा मिलता है, तो रुपए पर दबाव जरूरी नहीं है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में तेजी से उभरता डेटा सेंटर उद्योग और व्यापार समझौतों का बढ़ता नेटवर्क देश की मध्यम अवधि की आर्थिक विकास संभावनाओं और भुगतान संतुलन की स्थिति को बेहतर बना सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि रुपए पर कमजोरी आए।
रिपोर्ट में कहा गया, कम चालू खाता घाटा अपने आप में मजबूती का संकेत नहीं होता और न ही बढ़ता हुआ घाटा जरूरी तौर पर आर्थिक दबाव को दर्शाता है। महत्वपूर्ण यह है कि घाटे का वित्तपोषण किस तरह किया जा रहा है और क्या यह व्यापार योग्य क्षेत्रों में निवेश को प्रतिबिंबित करता है।
रिपोर्ट में भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र के तेजी से विस्तार को रेखांकित करते हुए कहा गया कि इस क्षेत्र में करीब 70 अरब डॉलर का निवेश पहले से ही चल रहा है, जबकि अतिरिक्त 90 अरब डॉलर की घोषित परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।
इसमें यह भी कहा गया कि रुपए पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए केवल चालू खाता घाटे पर ध्यान देने के बजाय पूंजी प्रवाह और उन परिस्थितियों को भी देखना जरूरी है, जिनमें डेटा सेंटर और व्यापार समझौते रुपए के अनुकूल साबित हो सकते हैं।
हालांकि, अल्पावधि में एडवांस चिप, सर्वर, कूलिंग सिस्टम और बिजली से जुड़े उपकरणों के आयात से वस्तु व्यापार घाटा काफी बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर के निर्माण पर होने वाली कुल लागत का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा आयात पर खर्च होता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत को यह आकलन करना चाहिए कि आयात पूंजीगत वस्तुओं का है या मध्यवर्ती वस्तुओं का, जो आगे चलकर विनिर्माण और निर्यात क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। चीन ने भी इसी तरह का मॉडल अपनाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वियतनाम ने पहले यह दिखाया था कि शुरुआत में आयात बढ़ सकता है, लेकिन यदि यह निर्यात क्षेत्र में निवेश का हिस्सा है तो आगे चलकर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और निर्यात में मजबूती देखने को मिलती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि भारत मलेशिया की तरह चरणबद्ध निवेश चक्र अपनाता है, तो यह निवेश रुपए के लिए अनुकूल साबित हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि थाईलैंड की तरह विदेशी पूंजी (एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग यानी ईसीबी, ऋण प्रतिभूतियों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर अधिक निर्भरता से आयात के बड़े बिल का वित्तपोषण किया जा सकता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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