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सिलेंडर की कमी से लोग हुए परेशान, इंडक्शन कुकटॉप समेत ये डिवाइस बने किचन हीरो, भूल जाएंगे महंगे LPG

Induction Chulha Price: ईरान और इजरायल के बीज चल रहे युद्ध के चलते पूरी दुनिया में गैस का संकट खड़ा हो गया है. भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. देश के कई शहरों में इस वक्त LPG सिलेंडर मिलने में मुश्किलें आ रही है. मगर भारत में लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है. जी हां, बीते 2 दिनों से देश के लोगों के बीच तेजी से इंडक्शन चुल्हे की डिमांड बढ़ गई है. इस कुकटॉप की ब्रिकी बढ़ गई है. लोग ई-कॉमर्स वेबसाइट और क्विक डिलीवरी ऐप्स से भी  Induction Cooktop ऑर्डर कर रहे हैं. आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं गैस सिलेंडर के अलावा और क्या-क्या ऑपशन मौजूद है.

LPG सप्लाई प्रभावित होने के चलते बढ़ी डिमांड

माना जा रहा है कि देश के बड़े शहरों में भी इन दिनों गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो गई है. यहां अधिकांश लोग सिलेंडर पर निर्भर करते हैं. वहां गैस की कमी होने से लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप को बैकअप प्लान की तरह अपना लिया है. केंद्र सरकार ने कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई पर भी पाबंदी लगा दी है. इस वजह से कुछ इलाकों में रेस्टोरेंट्स को भी गैस नहीं मिल पा रही है. वहीं, दूसरी तरफ LPG सिलेंडर बुकिंग के लिए न्यूनतम इंतजार अवधि 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है ताकि जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सके.

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आउट ऑफ स्टॉक हुआ इंडक्शन चुल्हा

बता दें कि लोगों के बीच इस प्रोडक्ट को लेकर इतनी डिमांड बढ़ गई है कि अब प्रोडक्ट आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं. पिछले 24 घंटों में इंडक्शन कुकटॉप बनाने वाली कंपनियों के शेयर्स में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा.

क्विक डिलीवरी ऐप्स पर भी मांग

  • इंडक्शन कुकटॉप की डिमांड रैपिड डिलीवरी ऐप्स पर भी बढ़ गई है. ब्लिंकिट पर इंडक्शन कुकटॉप पर डिस्काउंट भी दिया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर प्रोडक्ट पहले ही स्टॉक आउट चुके हैं और अब सिर्फ कुछ ही विकल्प बचे हैं.
  • Swiggy इंस्टामार्ट पर भी इंडक्शन चुल्हे की डिमांड बढ़ गई है. ये प्लेटफॉर्म भी डिस्काउंट दे रहा है. हालांकि, यहां भी काफी प्रोडक्ट बिक चुके हैं और स्टॉक कम है.
  • जेप्टो भी किचन अप्लायंस पर छूट दे रहा है, जिसके चलते लोगों ने वहां से भी Induction Stove खरीद लिए. इस ऐप पर भी अब ज्यादा स्टॉक नहीं बचा हुआ है.
  • इंस्टामार्ट पर इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री बीते कुछ दिनों की तुलना में अब 10 गुना बढ़ गई है. वहीं, बिग बास्केट पर भी सोमवार से अब तक 5 गुना तेजी से इंडक्शन चूल्हे की डिमांड बढ़ गई है.

E-Commerce साइट पर 20 गुना बढ़ी बिक्री

फ्लिपकार्ट पर पिछले चार-पांच दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की सेल तीन गुना बढ़ गई है. अमेजन पर 24 घंटों के अंदर 20 गुना ज्यादा इंडक्शन चूल्हे बिके हैं. 

गैस फ्री रसोई घर बनाने के 3 अन्य विकल्प

अगर आपको ऐसा लगता है कि खाना बनाने के लिए सिर्फ गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ेगी तो यह गलत है. जी हां, कई विशेषज्ञों का मानना है कि सिलेंडर के अलावा अगर हम इलेक्ट्रिक एप्लायंस का इस्तेमाल करते हैं तो ज्यादा पैसे बचा सकते हैं. बिजली उपकरणों का खर्चा प्रतिमाह सिलेंडर के दाम से कम होता है. चलिए आपको बताते हैं बिना गैस के खाना बनाने के तरीके.

इंडक्शन कुकटॉप

गैस के अलावा खाना बनाने के लिए इंडक्शन गैस चूल्हा भी एक गैजेट है. यह LPG का सबसे बड़ा विकल्प है. इसके प्रयोग से हीट का कम नुकसान होता है और खाना जल्दी बन जाता है. आपको एक अच्छा इंडक्शन कुकटॉप 1500 रुपए से लेकर 2500 रुपए के बीच आसानी से मिल जाएगा. हालांकि, कई महंगे कुकटॉप भी मिल रहे हैं.

इलेक्ट्रिक राइस कूकर

खाना बनाने के लिए दूसरा सस्ता विकल्प है इलेक्ट्रिक राइस कूकर या मल्टी कूकर. आप इस डिवाइस में दाल, चावल, खिचड़ी और सब्जियों को उबाल सकते हैं. इसकी कीमत आमतौर पर 1200 से 1800 के बीच होती है. न्यूक्लियर फैमिली के लिए ये बेस्ट उपकरण है.

इलेक्ट्रिक केतली

इलेक्ट्रिक केतली भी अच्छा विकल्प है. आप इसमें पानी गर्म कर सकते हैं, चाय बना सकते हैं, दूध उबाल सकते हैं और अंडे भी बॉइल कर सकते हैं. किसी भी प्रकार का इंस्टेंट फूड इस केतली में आसानी से बनाएं जा सकते हैं. एक अच्छा Electric Kettle आपको 500 से 1000 के बीच मिल जाएगा.

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10 लाख सौर पंप लगाए गए, 13 लाख ग्रिड-कनेक्टेड पंप सौर ऊर्जा से संचालित : जोशी

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय नवीन एवं नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्री, प्रल्हाद जोशी ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत, देशभर में 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप लगाए गए हैं और 13 लाख से अधिक ग्रिड-संयुक्त कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संवर्धित किया गया है।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जोशी ने भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से भारत के खेतों और घरों तक पहुंच रही है, जिससे किसानों को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध हो रही है, सिंचाई लागत कम हो रही है और कृषि उत्पादन में सुधार हो रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज एक किसान अपने खेत की सिंचाई सौर ऊर्जा का उपयोग करके कर सकता है, और एक घर, जो कभी बिजली के बिलों को लेकर चिंतित रहता था, अब छत पर सौर पैनलों के माध्यम से अपनी खुद की बिजली उत्पादन कर सकता है। यह केवल ऊर्जा परिवर्तन नहीं है बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी रूपांतरण है।”

नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियां कृषि में बढ़ती भूमिका निभा रही हैं, विशेष रूप से सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से, जो किसानों को डीज़ल पर निर्भरता कम करने और दिन के समय विश्वसनीय सिंचाई तक पहुँचने में सक्षम बनाती हैं।

उन्होंने कहा, गेहूं के लिए डीज़ल सिंचाई की लागत लगभग 6,790 रुपये प्रति एकड़ हो सकती है और कपास जैसी फसलों के लिए यह 8,000 रुपये प्रति एकड़ से अधिक हो सकती है। सौर पंप किसानों को प्रति एकड़ वार्षिक रूप से 5,000 से 6,500 रुपये बचाने में मदद कर सकते हैं। साथ ही उत्सर्जन को भी कम करते हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार पीएम-कुसुम 2.0 तैयार कर रही है, जिसमें 10 गीगावाट का समर्पित एग्री-पीवी घटक शामिल होगा, जो फसलों के साथ सौर पैनलों के सह-स्थानिकरण को बढ़ावा देगा।

यह पहल किसानों को वही भूमि पर कृषि गतिविधियाँ जारी रखते हुए बिजली उत्पादन करने में सक्षम बनाएगी, और ग्रामीण भारत में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए एक नया मॉडल तैयार करेगी।

जोशी ने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन को कृषि खेती के साथ जोड़ने से भूमि की उत्पादकता में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिल सकता है।

अनुमान बताते हैं कि भारत की एग्रीवोल्टाइक क्षमता 3,000 GW से लेकर लगभग 14,000 GW तक हो सकती है, जो कृषि के साथ नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करने में अवसर के पैमाने को दर्शाती है।

जोशी ने पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की प्रगति को भी रेखांकित किया। योजना के तहत 31 लाख से अधिक घरों ने छत पर सौर पैनल स्थापित करके लाभ लिया है, जिससे परिवार अपनी खुद की बिजली उत्पादन कर सकते हैं और बिजली बिल कम कर सकते हैं।

देश की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 2014 में लगभग 81 गीगावाट से बढ़कर आज लगभग 275 गीगावाट हो गई है और अब भारत की आधी से अधिक स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रही है।

सौर क्षमता 2014 में लगभग 2.8 गीगावाट से बढ़कर लगभग 143 गीगावाट हो गई, पवन क्षमता लगभग 21 गीगावाट से बढ़कर लगभग 55 गीगावाट हो गई और बायोपावर क्षमता 8.1 गीगावाट से बढ़कर लगभग 12 गीगावाट हो गई, जो देश में नवीकरणीय ऊर्जा के त्वरित विस्तार को दर्शाता है।

--आईएएनएस

पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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