Tarun Tejpal को दुष्कर्म केस में 10 साल की सजा, पूर्व संपादक बोले- जाएंगे Supreme Court
पणजी, छह अगस्त ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने बृहस्पतिवार को बंबई उच्च न्यायालय द्वारा 2013 के दुष्कर्म मामले में 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद कहा कि वह राजनीति का शिकार है और उसे गत 13 सालों से उसकी पत्रकारिता की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। तेजपाल ने यह भी आरोप लगाया कि उसका करियर और उसकी किताबों की छपाई भी रोक दी गई है। उसने फैसला आने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वह बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा और साथ ही भरोसा जताया कि अंतत: सच सामने आएगा।
तेजपाल ने कहा, ‘‘हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। हमें लगता है कि यह आदेश गलत है। हम इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाएंगे।’’ तेजपाल ने आरोप लगाया कि उसे ‘तहलका’ के लिए गए काम की वजह से निशाना बनाया गया है।
उसने कहा, ‘‘हम निश्चित रूप से उच्चतम न्यायालय जाएंगे। हमें कोई शक नहीं है कि पिछले 13 सालों से ‘तहलका’ में मेरे काम की वजह से ही वे मेरे पीछे पड़े हैं। सुनवाई अदालत में सात साल तक मुकदमा लड़ने के बाद हम बरी हो गए थे, लेकिन वे फिर से हमारे पीछे पड़ गए हैं।’’ ‘तहलका’ के पूर्व संपादक ने दावा किया कि सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफबोलने या लिखने वालों को निशाना बनाया जा रहा था।
उसने कहा, ‘‘जो लोग उनके साथ हैं, वे बरी हो जाते हैं, लेकिन जिन लोगों ने उनके खिलाफ पत्रकारिता की है या उनके खिलाफ कुछ कहा है, वे ऐसे लोगों के पीछे पड़ जाते हैं। पिछले 12 सालों में ऐसे कई मामले देखे जा सकते हैं जिनमें उन्होंने अपने विरोधियों को फंसाया है। उमर खालिद पिछले छह सालों से जेल में हैं, और हमारे जैसे कई और लोग भी हैं।’’ तेजपाल ने आरोप लगाया कि इस मामले ने वास्तव में उसके पत्रकारिता करियर को खत्म कर दिया।
उसने कहा, ‘‘उन्होंने मेरी पत्रकारिता रोक दी, उन्होंने ‘तहलका’ को रोक दिया, उन्होंने मेरी किताबों के छपने पर रोक लगा दी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इतनी बड़ी न्यायपालिका में ऐसे न्यायाधीश ज़रूर होंगे जो मेरा सच देखेंगे।
सच सामने आएगा।’’ तेजपाल को झटका देते हुए बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने बृहस्पतिवार को उसे 2013 में अपनी एक पूर्व कनिष्ठ सहयोगी के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराया। अदालत ने 2021 में गोवा के सत्र न्यायालय द्वारा उसे बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। तेजपाल ने यह कहते हुए नरमी की गुहार लगाई कि वह ‘‘राजनीति का शिकार’’ हैं और दो बेटियों का पिता है।
वहीं, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा देने का अनुरोध किया ताकि यह कड़ा संदेश दिया जा सके कि ‘‘ना का मतलब ना ही होता है’’।
PM Modi की 2025 की विदेश यात्रा पर 187 करोड़ रुपये खर्च हुए, सरकार ने दी जानकारी।
नयी दिल्ली, छह अगस्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2025 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जापान समेत 23 देशों की यात्राओं पर 180 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। विदेश मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर देशवार और वर्षवार आंकड़े साझा किए गए। इसके अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब 74.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
इसमें छह से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा भी शामिल है। आप के संजय सिंह और माकपा के वी. शिवदासन ने विदेश मंत्रालय से 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का देशवार विवरण और इन यात्राओं पर हुए खर्च का वर्षवार एवं यात्रा-वार ब्योरा मांगा था। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने अपने जवाब में प्रधानमंत्री द्वारा 2021 से की गई विदेश यात्राओं और प्रत्येक यात्रा पर हुए कुल खर्च का वर्षवार तथा यात्रा-वार विवरण दिया।
इसके अनुसार, प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा (2011) पर 10,74,27,363 रुपये, रूस यात्रा (2013) पर 9,95,76,890 रुपये, फ्रांस यात्रा (2011) पर 8,33,49,463 रुपये और जर्मनी यात्रा (2013) पर 6,02,23,484 रुपये खर्च हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े महंगाई या मुद्रा विनिमय दर में बदलाव को समायोजित किए बिना वास्तविक खर्च को दर्शाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री की विभिन्न देशों की यात्राओं पर करीब 187 करोड़ रुपये खर्च हुए।
इनमें से फ्रांस यात्रा पर 25,59,82,902 रुपये, अमेरिका यात्रा पर 16,54,84,302 रुपये, सऊदी अरब यात्रा पर 15,54,03,792.47 रुपये, ब्राजील यात्रा पर 17,72,22,144 रुपये, चीन यात्रा पर 10,59,90,561 रुपये और ब्रिटेन यात्रा पर 9,91,55,061.39 रुपये खर्च हुए। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने 2025 में मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, नामीबिया, मालदीव, जापान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, ओमान और इथियोपिया की भी यात्रा की। सरकार ने जुलाई 2025 में राज्यसभा में एक अन्य लिखित जवाब में बताया था कि 2021 से 2024 तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च करीब 295 करोड़ रुपये रहा।
आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री की वर्ष 2024 में रूस, यूक्रेन, अमेरिका और ब्राजील समेत 16 देशों की यात्राओं पर करीब 109 करोड़ रुपये, वर्ष 2023 में करीब 93 करोड़ रुपये, वर्ष 2022 में 55.82 करोड़ रुपये और वर्ष 2021 में करीब 36 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश, अमेरिका, इटली और ब्रिटेन की यात्रा की थी। इन यात्राओं पर क्रमश: 1,00,71,288 रुपये, 19,63,27,806 रुपये, 6,90,49,376 रुपये और 8,57,41,408 रुपये खर्च हुए थे।
विदेश मंत्रालय से इन यात्राओं के दौरान हुए द्विपक्षीय समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू), घोषित निवेश प्रतिबद्धताओं तथा इनके परिणामस्वरूप भारत में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का देशवार विवरण भी मांगा गया था। मार्गेरिटा ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय विदेश यात्राएं अन्य देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी को बढ़ावा देने का स्थापित माध्यम हैं। इन यात्राओं के दौरान हुए समझौते और सहमतियां प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा सहयोग और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने में मदद करती हैं।’’ उन्होंने 35 पृष्ठों के जवाब में इन यात्राओं के दौरान हुए एमओयू का देशवार विवरण साझा करते हुए बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया।
सरकार द्वारा साझा सूची के अनुसार, जुलाई 2021 से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान कुल 316 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









