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मोदी ने फोन करके हमारे राष्ट्रपति को... UAE ने ईरान जंग पर क्या बड़ा खुलासा कर दिया?

अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध में अगर कहीं सबसे ज्यादा हमला हो रहा है तो वो यूएई है। यूएई में लगातार ईरान निशाना साधकर हमले कर रहा है। इसे लेकर यूएई से जुड़े देश काफी परेशान हैं। ऐसे में यूएई के राजदूत से एक सवाल हुआ कि अब भारत और यूएई के रिश्ते जिस स्तर पर हैं। ऐसे में जिस तरह से वहां पर हमले हो रहे हैं। ऐसे में वो भारतीय परिवारों को क्या कहेंगे। सवाल के जवाब में यूएई के राजदूत ने जो बात बताई है वो बेहद अहम है। उन्होंने बताया है कि इस घटना की शुरूआत में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने तुरंत फोनकर सीधे यूएई के राष्ट्रपति से ही बात कर ली। जिसके बाद उन्हें ये भरोसा दिया गया कि खुद यूएई के राष्ट्रपति इस मामले को पर्सनली देखेंगे। 

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भारत में संयुक्त अरब अमीरात के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने सोमवार को एनडीटीवी को बताया कि संयुक्त अरब अमीरात अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष में शामिल होने की इच्छुक नहीं है, और उन्होंने कहा कि इसमें शामिल होने का कोई कारण भी नहीं है। मौजूदा संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व से संपर्क साधने के बारे में पूछे जाने पर, मिर्ज़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री का सम्मान न केवल खाड़ी देशों और उनके नेताओं के बीच है, बल्कि आम जनता और कारोबारी समुदाय के बीच भी है। संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत ने कहा कि यही विश्वसनीयता मौजूदा युद्ध में शामिल दोनों पक्षों ईरान और अमेरिका पर भी लागू होती है। मिर्जा ने बताया कि मोदी द्वारा ईरान और इज़राइल में अपने समकक्षों को किया गया एक फोन कॉल इस मुद्दे को हल कर सकता है, इस मुद्दे को समाप्त कर सकता है। सिर्फ एक फोन कॉल। उन्होंने कहा कि यह आत्मविश्वास प्रधानमंत्री मोदी के "योद्धाओं" के प्रति रुख से आता है, जैसा कि यूएई के राजदूत ने बताया है। उन्होंने कहा कि इज़राइल, ईरान और अमेरिका यूएई की धरती पर युद्ध लड़ रहे हैं।

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मिर्ज़ा ने आगे कहा कि इस मुद्दे को सुलझाने में संयुक्त अरब अमीरात की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि अबू धाबी की भू-राजनीतिक स्थिति संवेदनशील है, वह ईरान का पड़ोसी है और अब्राहम समझौते के तहत इज़राइल का साझेदार है। मिर्ज़ा ने कहा कि यहीं पर यूएई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने आगे कहा हम दोनों पक्षों के बीच बातचीत करा सकते हैं। मिर्ज़ा ने अपने नागरिक दृष्टिकोण को बनाए रखते हुए कहा मैं सैन्य व्यक्ति नहीं हूं। उन्होंने कहा कि उनके आकलन के अनुसार, यूएई में अब तक मामूली नुकसान की खबरें सही हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद जब युद्ध छिड़ गया, उसके कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की और खाड़ी देश पर ईरान के हमलों की कड़ी आलोचना की। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति को धन्यवाद भी दिया।  

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ईरान के लिए पुतिन पूरे यूरोप को एक साथ ठोकने उतर गए, अब होगा बड़ा खेल

ईरान, इजराइल, अमेरिका का जो जंग है वह मिडिल ईस्ट तक पहुंचा हुआ है और इसकी वजह से तेल, एनर्जी, गैस इन सब पर संकट मंडरा रहा है। तेल महंगा हो गया। एनर्जी महंगा हो रहा है और इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि वो कुछ सेंशंस में जो है कटौती कर रहे हैं ताकि इनके क्रूड ऑयल्स को जो है उसके दाम को कंट्रोल में लाया जा सके क्योंकि क्रूड प्राइसेस में आग लगे हुए हैं। अब एक तरफ क्रूड के प्राइस में आग लगा हुआ है। एनर्जी सिक्योरिटी जो है वह खतरे में है क्योंकि ईरान लगातार इन लाखों को टारगेट कर रहा है और कह रहा है कि अब और इंटेंसिफाई कर देंगे स्टेट ऑफ हार्मोस को 100% कंट्रोल कर लेंगे जीरो कर देंगे। वहां से सप्लाई चेन और तेल की कीमतों में आग लगा देंगे। एनर्जी की कीमतों में आग लगा देंगे। पुतिन ने अपने देश के लोगों को अपने अधिकारियों को ऑर्डर दिया है कि यह जो यूरोप को गैस जा रहा है हां रोक दो कोई बेहतर सप्लायर इससे मिले हमारे जो फ्रेंडली नेशन है उनको जो भी जरूरत हो उसके इधर और कोई अच्छा हमारा सहयोगी ग्राहक मिले तो उसको दे दो यह और यूरोप को मत दो। पुतिन का कहना है कि वह साल 2027 में जीरो कर देगा सप्लाई और ऐसे में वो हमारे मुंह पर दरवाजा मारे उससे पहले ही हम उनको किक आउट कर देते हैं।

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पुतिन की ये प्लानिंग वो भी जंग के वक्त में यूरोप की हालत खराब कर सकती है। साल 2024-25 का साल 2026 का डेटा बताता है कि किस तरह से यूरोपीय यूनियंस की जो है अभी भी निर्भरता रूस पर है। सेंशंस लगा रहा है। चरणबद्ध कटौती कर रहा है। साल 2027 में एनर्जी सप्लाई को जीरो कर देगा। लेकिन उसके बावजूद भी अभी अगर यह कुछ करते हैं पुतिन तो हाहाकार मच जाएगा। और उसके पीछे का जो कारण है, वो गणित है।  यूरोपीय देश हैं साल 2025 में यूरोपीय संघ ने कुल गैस आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 13% रही साल 2021 में ये 45% था यानी कि मतलब सबसे बड़ा स्टेक होल्डर था रशिया एक टाइम पे उसके बाद अब ये 13% पर आ गया है। 

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अनुमानित रूप से यूरोप ने रूस से लगभग 40.9 अरब क्यूबिक मीटर जो गैस प्राप्त की एलएनजी पाइपलाइन बनाम एलएनजी का जो मामला है पाइपलाइन गैस की हिस्सेदारी गिरकर सिर्फ 6% रह गई है। जबकि एलएनजी तरल गैस का आयात बढ़ गया है। फ्रांस हगरी, नीदरलैंड, स्लोवाकिया इसके मुख्य खरीदार रहे हैं। अकेले जून 2025 में ईयू ने रूसी गैस पर 1.2 अरब यूरो खर्च किए। यूरोपीय संघ ने 2027 तक रूसी गैस पर जो है अपनी निर्भरता को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा हुआ है। लेकिन आंकड़े देखिए 2026 की बात करते हैं। 25 का तो आंकड़ा बताया हमने। जनवरी में रूसी पाइपलाइन गैस की आपूर्ति में 10% की वृद्धि हो गई। जिसका मुख्य कारण जो बताया जा रहा है वह तुर्क स्ट्रीम है। पाइप लाइन से बढ़ता प्रवाह है। वहीं जनवरी 2026 में यूरोप ने रूस से 2.27 अरब क्यूबिक मीटर एलएजी खरीदा जो बीते साल के इसी महीने से अधिक बताया जाता है। 

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फरवरी में भी रूस के यामल प्रोजेक्ट से निकलने वाली 100% एलएनजी शिपमेंट यूरोप पहुंची। यूरोपीय संघ जो है वह 18 मार्च 2026 से एलएजी और पाइपलाइन गैस पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने पर कानून अपना रहा है। ऐसे में जो यूरोप है वो यह प्लानिंग कर रहा है कि अब वो शिफ्ट करें अपने फोकस को और दूसरी तरफ रूस कह रहा है कि यह हमको एग्जिट कराए। इससे बेहतर है कि हम ही इनको नमस्ते कर देते हैं, टाटा कर देते हैं।  

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  Sports

चोरी-छिपे पकड़ी ट्रेन, टीम इंडिया को जिताकर थर्ड एसी में क्यों घर लौटे वर्ल्ड चैंपियन शिवम दुबे?

Shivam Dube T20 World Cup 2026: एक लाख से ज्यादा दर्शकों से खचाखच भरे नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत को वर्ल्ड कप जिताने में शिवम दुबे ने अहम भूमिका निभाई. टीम इंडिया के 'एक्शन हीरो' ने अहमदाबाद-मुंबई सयाजी एक्सप्रेस पकड़ी और एसी थ्री-टियर कोच की अपर सीट पर रेलवे की मोटी कंबल के नीचे छिपकर अपने घर पहुंचे. Wed, 11 Mar 2026 12:43:00 +0530

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