ईरान, इजराइल, अमेरिका का जो जंग है वह मिडिल ईस्ट तक पहुंचा हुआ है और इसकी वजह से तेल, एनर्जी, गैस इन सब पर संकट मंडरा रहा है। तेल महंगा हो गया। एनर्जी महंगा हो रहा है और इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि वो कुछ सेंशंस में जो है कटौती कर रहे हैं ताकि इनके क्रूड ऑयल्स को जो है उसके दाम को कंट्रोल में लाया जा सके क्योंकि क्रूड प्राइसेस में आग लगे हुए हैं। अब एक तरफ क्रूड के प्राइस में आग लगा हुआ है। एनर्जी सिक्योरिटी जो है वह खतरे में है क्योंकि ईरान लगातार इन लाखों को टारगेट कर रहा है और कह रहा है कि अब और इंटेंसिफाई कर देंगे स्टेट ऑफ हार्मोस को 100% कंट्रोल कर लेंगे जीरो कर देंगे। वहां से सप्लाई चेन और तेल की कीमतों में आग लगा देंगे। एनर्जी की कीमतों में आग लगा देंगे। पुतिन ने अपने देश के लोगों को अपने अधिकारियों को ऑर्डर दिया है कि यह जो यूरोप को गैस जा रहा है हां रोक दो कोई बेहतर सप्लायर इससे मिले हमारे जो फ्रेंडली नेशन है उनको जो भी जरूरत हो उसके इधर और कोई अच्छा हमारा सहयोगी ग्राहक मिले तो उसको दे दो यह और यूरोप को मत दो। पुतिन का कहना है कि वह साल 2027 में जीरो कर देगा सप्लाई और ऐसे में वो हमारे मुंह पर दरवाजा मारे उससे पहले ही हम उनको किक आउट कर देते हैं।
पुतिन की ये प्लानिंग वो भी जंग के वक्त में यूरोप की हालत खराब कर सकती है। साल 2024-25 का साल 2026 का डेटा बताता है कि किस तरह से यूरोपीय यूनियंस की जो है अभी भी निर्भरता रूस पर है। सेंशंस लगा रहा है। चरणबद्ध कटौती कर रहा है। साल 2027 में एनर्जी सप्लाई को जीरो कर देगा। लेकिन उसके बावजूद भी अभी अगर यह कुछ करते हैं पुतिन तो हाहाकार मच जाएगा। और उसके पीछे का जो कारण है, वो गणित है। यूरोपीय देश हैं साल 2025 में यूरोपीय संघ ने कुल गैस आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 13% रही साल 2021 में ये 45% था यानी कि मतलब सबसे बड़ा स्टेक होल्डर था रशिया एक टाइम पे उसके बाद अब ये 13% पर आ गया है।
अनुमानित रूप से यूरोप ने रूस से लगभग 40.9 अरब क्यूबिक मीटर जो गैस प्राप्त की एलएनजी पाइपलाइन बनाम एलएनजी का जो मामला है पाइपलाइन गैस की हिस्सेदारी गिरकर सिर्फ 6% रह गई है। जबकि एलएनजी तरल गैस का आयात बढ़ गया है। फ्रांस हगरी, नीदरलैंड, स्लोवाकिया इसके मुख्य खरीदार रहे हैं। अकेले जून 2025 में ईयू ने रूसी गैस पर 1.2 अरब यूरो खर्च किए। यूरोपीय संघ ने 2027 तक रूसी गैस पर जो है अपनी निर्भरता को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा हुआ है। लेकिन आंकड़े देखिए 2026 की बात करते हैं। 25 का तो आंकड़ा बताया हमने। जनवरी में रूसी पाइपलाइन गैस की आपूर्ति में 10% की वृद्धि हो गई। जिसका मुख्य कारण जो बताया जा रहा है वह तुर्क स्ट्रीम है। पाइप लाइन से बढ़ता प्रवाह है। वहीं जनवरी 2026 में यूरोप ने रूस से 2.27 अरब क्यूबिक मीटर एलएजी खरीदा जो बीते साल के इसी महीने से अधिक बताया जाता है।
फरवरी में भी रूस के यामल प्रोजेक्ट से निकलने वाली 100% एलएनजी शिपमेंट यूरोप पहुंची। यूरोपीय संघ जो है वह 18 मार्च 2026 से एलएजी और पाइपलाइन गैस पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने पर कानून अपना रहा है। ऐसे में जो यूरोप है वो यह प्लानिंग कर रहा है कि अब वो शिफ्ट करें अपने फोकस को और दूसरी तरफ रूस कह रहा है कि यह हमको एग्जिट कराए। इससे बेहतर है कि हम ही इनको नमस्ते कर देते हैं, टाटा कर देते हैं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया है कि अमेरिका में लगभग पचास वर्ष बाद एक नई बड़ी तेल रिफाइनरी का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना में भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा निवेश होगा। ट्रम्प ने इसे ऐतिहासिक समझौता बताते हुए कहा कि यह लगभग तीन सौ अरब डॉलर का सौदा है, जो अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़े समझौतों में से एक माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर लिखे संदेश में कहा कि यह समझौता ऊर्जा क्षेत्र में एक नया अध्याय खोलेगा। उन्होंने भारत की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश की सराहना करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। हम आपको बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले से ही भारत के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े तेल शोधन परिसर का संचालन करती है और ऊर्जा क्षेत्र में उसकी वैश्विक पहचान मजबूत है।
टेक्सास के ब्राउनस्विल बंदरगाह पर बनेगी शोधनशाला
यह नई तेल रिफाइनरी टेक्सास राज्य के ब्राउनस्विल बंदरगाह पर बनाई जाएगी। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, देश में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगी और अरबों डॉलर की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न करेगी। ट्रम्प का दावा है कि यह दुनिया की सबसे स्वच्छ तेल रिफाइनरी होगी और इसमें अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
यह रिफाइनरी पूरी तरह अमेरिका में उत्पादित शेल तेल पर आधारित होगी। परियोजना को अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग नामक कंपनी विकसित कर रही है। ब्राउनस्विल के महापौर जॉन कावेन जूनियर ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह निवेश दक्षिण टेक्सास के लिये ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी, हजारों गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा करेगी और शहर को ऊर्जा तथा व्यापार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
हम आपको बता दें कि नगर प्रशासन के अनुसार अप्रैल 2026 में ब्राउनस्विल बंदरगाह पर आधारशिला रखे जाने संबंधी समारोह आयोजित होने की संभावना है, जिसके साथ ही निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू होगा। यह परियोजना संघीय आर्थिक अवसर क्षेत्र के भीतर स्थापित की जाएगी, जिससे निवेश और व्यापार को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। बंदरगाह के गहरे जल मार्ग के कारण यहां से तैयार पेट्रोलियम उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से भेजा जा सकेगा।
प्रतिवर्ष भारी मात्रा में तेल प्रसंस्करण
ब्राउनस्विल प्रशासन के अनुसार यह रिफाइनरी पश्चिम टेक्सास के परमियन बेसिन से मिलने वाले हल्के शेल तेल को संसाधित करेगी। इस परियोजना के तहत बीस वर्ष का एक दीर्घकालिक समझौता भी प्रस्तावित है, जिसके माध्यम से लगभग एक अरब बीस करोड़ बैरल अमेरिकी शेल तेल की खरीद और प्रसंस्करण किया जाएगा। इस तेल का अनुमानित मूल्य लगभग एक सौ पच्चीस अरब डॉलर बताया गया है।
रिफाइनरी से लगभग पचास अरब गैलन परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन संभव होगा, जिनका अनुमानित मूल्य लगभग एक सौ पचहत्तर अरब डॉलर बताया जा रहा है। कुल मिलाकर यह परियोजना अमेरिका के व्यापार संतुलन में लगभग तीन सौ अरब डॉलर के सुधार में योगदान दे सकती है और देश की तेल शोधन क्षमता को भी बढ़ाएगी।
परियोजना के शुरू होने के बाद यहां बड़े पैमाने पर पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन का उत्पादन होगा। उन्नत तकनीक के उपयोग से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरण पर प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इस रिफाइनरी का संचालन पूरी तरह अमेरिका में उत्पादित शेल तेल से होगा, जिससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
क्या यह सचमुच पचास वर्ष में पहली शोधनशाला है?
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में पिछले दशकों में कुछ रिफाइनरियां शुरू हुई हैं, परंतु बड़े पैमाने की नई शोधनशाला कई दशकों से नहीं बनी। ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2022 में टेक्सास के गैलवेस्टन में एक नई शोधन इकाई शुरू हुई थी, लेकिन बड़े स्तर की डाउनस्ट्रीम क्षमता वाली अंतिम बड़ी शोधनशाला वर्ष 1977 में लुइजियाना के गैरीविल क्षेत्र में चालू हुई थी। इसी कारण ब्राउनस्विल परियोजना को लगभग पचास वर्षों में पहली बड़ी रिफाइनरी माना जा रहा है। हम आपको बता दें कि वर्ष 2024 की शुरुआत तक अमेरिका में कुल एक सौ बत्तीस पेट्रोलियम रिफाइनरियां कार्यरत थीं।
सामरिक महत्व
इस परियोजना का सामरिक महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में संभावित तेल अवरोध की आशंका के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। यदि किसी कारण से इस समुद्री मार्ग में बाधा आती है तो विश्व के तेल आपूर्ति तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे समय में अमेरिका अपनी घरेलू तेल उत्पादन और शोधन क्षमता बढ़ाकर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है।
नई रिफाइनरी अमेरिका को विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है और संकट की स्थिति में देश को रणनीतिक बढ़त दे सकती है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा शक्ति संतुलन में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाणिज्यिक महत्व और भारत की भूमिका
वाणिज्यिक दृष्टि से यह परियोजना अमेरिका और भारत दोनों के लिये लाभकारी हो सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश से अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में पूंजी और तकनीकी अनुभव आएगा, जबकि भारतीय कंपनी को वैश्विक ऊर्जा व्यापार में अपनी उपस्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही ब्राउनस्विल बंदरगाह ऊर्जा, विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परियोजना वैश्विक तेल व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निवेश सहयोग के लिहाज से आने वाले वर्षों में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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