'कच्ची उम्र में न डालें दबाव...'वैभव सूर्यवंशी की उप-कप्तानी पर फिर छिड़ा संग्राम, तमतमाए पूर्व कप्तान
Vaibhav sooryavanshi vice captain controversy: वैभव सूर्यवंशी को दलीप ट्रॉफी के लिए ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाए जाने पर विवाद गहरा गया है.गुजरात के पूर्व कप्तान प्रियांक पांचाल समेत कई विशेषज्ञों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने छोटे बच्चे पर कप्तानी का दबाव डालने के बजाय उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट समझने का समय मिलना चाहिए.
भगवान कृष्ण की जन्म कथा: आधी रात कारागार में जन्मे कान्हा, चमत्कारिक रूप से खुद खुल गए थे बंद ताले
Krishna janam katha: द्वापर युग में मथुरा नगरी पर कंस नामक अत्याचारी राजा का शासन था। कंस अत्यंत क्रूर और अहंकारी स्वभाव का था, और उसने अपने ही पिता उग्रसेन को कारागार में बंद कर राजगद्दी हथिया ली थी। उसकी बहन देवकी का विवाह वासुदेव नामक यदुवंशी राजकुमार से हुआ था।
विवाह के बाद जब कंस स्वयं देवकी और वासुदेव को उनके घर छोड़ने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनते ही कंस भयभीत और क्रोधित हो उठा। उसने तुरंत देवकी और वासुदेव दोनों को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया।
एक-एक कर मारी गईं देवकी की सात संतानें
आकाशवाणी से भयभीत कंस ने देवकी की हर संतान को जन्म लेते ही मार डालने का निश्चय किया। इस क्रम में देवकी और वासुदेव की एक-एक कर छह संतानों को कंस ने निर्ममता से मार डाला। कहा जाता है कि सातवीं संतान के रूप में गर्भ में पल रहे शेषनाग के अंश को योगमाया की शक्ति से देवकी के गर्भ से निकालकर वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे बलराम का जन्म हुआ।
आधी रात कारागार में हुआ श्रीकृष्ण का जन्म
समय बीतने पर जब देवकी की आठवीं संतान का जन्म होने वाला था, तब पूरे मथुरा में भय और चिंता का माहौल था। भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को, ठीक आधी रात के समय, कारागार में देवकी ने एक दिव्य पुत्र को जन्म दिया। यह बालक साक्षात भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण थे।
जन्म के समय अद्भुत घटनाएं घटित हुईं। कारागार की काल-कोठरी अचानक दिव्य प्रकाश से जगमगा उठी। इसी बीच चमत्कारिक ढंग से कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए और बंद पड़े फाटकों के ताले स्वयं ही खुल गए।
यमुना पार कर वासुदेव पहुंचे गोकुल
नवजात कृष्ण को कंस के अत्याचार से बचाने के लिए आकाशवाणी हुई कि वासुदेव इस बालक को तुरंत गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आएं और बदले में वहां जन्मी कन्या को कारागार में ले आएं। वासुदेव ने तुरंत एक टोकरी में बालक कृष्ण को रखा और आधी रात में ही कारागार से निकल पड़े।
रास्ते में यमुना नदी उफान पर थी, लेकिन जैसे ही वासुदेव नदी में उतरे, यमुना का जलस्तर स्वयं ही कम होने लगा और उन्हें आसानी से पार जाने का मार्ग मिल गया। कहा जाता है कि शेषनाग ने स्वयं अपने फन का छत्र बनाकर बारिश से बालक कृष्ण की रक्षा की।
नंद बाबा के घर पहुंचे वासुदेव, अदला-बदली हुई पूर्ण
यमुना पार कर वासुदेव गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर पहुंचे, जहां उसी रात नंद बाबा के घर एक कन्या का जन्म हुआ था। वासुदेव ने चुपचाप बालक कृष्ण को वहां छोड़ा और उस नवजात कन्या को लेकर वापस मथुरा के कारागार लौट आए। लौटते ही कारागार के सभी ताले और पहरेदार पहले जैसी सामान्य स्थिति में आ गए, मानो कुछ हुआ ही न हो।
कंस को मिला योगमाया से जवाब
सुबह होते ही कंस को नवजात के जन्म की सूचना मिली, और वह तुरंत कारागार पहुंचा। उसने जैसे ही उस नवजात कन्या को मारने का प्रयास किया, वह बालिका उसके हाथों से छूटकर आकाश में जा पहुंची और योगमाया के दिव्य रूप में प्रकट होकर कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला बालक तो सुरक्षित कहीं और बड़ा हो रहा है। यह सुनकर कंस भयभीत हो उठा।
गोकुल में बीता कृष्ण का बचपन
इसके बाद बालक कृष्ण का पालन-पोषण गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर हुआ। बड़े होकर श्रीकृष्ण ने अनेक असुरों का वध किया और अंततः मथुरा लौटकर अपने मामा कंस का वध कर प्रजा को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। यही कारण है कि हर वर्ष भाद्रपद अष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में उनके जन्म का उत्सव बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-कथाओं पर आधारित है। Haribhoomi.com किसी भी तरह की मान्यता या तथ्य की पुष्टि नहीं करती है। इन्हें केवल सूचना के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय, व्रत या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
Haribhoomi







