जरूरत की खबर- रिंगवार्म क्या है:क्या यह संक्रामक हो सकता है, डॉक्टर से जानें फैलने का कारण, लक्षण और इलाज, न करें ये 9 गलतियां
आमतौर पर स्किन पर कहीं हल्की खुजली को लोग सामान्य एलर्जी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह रिंगवार्म भी हो सकता है। रिंगवार्म एक तरह का फंगल इन्फेक्शन है, जो पूरे शरीर में कहीं भी हो सकता है। यह संक्रमित व्यक्ति, जानवर या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से फैलता है। समय पर इलाज न किया जाए तो यह पूरे शरीर में फैल सकता है। इसलिए जरूरत की खबर में आज रिंगवार्म की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. प्रियंका अग्रवाल, कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- रिंगवार्म क्या है? क्या दाद को ही रिंगवार्म कहा जाता है? जवाब- रिंगवार्म एक फंगल इन्फेक्शन है, जिसमें स्किन पर गोल या छल्ले जैसे दाने बन जाते हैं और खुजली होती है। इसे आमतौर पर ‘दाद’ भी कहा जाता है। यह संक्रमण स्किन की सबसे ऊपरी लेयर में मौजूद ‘डर्मेटोफाइट’ फंगस के कारण होता है। यह फंगस हाथ, पैर, कमर या चेहरे पर ज्यादा होता है। इसलिए दाद भी अक्सर शरीर के इन्हीं हिस्सों पर होता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकता है। सवाल- वार्म का मतलब कीड़ा होता है तो क्या रिंगवार्म किसी कीड़े के कारण होता है? जवाब- रिंगवार्म नाम से ऐसा लगता है कि यह किसी कीड़े के काटने से जुड़ी बीमारी है, लेकिन वास्तव में इसका कीड़े से कोई लेना–देना नहीं है। स्किन पर गोल–गोल दाग (रिंग के आकार के दाग) के कारण इसका नाम रिंगवार्म है। यह फंगस नमी और गर्म वातावरण में तेजी से बढ़ता है और संपर्क के जरिए फैल सकता है। सवाल- शरीर के किन हिस्सों में रिंगवार्म हो सकता है? जवाब- रिंगवार्म शरीर के सभी हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। यह अक्सर स्किन के खुले रहने वाले हिस्सों (हाथ, पैर, गर्दन, चेहरा और पेट) पर दिखाई देता है। इसके अलावा यह जांघ के अंदरूनी हिस्से, बगल (आर्मपिट), दाढ़ी, सिर की स्किन (स्कैल्प) और नाखूनों में भी हो सकता है। सवाल- रिंगवार्म कितनी तरह का होता है? जवाब- रिंगवार्म को शरीर के प्रभावित हिस्से के आधार पर अलग-अलग प्रकारों में बांटा जा सकता है। सवाल- रिंगवार्म के संकेत क्या हैं? जवाब- रिंगवार्म का सबसे कॉमन लक्षण स्किन पर गोल या छल्ले जैसा दाग है। ये दाने लाल या भूरे रंग के हो सकते हैं और इनमें खुजली होती है। दाग के किनारे हल्के उभरे हुए और बीच का हिस्सा साफ या सूखा दिख सकता है। रिंगवार्म के सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- रिंगवार्म किन कारणों से फैलता है? जवाब- रिंगवार्म संक्रमित व्यक्ति की स्किन के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा संक्रमित जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली या गाय को छूने से भी ये फंगस इंसानों में फैल सकता है। सभी कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या रिंगवार्म छूने से फैल सकता है? जवाब- हां, रिंगवार्म बेहद संक्रामक होता है और संक्रमित स्किन को छूने से फैल सकता है। फंगस स्किन की ऊपरी परत में मौजूद रहता है और सीधे संपर्क से दूसरी जगह या दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इसके अलावा संक्रमित कपड़े, तौलिया, बिस्तर या जिम टूल्स इस्तेमाल करने से भी संक्रमण फैल सकता है। सवाल- किन लोगों को रिंगवार्म का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- इन्हें रिंगवार्म का ज्यादा रिस्क होता है- सवाल- क्या पसीना, गंदगी या टाइट कपड़े पहनने से रिंगवार्म का जोखिम बढ़ सकता है? जवाब- हां, ये सभी फंगस के पनपने-बढ़ने के लिए अनुकूल कंडीशंस हैं। लंबे समय तक गीले या टाइट कपड़े पहनने से स्किन में एयर फ्लो (हवा का प्रवाह) कम हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। गंदगी या स्किन की साफ-सफाई न रखने से भी फंगस तेजी से पनप सकता है। सवाल- रिंगवार्म का इलाज क्या है? जवाब- इसका इलाज संक्रमण की गंभीरता और संक्रमित हिस्से के आधार पर किया जाता है। हल्के संक्रमण में एंटीफंगल क्रीम, लोशन या पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। यह कुछ हफ्तों में ठीक हो जाता है। अगर संक्रमण सिर, नाखून या किसी ऐसे हिस्से में है, जहां एयर फ्लो बहुत कम है तो डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें। सवाल- रिंगवार्म होने पर कौन-सी गलतियां संक्रमण को बढ़ा सकती हैं? जवाब- रिंगवार्म होने पर कुछ कॉमन गलतियां संक्रमण को बढ़ा सकती हैं। जैसे- सभी कॉमन गलतियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या घरेलू नुस्खों से रिंगवार्म ठीक हो सकता है? जवाब- कुछ घरेलू उपाय जैसे विनेगर या हर्बल तेल हल्के संक्रमण में खुजली कम करने में मदद कर सकते हैं। इनमें हल्के एंटीफंगल गुण होते हैं, जो ट्रीटमेंट में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये इलाज का विकल्प नहीं हैं। इन कंडीशंस में डॉक्टर से कंसल्ट करके दवा जरूर लें- रिंगवॉर्म के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल सवाल- रिंगवार्म आमतौर पर कितने दिनों में ठीक हो जाता है? जवाब- सही इलाज और एंटीफंगल क्रीम के इस्तेमाल से यह आमतौर पर 2-4 हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो जाता है। हालांकि, अगर संक्रमण शरीर के बड़े हिस्से में फैल गया है या बालों में है, तो इसे ठीक होने में कुछ महीने भी लग सकते हैं। सवाल- क्या नमक से रिंगवॉर्म ठीक हो सकता है? जवाब- नमक का पानी प्रभावित हिस्से को साफ रखने और खुजली कम करने में मदद तो कर सकता है, लेकिन यह फंगस को जड़ से खत्म नहीं करता। फंगल इंफेक्शन को पूरी तरह खत्म करने के लिए डॉक्टर की बताई एंटीफंगल दवाएं ही सबसे असरदार होती हैं। सवाल- क्या नारियल तेल लगाने से रिंगवॉर्म ठीक होता है? जवाब- नारियल तेल में हल्के एंटीफंगल और मॉइश्चराइजिंग गुण होते हैं, जो खुजली और इन्फेक्शन कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह अकेले रिंगवार्म को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकता है। सवाल- क्या रिंगवॉर्म से हमेशा के लिए निशान पड़ जाते हैं? जवाब- अधिकतर मामलों में रिंगवार्म ठीक होने के बाद स्किन सामान्य हो जाती है और निशान नहीं पड़ते हैं। लेकिन लंबे समय तक संक्रमण रहने या खुजलाने से स्किन पर दाग पड़ सकते हैं या स्किन का रंग बदल सकता है। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मसल-फैट रेशियो सही तो ब्रेन रहता एक्टिव: घटता बीमारियों का रिस्क, पतला होना काफी नहीं, मसल-फैट का सही बैलेंस जरूरी ‘जर्नल ऑफ अल्जाइमर्स एसोसिएशन’ में हाल ही में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, हमारे शरीर का मसल-फैट रेशियो ब्रेन हेल्थ का इंडिकेटर है। अगर शरीर में मसल का रेशियो फैट से ज्यादा है तो ब्रेन फंक्शनिंग बेहतर रहती है। आगे पढ़िए…
रिलेशनशिप एडवाइज- हसबैंड मेरे हर इमोशन को ‘ट्रॉमा’ कहते हैं:गले लगाने, प्यार जताने की बजाय लेक्चर देने लगते हैं, मैं क्या करूं?
सवाल: मैं दिल्ली में रहती हूं। मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं। मेरे हसबैंड बहुत समझदार हैं, लेकिन हर बात को मेंटल हेल्थ के फ्रेम में देखने लगते हैं। अगर मैं गुस्सा करती हूं तो कहते हैं, "ये कोई पुराना ट्रॉमा है।" मैं उदास होती हूं तो कहते हैं, "तुम्हें हीलिंग की जरूरत है।" वह मेरे बहुत नॉर्मल इमोशंस को भी मेंटल हेल्थ से लेबल कर देते हैं। पहले मैं उनकी बातों को इग्नोर कर देती थी। लेकिन अब मुझे बहुत फ्रस्ट्रेशन होता है। मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब: सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी फीलिंग्स को इतने साफ शब्दों में लिखा है। दूसरी बात ये कि ज्यादातर औरतें ऐसी परेशानियों में चुप बनी रहती हैं। सोचती हैं कि शायद मैं ही ओवररिएक्ट कर रही हूं। लेकिन आपने ये सवाल पूछा यानी आप अपनी भावनाओं को लेकर सजग हैं और खुद के बारे में भी सोच रही हैं। ये तारीफ की बात है। आपकी शादी को 3 साल हुए हैं। ये वो वक्त है, जब रिश्ता या तो मजबूती की ओर बढ़ रहा होता है या छोटी-छोटी दरारें दिखने लगती हैं। आपके सवाल से आपके हसबैंड समझदार लगते हैं, लेकिन हर इमोशन को ट्रॉमा कहने की उनकी आदत आपको फ्रस्ट्रेट कर रही है। चलिए, समझते हैं कि ये क्यों हो रहा है और आप क्या कर सकती हैं। ट्रॉमा क्या है? आमतौर पर लोग ट्रॉमा शब्द सुनते ही सोचते हैं कि ट्रॉमा का मतलब है, कोई बड़ा हादसा, जैसे एक्सिडेंट, हिंसा या मारपीट से हुई तकलीफ। जैसे हॉस्पिटल में ट्रॉमा सेंटर होता है, जहां गंभीर चोट वाले पेशेंट्स आते हैं। लेकिन साइकोलॉजी में ट्रॉमा की परिभाषा इससे कहीं ज्यादा विस्तृत है। ट्रॉमा सिर्फ ‘बुरा अनुभव’ भर नहीं है। जरूरी और बुनियादी चीजों की अनुपस्थिति भी ट्रॉमा ही है। इसे ऐसे समझिए कि मान लीजिए एक पेड़ है। उसे स्वस्थ रहने के लिए धूप, पानी, हवा और अच्छी मिट्टी चाहिए। भले ही उसे कोई काटे नहीं, तोड़े नहीं, लेकिन ये सारी जरूरी चीजें न मिलें, तो वो कमजोर हो जाएगा। ये पेड़ का ट्रॉमा है। इसी तरह बच्चे को प्यार, सुरक्षा, दया, प्रोटेक्शन और बिना शर्त का सपोर्ट चाहिए। अगर ये सबकुछ न मिले, तो भी ये ट्रॉमा है। भले ही उसके साथ कोई मारपीट न हुई हो। इस तरह देखें तो हर इंसान के जीवन में कोई-न-कोई ट्रॉमा होता है, क्योंकि हममें से कोई भी परफेक्ट वातावरण में नहीं पला–बढ़ा होता है। आपके हसबैंड इस बारे में अवेयर हैं आपके हसबैंड इस बारे में जागरूक हैं। इसका मतलब है कि वो शायद किताबें पढ़कर ट्रॉमा के बारे में सीख रहे हैं। ये भी हो सकता है कि उन्होंने कभी इसके लिए थेरेपी ली हो, जिससे उन्हें मदद मिली हो। ये अच्छी बात है, लेकिन समस्या ये है कि वो इसे हर छोटी बात पर अप्लाई कर देते हैं। आप कह रही हैं कि वह आपके सामान्य गुस्से या उदासी को भी ट्रॉमा कहकर लेबल कर देते हैं। इससे आपको लगता है कि वो आपकी फीलिंग्स को इग्नोर कर रहे हैं। क्या आपके हसबैंड 'जज' कर रहे हैं? अगर आपके हसबैंड बात-बात पर आपकी भावनाओं को 'ट्रॉमा' कहने लगे, तो थोड़ी सावधानी जरूरी है। मनोविज्ञान का ज्ञान अच्छी बात है, लेकिन अगर वो इसे सिर्फ आप पर थोप रहे हैं और खुद को 'ज्ञानी' मान रहे हैं, तो यह रिश्ते के लिए सही नहीं है। ये संवाद कब हेल्दी है और कब रेड फ्लैग, इसे ग्राफिक से समझिए- अगर ये रेड फ्लैग्स आपकी लाइफ से मैच करते हैं, तो ये रिश्ते को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अच्छी बात ये है कि यह सबकुछ ठीक किया जा सकता है। आपके हसबैंड समझदार हैं, तो वो सुन सकते हैं। उनके बैकग्राउंड को समझें किसी के खास बिहेवियर की वजह समझने के लिए उसके बैकग्राउंड को समझना जरूरी है। ऐसा हो सकता है आपके हसबैंड ने खुद कोई ट्रॉमा फेस किया हो या किताबें पढ़कर खुद को हील किया हो। वो सोचते होंगे कि ये ज्ञान शेयर करके वो आपकी मदद कर रहे हैं। हर किसी की हीलिंग जर्नी अलग है यहां आपके हसबैंड को ये समझना चाहिए कि हर किसी की हीलिंग की जर्नी पर्सनल होती है। अगर कोई भी दूसरा शख्स किसी को बताए कि तुम्हें कोई ‘ट्रॉमा’ है तो वो पावर गेम जैसा लग सकता है। किसी को तकलीफ हो सकती है। बेहतर है कि खुद अपने ट्रॉमा को पहचानें और स्वीकारें, फिर खुद ही हीलिंग के लिए आगे बढ़ें। अपने हसबैंड से बात करें सबसे जरूरी है खुलकर बात करना, लेकिन गुस्से में नहीं, बल्कि शांति से। हसबैंड पर आरोप लगाने की बजाय उन्हें अपनी भावनाएं समझाएं। आप कुछ इस तरह कह सकती हैं- “मैं जानती हूं कि आपने साइकोलॉजी से बहुत कुछ सीखा है और आप मेरी मदद करना चाहते हो। लेकिन जब आप मेरी हर बात को 'ट्रॉमा' का नाम दे देते हो, तो मुझे लगता है कि मेरी भावनाओं की कोई कद्र नहीं है। मुझे चाहिए कि आप सिर्फ मुझे समझने की कोशिश करो।" अपनी समझ भी बढ़ाएं इस बारे में कुछ चीजें पढ़ें, खुद थोड़ा एक्टिव रहें। आप चाहें तो खुद मनोविज्ञान की कुछ अच्छी किताबें पढ़ सकती हैं, जैसे 'बॉडी कीप्स द स्कोर' या 'द साइकोलॉजी ऑफ ट्रॉमा।' इससे आपको समझ में आएगा कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। शायद आपकी नाराजगी कम हो जाए क्योंकि अब आप उनकी भाषा समझ पाएंगी। उनसे उसी भाषा में बात कर पाएंगी। याद रखें कि यह सब अपनी मर्जी और अपनी रफ्तार से करें। किसी के दबाव में आकर नहीं। जब बातचीत से हल न निकले तो क्या करें? अगर बार-बार समझाने के बाद भी उनका बर्ताव नहीं बदलता, तो बहुत परेशान न हों, एक्सपर्ट की मदद लें। एक्सपर्ट की हेल्प लें- आप दोनों 'कपल थेरेपी' ले सकते हैं। एक प्रोफेशनल थेरेपिस्ट आप दोनों को सही तालमेल बिठाना सिखा सकता है। एहसास जरूरी है, नाम नहीं- प्यार में एक-दूसरे की भावनाओं को समझना जरूरी है, उन पर कोई 'ठप्पा' या लेबल लगाना नहीं। कभी-कभी जब आप उदास हों, तो उनका बस गले लगा लेना और यह कहना कि 'मैं हूं ना' किसी भी भारी-भरकम मनोवैज्ञानिक शब्द से कहीं ज्यादा मरहम का काम करता है। अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें ऐसे माहौल में परेशान होना स्वाभाविक है। आप अपनी सेहत का ख्याल रखें- रुटीन बदलें- रोज वॉक पर जाएं, अच्छी नींद लें और दोस्तों से मिलें। स्पेस लें- अगर बहुत ज्यादा चिढ़ महसूस हो रही हो, तो एक रात अलग कमरे में सोकर खुद को शांत करें। धैर्य रखें- रिश्ता तोड़ने की जल्दबाजी न करें। आपके पति बुरे इंसान नहीं हैं, बस उन्हें रिश्ते में बैलेंस सीखने की जरूरत है। आप दिल्ली जैसे शहर में अपनी जिंदगी बखूबी संभाल रही हैं, आप मजबूत हैं। यह बुरा वक्त भी गुजर जाएगा। आखिर में ये समझें प्यार में पार्टनर के बिहेवियर में सुधार से ज्यादा उसका साथ होना जरूरी है। आखिर में बस इतना याद रखें कि प्यार का मतलब एक-दूसरे की 'कमियां ठीक करना' नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ 'आगे बढ़ना' है। आपकी भावनाएं गलत नहीं हैं। हिम्मत जुटाएं और खुलकर बात करें। आप अकेली नहीं हैं। बहुत सी महिलाएं इस दौर से गुजरती हैं और अपनी सूझबूझ रिश्ते को और मजबूत बना लेती हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टनर चैट्स का स्क्रीनशॉट रखता है: झगड़े में पुरानी बातें ले आता है, फिर सबूत दिखाता है, क्या ये रेड फ्लैग है? आपका सवाल पार्टनर की सिर्फ एक आदत को लेकर नहीं है। यह सवाल इमोशनल सेफ्टी और उस भरोसे को लेकर है, जो किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप जो महसूस कर रही हैं, वह न तो छोटी बात है और न ही आप ओवर-सेंसिटिव हैं। आगे पढ़िए…
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